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42 साल पुराने मुआवजे के आंकलन में जुटा सिंचाई विभाग

Thu, 12 May 2022 07:09 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 12 May 2022 07:09 PM IST
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Irrigation department engaged in the assessment of 42 years old compensation
नियामताबाद । अलीनगर थाना क्षेत्र के भुपौली चौकी अंतर्गत भुपौली पम्प कैनाल से जुड़े नीचुपुर माइनर की परियोजना पूर्ण हो चुकी है। लेकिन इस माइनर से जुड़े छह गांव के दो सौ किसान अपनी अधिग्रहित भूमि के मुवावजे के लिए 42 साल से संघर्ष कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के जनता दरबार में मुआवजे की मांग उठाई गई तो अब सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बैठक कर क्षतिपूर्ति का आकलन करने की बात कह रहे है।
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देश में आजादी के 75 वर्ष पर अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। वहीं जनपद के चहनिया विकास खंड के अंतर्गत भुपौली पम्प कैनाल से जुड़े माइनर नंबर एक नीचूपुर माइनर के खरा, डेरवा, परशुराम पुर, नीचूपुर, त्रिपाठ, बरईपुर गांव के लगभग दो सौ किसान सिंचाई विभाग की ओर से अधिग्रहित की गई भूमि के मुुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भारतीय किसान संघ के ब्लाक के मंत्री बलवंत सिंह ने कहा कि किसानों को भूमि सिंचाई विभाग द्वारा नहर की परियोजना के लिए 1980 में अधिग्रहण किया गया था। कहा कि 42 वर्ष बाद भी आज तक मुआवजा नहीं मिल सका है।
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जबकि इसके लिए सभी जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई जा चुकी है। बताया कि संगठन के सहयोग से मुख्यमंत्री के पोर्टल पर डाला गया फिर लखनऊ में मुख्यमंत्री से जनता दरबार में मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सिंचाई विभाग दो सौ किसानों की अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के लिए 11 मई को जिला मुख्यालय पर बैठक हुई है। जिसमें आकलन रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजे जाने की बात कही गई है। गांव के किसान हृदय नारायण सिंह, प्रवीण सिंह, राजेश सिंह, सत्यनारायण सिंह, फूलचंद खरवार, सुराहु खरवार, सियाराम त्यागी, रामविलास पाण्डेय, उमाशंकर सिंह ने मुुआवजा मिलने की उम्मीद पर खुशी जताई है। इस संबंध में अधिशासी अभियंता मनोज सिंह ने कहा कि नीचुपुर माइनर से जुड़े 203 किसानों की क्षतिपूर्ति के लिए किसानों की सहमति ली जा रही है। उनकी सहमति के बाद शासन से धनराशि की मांग की जाएगी।
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