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हिंदू नहीं जागेगा तो आने वाला समय भयावह होगा : तोगड़िया
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शहरनामा की फोटो---------चहनियां के डेरवाकला में अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद कार्यकर्ता सम्मेलन मे
चहनिया। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक डाॅ. प्रवीण तोगड़िया ने कहा है कि आज हिंदू समाज नहीं जागेगा, तो आने वाला समय भयावह है। डेरवा बलुआ गांव में बृहस्पतिवार को आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। डाॅ. प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि 1979 में राम मंदिर की हुंकार फूटी थी और सरकार मांग नहीं मान रही थी। जब हिंदू संगठन 1990 में 80 बाई 40 वर्गमीटर जमीन की लड़ाई लड़ते हुए शिलान्यास पर अड़ गए, तब सरकार ने आधी रात को इसकी अनुमति प्रदान कर दी और राम मंदिर का शिलान्यास किया।
फिर मामला न्यायालय में पहुंच गया और कहा गया कि मंदिर कहीं भी बन सकता है। बात मंदिर की नहीं थी, बल्कि रामजन्म भूमि की थी। जिस पर न्यायालय ने कनाडा की कंपनी से उस जगह की सर्जरी करवाकर जांच करवाई और उसके नीचे मंदिर के अवशेष मिले, जिस पर पुरातत्व विभाग की ओर से उसकी खोदाई की, तो पूरा सच सामने आ गया। हम लोगों ने लड़ाई शुरू कर दी और कहा मंदिर के लिए सरकार से धन नहीं लेंगे और राम मंदिर न्यास समिति के नाम एक ट्रस्ट बनवाया। उसमें 8 करोड़ परिवार के लोगों से सवा रुपये चंदा एकत्र किया गया। उसी पैसे से 60 हजार घन मीटर पत्थर मंदिर के लिए गढ़वा कर रखा। 32 वर्षों के संघर्ष के बाद मंदिर निर्माण में उस पत्थर को दे दिया गया।
वहीं डा. तोगड़िया ने राम मंदिर के लिए सीने पर गोली खाने की इच्छा से पहुंचे कारसेवक रणजीत यादव, राजेन्द्र पाण्डेय, परशुराम सिंह को माला पहनाकर मुंह मीठा कराया। उनका सम्मान करते हुए कहा कि आज राम मंदिर का असली हकदार ये लोग हैं। सरकार गोलियां बरसा रही थी, पानी बौछारें चलायी जा रही थी। पुलिस जमकर लाठियां भांज रही थी, लेकिन बाबरी मस्जिद ध्वस्त करने वाले ये वीर कारसेवक पीछे हटने का नाम नहीं ले रहे थे।
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मस्जिद की एक-एक ईंंट गायब कर दी। उसका नामोंनिशान मिटा दिया। दो हजार वर्ष पूर्व न क्रिश्चियन थे और ना ही मुस्लिम लेकिन हिंदू को तोड़कर उनको मिटा कर इनका जन्म हुआ। संवाद
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फिर मामला न्यायालय में पहुंच गया और कहा गया कि मंदिर कहीं भी बन सकता है। बात मंदिर की नहीं थी, बल्कि रामजन्म भूमि की थी। जिस पर न्यायालय ने कनाडा की कंपनी से उस जगह की सर्जरी करवाकर जांच करवाई और उसके नीचे मंदिर के अवशेष मिले, जिस पर पुरातत्व विभाग की ओर से उसकी खोदाई की, तो पूरा सच सामने आ गया। हम लोगों ने लड़ाई शुरू कर दी और कहा मंदिर के लिए सरकार से धन नहीं लेंगे और राम मंदिर न्यास समिति के नाम एक ट्रस्ट बनवाया। उसमें 8 करोड़ परिवार के लोगों से सवा रुपये चंदा एकत्र किया गया। उसी पैसे से 60 हजार घन मीटर पत्थर मंदिर के लिए गढ़वा कर रखा। 32 वर्षों के संघर्ष के बाद मंदिर निर्माण में उस पत्थर को दे दिया गया।
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वहीं डा. तोगड़िया ने राम मंदिर के लिए सीने पर गोली खाने की इच्छा से पहुंचे कारसेवक रणजीत यादव, राजेन्द्र पाण्डेय, परशुराम सिंह को माला पहनाकर मुंह मीठा कराया। उनका सम्मान करते हुए कहा कि आज राम मंदिर का असली हकदार ये लोग हैं। सरकार गोलियां बरसा रही थी, पानी बौछारें चलायी जा रही थी। पुलिस जमकर लाठियां भांज रही थी, लेकिन बाबरी मस्जिद ध्वस्त करने वाले ये वीर कारसेवक पीछे हटने का नाम नहीं ले रहे थे।
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मस्जिद की एक-एक ईंंट गायब कर दी। उसका नामोंनिशान मिटा दिया। दो हजार वर्ष पूर्व न क्रिश्चियन थे और ना ही मुस्लिम लेकिन हिंदू को तोड़कर उनको मिटा कर इनका जन्म हुआ। संवाद