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50 हेक्टेयर में बागवानी और एक हेक्टेयर में लगाई जाएगी नर्सरी
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पीडीडीयू नगर। गंगा किनारे गांवों में विभिन्न फलों के बाग लहलहाएंगे। उद्यान विभाग ने इसके लिए पहल की है। जिले में 50 हेक्टेयर में बागवानी और एक हेक्टेयर में नर्सरी लगवाने का लक्ष्य तय किया गया है। बागवानी लगवाने वाले अभ्यर्थियों को अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें विभाग की वेबसाइट पर आवेदन करना होगा। शासन स्तर से धनराशि सीधे खाते में भेजी जाएगी।
नमामी गंगे योजना के तहत जिले में गंगा किनारे 40 से अधिक गांवों को चयनित किया गया है। गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए इन गांवों में सालिड-लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया। अब गंगा किनारे के गांवों में बागवानी लगवाने की योजना है। इसकी जिम्मेदारी उद्यान विभाग को सौंपी गई है। जिले में 50 हेक्टेयर का लक्ष्य दिया गया है। किसान गंगा किनारे अपने खेतों में विभिन्न छायादार व फलदार वृक्षों के बाग लगा सकते हैं। ग्राम पंचायतें पौधों की नर्सरी भी तैयार कर सकती हैं। एक हेक्टेयर की नर्सरी के लिए विभाग 7.50 लाख रुपये अनुदान देगा। बागवानी की खेती करने वाले किसानों के लिए शासन के मानक तय किया है। इसके अनुसार न्यूनतम 0.20 हेक्टेयर के लेकर अधिकतम एक हेक्टेयर जमीन में बागवानी लगवा सकते हैं। उद्यान निरीक्षकों की ओर से हर तीसरे माह बागवानी का सत्यापन किया जाएगा। यदि सब कुछ ओके रहा तो पहले चरण में किसानों के खाते में तीन हजार रुपये मासिक के हिसाब से आठ माह तक प्रोत्साहन राशि भेजी जाएगी। पैसा डीबीटी के जरिए सीधे किसानों के खाते में पहुंचेगा। योजना का सही ढंग से मानक के अनुरूप काम करने पर किसानों को 36 माह तक प्रोत्साहन राशि मिलेगी। तीन साल तक तीन-तीन हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से भेजे जाएंगे। गंगा किनारे स्थित चहनियां, नियामताबाद व धानापुर ब्लाक के गांवों में योजना लागू की जाएगी।
गंगा किनारे गांवों में बागवानी लगवाई जाएगी। जिले में 50 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। बागवानी लगाने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाएगा।
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अलका श्रीवास्तव, उद्यान अधिकारी
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नमामी गंगे योजना के तहत जिले में गंगा किनारे 40 से अधिक गांवों को चयनित किया गया है। गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए इन गांवों में सालिड-लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया। अब गंगा किनारे के गांवों में बागवानी लगवाने की योजना है। इसकी जिम्मेदारी उद्यान विभाग को सौंपी गई है। जिले में 50 हेक्टेयर का लक्ष्य दिया गया है। किसान गंगा किनारे अपने खेतों में विभिन्न छायादार व फलदार वृक्षों के बाग लगा सकते हैं। ग्राम पंचायतें पौधों की नर्सरी भी तैयार कर सकती हैं। एक हेक्टेयर की नर्सरी के लिए विभाग 7.50 लाख रुपये अनुदान देगा। बागवानी की खेती करने वाले किसानों के लिए शासन के मानक तय किया है। इसके अनुसार न्यूनतम 0.20 हेक्टेयर के लेकर अधिकतम एक हेक्टेयर जमीन में बागवानी लगवा सकते हैं। उद्यान निरीक्षकों की ओर से हर तीसरे माह बागवानी का सत्यापन किया जाएगा। यदि सब कुछ ओके रहा तो पहले चरण में किसानों के खाते में तीन हजार रुपये मासिक के हिसाब से आठ माह तक प्रोत्साहन राशि भेजी जाएगी। पैसा डीबीटी के जरिए सीधे किसानों के खाते में पहुंचेगा। योजना का सही ढंग से मानक के अनुरूप काम करने पर किसानों को 36 माह तक प्रोत्साहन राशि मिलेगी। तीन साल तक तीन-तीन हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से भेजे जाएंगे। गंगा किनारे स्थित चहनियां, नियामताबाद व धानापुर ब्लाक के गांवों में योजना लागू की जाएगी।
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गंगा किनारे गांवों में बागवानी लगवाई जाएगी। जिले में 50 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। बागवानी लगाने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाएगा।
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अलका श्रीवास्तव, उद्यान अधिकारी