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बसौली के नवनिर्वाचित प्रधान के वित्तीय अधिकार पर हाइकोर्ट ने लगाई रोक
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नौगढ़। फर्जी जाति और निवास प्रमाण पत्र के सहारे ग्राम प्रधान बने बसौली गांव के नवनिर्वाचित प्रधान पप्पू गोंड के वित्तीय प्रशासनिक अधिकार पर हाइकोर्ट ने रोक लगा दी है। प्रधान पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी अनुसूचित जाति, निवास प्रमाण पत्र के सहारे चुनाव जीता था जबकि ये अनुसूचित जाति के नहीं अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में आते हैं। हाईकोर्ट के निर्देश पर देर शाम सहायक विकास अधिकारी पंचायत प्रेमचंद्र ने ग्राम पंचायत का डोंगल डीएक्टिव कर दिया है।
ग्राम प्रधान पर कार्रवाई के बाद क्षेत्र के दो अन्य प्रधानों के खिलाफ निवास स्थान को लेकर चल रही निवास जांच पड़ताल का मामला चर्चा में है। नौगढ़ में एसडीएम न्यायालय में निवास प्रमाण पत्र को लेकर ग्राम पंचायत ठठवां और बजरडीहा का मामला विचाराधीन है। पप्पू गोंड ने ग्राम पंचायत बसोली से आवेदन किया था। बसौली ग्राम पंचायत की प्रधान पद की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। याचिका में आरोप है कि पप्पू पड़री कला, तहसील रावर्टसगंज, सोनभद्र का रहने वाला है। पप्पू गोंड कुछ सालों से गांव में मजदूरी करने के बाद अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाया और सीट आरक्षित होने पर चुनाव मैदान में ताल ठोक दी, फिर 41 से ज्यादा मतों से वो जीत भी गया। पप्पू गोंड की यह खुशी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी और विरोधियों ने डीएम संजीव सिंह से इनके जाति प्रमाण पत्र की शिकायत कर दी।
जब जांच हुई तो पता चला कि सोनभद्र निवासी पप्पू गोंड अनुसूचित जनजाति के हैं। प्रधान के द्वारा कोई साक्ष्य उपलब्ध न कराए जाने पर तहसीलदार नौगढ़ लालता प्रसाद ने जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया। इसको लेकर ग्राम प्रधान हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन राहत नहीं मिली और कोर्ट ने दोबारा दो माह का समय निर्धारित करते हुए मामले को देखने के लिए एसडीएम नौगढ़ को निर्देशित किया है। हाईकोर्ट के आदेश की पत्रावली के साथ प्रार्थना पत्र लेकर दोपहर बाद तीन बजे पप्पू गोंड से पराजित प्रधान प्रत्याशी बचाउ राम ने एसडीएम और खंड विकास अधिकारी कार्यालय को देते हुए ग्राम पंचायत का खाता सीज करने का अनुरोध किया। जिसके बाद नवनिर्वाचित प्रधान पर कार्रवाई हुई। सहायक विकास अधिकारी पंचायत प्रेमचंद्र ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ग्राम पंचायत बसौली के खाते का डोंगल डीएक्टिव कर दिया गया है।
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ग्राम प्रधान पर कार्रवाई के बाद क्षेत्र के दो अन्य प्रधानों के खिलाफ निवास स्थान को लेकर चल रही निवास जांच पड़ताल का मामला चर्चा में है। नौगढ़ में एसडीएम न्यायालय में निवास प्रमाण पत्र को लेकर ग्राम पंचायत ठठवां और बजरडीहा का मामला विचाराधीन है। पप्पू गोंड ने ग्राम पंचायत बसोली से आवेदन किया था। बसौली ग्राम पंचायत की प्रधान पद की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। याचिका में आरोप है कि पप्पू पड़री कला, तहसील रावर्टसगंज, सोनभद्र का रहने वाला है। पप्पू गोंड कुछ सालों से गांव में मजदूरी करने के बाद अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाया और सीट आरक्षित होने पर चुनाव मैदान में ताल ठोक दी, फिर 41 से ज्यादा मतों से वो जीत भी गया। पप्पू गोंड की यह खुशी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी और विरोधियों ने डीएम संजीव सिंह से इनके जाति प्रमाण पत्र की शिकायत कर दी।
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जब जांच हुई तो पता चला कि सोनभद्र निवासी पप्पू गोंड अनुसूचित जनजाति के हैं। प्रधान के द्वारा कोई साक्ष्य उपलब्ध न कराए जाने पर तहसीलदार नौगढ़ लालता प्रसाद ने जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया। इसको लेकर ग्राम प्रधान हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन राहत नहीं मिली और कोर्ट ने दोबारा दो माह का समय निर्धारित करते हुए मामले को देखने के लिए एसडीएम नौगढ़ को निर्देशित किया है। हाईकोर्ट के आदेश की पत्रावली के साथ प्रार्थना पत्र लेकर दोपहर बाद तीन बजे पप्पू गोंड से पराजित प्रधान प्रत्याशी बचाउ राम ने एसडीएम और खंड विकास अधिकारी कार्यालय को देते हुए ग्राम पंचायत का खाता सीज करने का अनुरोध किया। जिसके बाद नवनिर्वाचित प्रधान पर कार्रवाई हुई। सहायक विकास अधिकारी पंचायत प्रेमचंद्र ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ग्राम पंचायत बसौली के खाते का डोंगल डीएक्टिव कर दिया गया है।
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