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ब्लाक परिसर में काट दिए गए हरे पेड़, बीडीओ को पता ही नहीं
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पीडीडीयू नगर। एक और केंद्र सरकार से लेकर प्रदेश सरकार तक हर वर्ष करोड़ों रुपए पौधरोपण के लिए खर्च कर रही है। एक एक पौधे लगाने के लिए काफी मेहनत किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर जिले के चहनिया ब्लॉक परिसर में सुंदरीकरण के नाम पर कई हरे पेड़ काट दिए गए और खंड विकास अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं हुई। शिकायत के बाद वन विभाग ने भी खानापूर्ति करते हुए मौके पर मौजूद मजदूरों के खिलाफ केस दर्ज कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेज दी। रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं लिखा गया है कि किसके आदेश पर पेड़ काटे जा रहे थे। बीडीओ ने खुद स्वीकार किया कि पेड़ बिना वन विभाग के परमिशन के ही काट दिए गए। वन विभाग को परमिशन के लिए पत्र लिखा गया था अभी परमिशन नहीं मिली थी इसी बीच में पेड़ दीवार को फाड़ रहे थे जिसको देखते हुए बिना परमिशन मिले ही पेड़ों को कटवा दिया गया। रविवार का दिन था इसलिए हमें पता नहीं चला और शीशम, सागवान और गोल्ड मोहर के पेड़ काट दिए गए।
चहनियां ब्लॉक परिसर में सुंदरीकरण का कार्य कराया जा रहा है इसके तहत रविवार को यूकेलिप्टस के तीन पेड़ों के साथ शीशम सागवान और गोल्ड मोहर के तीन हरे पेड़ भी बिना वन विभाग के परमिशन के ही काट दिए गए। जबकि ब्लॉक परिसर के पेड़ संपत्ति रजिस्टर में दर्ज हैं उसके लिए एक कमेटी है उसकी संस्तुति के बाद ही निविदा निकालकर नीलामी की जा सकती है। पर यहां किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। इसकी शिकायत स्थानीय निवासी दीपेश कुमार सिंह ने आईजीआरएस पर की।जिसके बाद वन विभाग जागा और मौके पर पहुंच कर जांच की। यदि शिकायत न हुई होती तो चोरी से पेड़ बेच दिए गए होते। वन विभाग ने जिलाधिकारी संजीव सिंह को प्रेषित अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि चहनिया ब्लॉक परिसर में तीन यूकेलिप्टस, शीशम सागवान और गोल्ड मोहर के तीन पेड़ काट दिए गए और उनको बोटों में तब्दील कर दिया गया था। मौके पर मौजूद गुलाब राम और रमेश पर केस दर्ज कर दिया गया। लेकिन वन विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहीं भी यह जिक्र नहीं किया कि किसके आदेश पर ब्लॉक परिसर में पेड़ काटे जा रहे थे। यह साफ है कि बिना अधिकारियों के अनुमति के और आदेश के कोई भी ब्लॉक परिसर के पेड़ों को नहीं काट सकता तो फिर उन पेड़ों को काटने का आदेश देने वाले अधिकारियों का जिक्र वन विभाग के रिपोर्ट में क्यों नहीं है आखिर उनको क्यों नहीं दोषी बनाया गया। इस संदर्भ में जब खंड विकास अधिकारी सतीश चंद्र त्रिपाठी से बात किया गया तो उन्होंने बताया कि परिसर में पार्क का निर्माण कराया जा रहा है जिसमें यूकेलिप्टस के पेड़ बाधक बन रहे थे इसलिए उनको काटने के लिए वन विभाग से परमिशन मांगा गया था। लेकिन इसी बीच पेड़ दीवार को हारने लगे जिसकी वजह से उन्हें काट दिया गया। शीशम सागवान और गोल्ड मोहर के पेड़ के संबंध में बीडीओ ने बताया कि हमें इन पेड़ों की काटने की जानकारी नहीं हो पाई। क्योंकि उस दिन रविवार था और ब्लॉक परिसर में कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। उसके बाद बीडीओ ने यह भी कहा कि वह पेड़ पुराने भी हो गए थे। क्या शीशम का पेड़ भी बूढ़ा हो गया था इस सवाल पर बीडीओ ने चुप्पी साध ली और फिर कहा कि हां वह तो हरा था। कुल मिलाकर इस मामले में जो अधिकारी दोषी हैं उनका वन विभाग की रिपोर्ट में कोई फिक्र ही नहीं है जबकि उन पर कार्यवाही होनी चाहिए। बिना परमिशन के कोई भी पेड़ कैसे काट दिए गए और वन विभाग ने कुछ नहीं किया। शिकायत करने वाले दीपेश सिंह ने बताया कि हरे पेड़ काटने के मामले में ब्लाक प्रमुख चहनिया और खंड विकास अधिकारी चहनिया सीधे जिम्मेदार हैं।
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चहनियां ब्लॉक परिसर में सुंदरीकरण का कार्य कराया जा रहा है इसके तहत रविवार को यूकेलिप्टस के तीन पेड़ों के साथ शीशम सागवान और गोल्ड मोहर के तीन हरे पेड़ भी बिना वन विभाग के परमिशन के ही काट दिए गए। जबकि ब्लॉक परिसर के पेड़ संपत्ति रजिस्टर में दर्ज हैं उसके लिए एक कमेटी है उसकी संस्तुति के बाद ही निविदा निकालकर नीलामी की जा सकती है। पर यहां किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। इसकी शिकायत स्थानीय निवासी दीपेश कुमार सिंह ने आईजीआरएस पर की।जिसके बाद वन विभाग जागा और मौके पर पहुंच कर जांच की। यदि शिकायत न हुई होती तो चोरी से पेड़ बेच दिए गए होते। वन विभाग ने जिलाधिकारी संजीव सिंह को प्रेषित अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि चहनिया ब्लॉक परिसर में तीन यूकेलिप्टस, शीशम सागवान और गोल्ड मोहर के तीन पेड़ काट दिए गए और उनको बोटों में तब्दील कर दिया गया था। मौके पर मौजूद गुलाब राम और रमेश पर केस दर्ज कर दिया गया। लेकिन वन विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहीं भी यह जिक्र नहीं किया कि किसके आदेश पर ब्लॉक परिसर में पेड़ काटे जा रहे थे। यह साफ है कि बिना अधिकारियों के अनुमति के और आदेश के कोई भी ब्लॉक परिसर के पेड़ों को नहीं काट सकता तो फिर उन पेड़ों को काटने का आदेश देने वाले अधिकारियों का जिक्र वन विभाग के रिपोर्ट में क्यों नहीं है आखिर उनको क्यों नहीं दोषी बनाया गया। इस संदर्भ में जब खंड विकास अधिकारी सतीश चंद्र त्रिपाठी से बात किया गया तो उन्होंने बताया कि परिसर में पार्क का निर्माण कराया जा रहा है जिसमें यूकेलिप्टस के पेड़ बाधक बन रहे थे इसलिए उनको काटने के लिए वन विभाग से परमिशन मांगा गया था। लेकिन इसी बीच पेड़ दीवार को हारने लगे जिसकी वजह से उन्हें काट दिया गया। शीशम सागवान और गोल्ड मोहर के पेड़ के संबंध में बीडीओ ने बताया कि हमें इन पेड़ों की काटने की जानकारी नहीं हो पाई। क्योंकि उस दिन रविवार था और ब्लॉक परिसर में कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। उसके बाद बीडीओ ने यह भी कहा कि वह पेड़ पुराने भी हो गए थे। क्या शीशम का पेड़ भी बूढ़ा हो गया था इस सवाल पर बीडीओ ने चुप्पी साध ली और फिर कहा कि हां वह तो हरा था। कुल मिलाकर इस मामले में जो अधिकारी दोषी हैं उनका वन विभाग की रिपोर्ट में कोई फिक्र ही नहीं है जबकि उन पर कार्यवाही होनी चाहिए। बिना परमिशन के कोई भी पेड़ कैसे काट दिए गए और वन विभाग ने कुछ नहीं किया। शिकायत करने वाले दीपेश सिंह ने बताया कि हरे पेड़ काटने के मामले में ब्लाक प्रमुख चहनिया और खंड विकास अधिकारी चहनिया सीधे जिम्मेदार हैं।
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