स्थानीय गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ के चौथे दिन मंगलवार को कथा व्यास आचार्य पंडित सत्यम मिश्रा ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्मोत्सव एवं उनकी अलौकिक लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि परमात्मा ही परम सत्य हैं। जब मनुष्य की वृत्ति परमात्मा में लग जाती है, तब उसके जीवन से मोह-माया स्वतः समाप्त होने लगती है। आचार्य ने श्रोताओं के समक्ष प्रश्न रखा कि जब परमात्मा समस्त सृष्टि में व्याप्त हैं, तो संसार के नष्ट हो जाने पर भी उनका अस्तित्व कैसे बना रहता है। इसका उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान संसार में व्याप्त भी हैं और उससे परे भी हैं। इसे स्पष्ट करते हुए उन्होंने आकाश और बादलों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बादलों के भीतर आकाश विद्यमान रहता है, लेकिन बादलों के समाप्त हो जाने पर भी आकाश का अस्तित्व बना रहता है, उसी प्रकार संसार के नष्ट हो जाने पर भी परमात्मा शाश्वत और अविनाशी रहते हैं। उन्होंने कहा कि सृष्टि की प्रत्येक वस्तु में ईश्वर का अंश विद्यमान है और भगवान से पृथक कुछ भी नहीं है। मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य परमात्मा की भक्ति करना, सत्य का पालन करना और धर्म के मार्ग पर चलना है। इससे पूर्व बाल स्वरूप में सजी झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। कथा में अनूप पांडेय, दिलीप पांडेय, बृजकिशोर, सरिता त्रिपाठी, रेनू मिश्रा, सुषमा, संध्या, गोरख, पिंटू राय, जालंधर, रामाशंकर, साधू यादव, उपेंद्र कुशवाहा, हरि, प्रांजल, शुभेंदु, तेजल और आनंद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।