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दिलों को मिलाएगा ग्लेडिओलस
चंदौली अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Feb 2016 01:50 AM IST
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चंदौली के फूलों से इस बार मुंबई, दिल्ली और अन्य महानगरों के युवा वैलेंटाइन डे मनाएंगे। जिले के शहाबगंज विकासखंड में उगाया जाने वाला ग्लेडिओलस का फूल इस बार कई प्रदेशों के युवाओं के दिल मिलाएगा।
यह फूल महानगरों की मंडियों में भेजे जाते हैं। खास बात यह कि इसी ग्लेडिओलस फूल से संत वैलेंटाइन ने अपनी प्रेमिका का प्रपोज किया था। तब से कई प्रदेशों में वेलेंटाइन डे पर इस फूल की मांग बढ़ जाती है।
वैलेंटाइन डे के दिन ग्लेडिओलस के फूल का विशेष महत्व है। इसे प्रेम का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि रोम में संत वैलेंनटाइन ने अपनी प्रेमिका को ग्लेडिओलस का फूल देकर प्रपोज किया था जिसे प्रेमिका ने स्वीकार कर लिया था।
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तभी से ग्लेडिओलस के फूल का इस दिन के लिए विशेष महत्व माना जाने लगा। जिले के शहाबगंज विकास खंड के सिंगरौल, शहाबगंज, केराडीह, डूमरी, अमांव आदि गांवों में इसकी खेती हो रही है।
सर्वप्रथम इसकी खेती 1990 में सिंगरौल के बनारसी पांडेय ने शुरू की। शुरुआत में उन्होंने मात्र पांच बिस्वा खेत में इसे उगाया और उस समय लगभग पांच से छह हजार रुपये का मुनाफा कमाया।
बनारसी के अनुसार थोक में इसकी कीमत पांच रुपये प्रति फूल है जो इस समय 100 से 150 रुपये तक बिकता है। एकड़ औसत रूप से इसकी कमाई 40 से 50 हजार रुपये हो जाती है।
शहाबगंज के सुभाष मौर्य, मंगरौर के राजन सिंह, विनोद सिंह आदि ने बताया कि ग्लेडिओलस की खेती कर किसान अच्छी कमाई कर रहे हैं। इसकी खेती 25 एकड़ से अधिक भूमि पर हो रही है। किसानों को बहुत फायदा हो रहा है।
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यह फूल महानगरों की मंडियों में भेजे जाते हैं। खास बात यह कि इसी ग्लेडिओलस फूल से संत वैलेंटाइन ने अपनी प्रेमिका का प्रपोज किया था। तब से कई प्रदेशों में वेलेंटाइन डे पर इस फूल की मांग बढ़ जाती है।
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वैलेंटाइन डे के दिन ग्लेडिओलस के फूल का विशेष महत्व है। इसे प्रेम का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि रोम में संत वैलेंनटाइन ने अपनी प्रेमिका को ग्लेडिओलस का फूल देकर प्रपोज किया था जिसे प्रेमिका ने स्वीकार कर लिया था।
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तभी से ग्लेडिओलस के फूल का इस दिन के लिए विशेष महत्व माना जाने लगा। जिले के शहाबगंज विकास खंड के सिंगरौल, शहाबगंज, केराडीह, डूमरी, अमांव आदि गांवों में इसकी खेती हो रही है।
सर्वप्रथम इसकी खेती 1990 में सिंगरौल के बनारसी पांडेय ने शुरू की। शुरुआत में उन्होंने मात्र पांच बिस्वा खेत में इसे उगाया और उस समय लगभग पांच से छह हजार रुपये का मुनाफा कमाया।
बनारसी के अनुसार थोक में इसकी कीमत पांच रुपये प्रति फूल है जो इस समय 100 से 150 रुपये तक बिकता है। एकड़ औसत रूप से इसकी कमाई 40 से 50 हजार रुपये हो जाती है।
शहाबगंज के सुभाष मौर्य, मंगरौर के राजन सिंह, विनोद सिंह आदि ने बताया कि ग्लेडिओलस की खेती कर किसान अच्छी कमाई कर रहे हैं। इसकी खेती 25 एकड़ से अधिक भूमि पर हो रही है। किसानों को बहुत फायदा हो रहा है।