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Chandauli News: राजदरी जलप्रपात में प्रवेश शुल्क पूरा, सुविधाओं पर ताला
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राजदरी में बंद पड़ा नेचर सेंटर। संवाद
नौगढ़। चंद्रप्रभा वन्यजीव क्षेत्र स्थित राजदरी जलप्रपात में पर्यटकों के लिए विकसित सुविधाएं इन दिनों उपेक्षा का शिकार हैं।
यहां बना नेचर सेंटर और डॉरमेट्री हॉल पिछले एक महीने से बंद हैं। इसके बावजूद वन विभाग पर्यटकों से पूरा प्रवेश शुल्क वसूल रहा है। इससे बिना सुविधाओं का लाभ लिए ही सैलानियों को लौटना पड़ रहा है।
परिसर में बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए झूले और चकरी भी जर्जर हो चुके हैं। कई झूलों में जंग लग चुका है, जबकि चकरी क्षतिग्रस्त होने के बावजूद बच्चे उस पर खेल रहे हैं।
मिर्जापुर से आई पर्यटक ज्योति गुप्ता ने बताया कि नेचर सेंटर बंद होने से बच्चों और पर्यटकों को वन्यजीवों के चित्र तथा जंगल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देखने का अवसर नहीं मिल रहा है।
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वाराणसी के आशुतोष सिंह ने कहा कि नेचर सेंटर वन क्षेत्र की जैव विविधता और वन्यजीवों की जानकारी का महत्वपूर्ण माध्यम था, लेकिन इसके बंद रहने से बच्चों का शैक्षणिक अनुभव प्रभावित हो रहा है। वन सीओ अखिलेश दुबे ने बताया कि कुछ तकनीकी कारणों से नेचर सेंटर को अस्थायी रूप से बंद किया गया था। टूटे हुए झूलों और चकरी की मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है। पर्यटकों की सुविधाएं शीघ्र बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।
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यहां बना नेचर सेंटर और डॉरमेट्री हॉल पिछले एक महीने से बंद हैं। इसके बावजूद वन विभाग पर्यटकों से पूरा प्रवेश शुल्क वसूल रहा है। इससे बिना सुविधाओं का लाभ लिए ही सैलानियों को लौटना पड़ रहा है।
परिसर में बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए झूले और चकरी भी जर्जर हो चुके हैं। कई झूलों में जंग लग चुका है, जबकि चकरी क्षतिग्रस्त होने के बावजूद बच्चे उस पर खेल रहे हैं।
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मिर्जापुर से आई पर्यटक ज्योति गुप्ता ने बताया कि नेचर सेंटर बंद होने से बच्चों और पर्यटकों को वन्यजीवों के चित्र तथा जंगल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देखने का अवसर नहीं मिल रहा है।
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वाराणसी के आशुतोष सिंह ने कहा कि नेचर सेंटर वन क्षेत्र की जैव विविधता और वन्यजीवों की जानकारी का महत्वपूर्ण माध्यम था, लेकिन इसके बंद रहने से बच्चों का शैक्षणिक अनुभव प्रभावित हो रहा है। वन सीओ अखिलेश दुबे ने बताया कि कुछ तकनीकी कारणों से नेचर सेंटर को अस्थायी रूप से बंद किया गया था। टूटे हुए झूलों और चकरी की मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है। पर्यटकों की सुविधाएं शीघ्र बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।