यूपी: ठगी की रकम चाइना के खातों में जाती थी, हवाला के जरिये भारत आती थी; आठ के खिलाफ नामजद प्राथमिकी
चंदौली नगर के कैलाशपुरी में एक बड़े कमरे में साइबर ठगी का कॉल सेंटर संचालित होने का मामला सामने आया है। यहां कॉल के जरिए लोगों को ठगी के जाल में फंसाया जाता था। पुलिस की कार्रवाई के बाद कॉल सेंटर संचालक फरार है। मामले में आठ लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।
विस्तार
जापान के बुजुर्गों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का चंदौली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। स्वाट, सर्विलांस, साइबर सेल और मुगलसराय पुलिस की संयुक्त टीम ने पीडीडीयू नगर के कैलाशपुरी स्थित एक इमारत की तीसरी मंजिल पर चल रहे फर्जी साइबर कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
संचालक समेत तीन अन्य पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस ने एक आरोपी के दो बैंक खातों में जमा करीब नौ लाख रुपये फ्रीज कराए हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम चाइना के खातों में जाती थी और हवाला के जरिये भारत आती थी। पुलिस अन्य एजेंसियों की मदद से इनकी संपत्तियों और विभिन्न खातों में रखी गई धनराशि की जांच करने में जुट गई है।
एडिशनल एसपी विक्रम दहिया ने पुलिस लाइन में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि पीडीडीयू नगर के कैलाशपुरी में एक इमारत की तीसरी मंजिल पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो कई कंप्यूटरों पर विदेशियों से लाइव कॉल चल रही थी। पूछताछ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की प्रारंभिक जांच में जापान के नागरिकों को तकनीकी सहायता के नाम पर झांसे में लेने की बात सामने आई।
बताया कि पकड़े गये आरोपी खुद को तकनीकी सहायता देने वाला कर्मचारी बताकर जापानी नागरिकों से संपर्क करते थे। इसके बाद उनके कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस लेने के बहाने बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल कर रकम दूसरे खातों में स्थानांतरित कराई जाती थी। गिरोह में शामिल आरोपी जापानी भाषा जानते थे और इंटरनेट आधारित कॉलिंग का इस्तेमाल करते थे। पुलिस के अनुसार ठगी की रकम म्यूल खातों में भेजी जाती थी।
बताया कि छापेमारी में 19 मॉनिटर, 20 सीपीयू, 19 की-बोर्ड, 18 माउस, 18 हेडफोन, तीन लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, चार राउटर/नेटवर्किंग उपकरण और पांच कूटरचित आधार कार्ड बरामद हुए हैं। आधार कार्ड वाराणसी के पते पर बनाए गए थे।
एडिशनल एसपी ने बताया कि गिरोह का मुख्य संचालक मौके से कुछ समय पहले निकल गया था। उसकी तलाश की जा रही है। मामले में मुगलसराय थाने में आठ लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कर की गई है। पुलिस बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच करा रही है। इससे ठगी की रकम, पीड़ितों की संख्या और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
इन लोगों की हुइ गिरफ्तारी
रौनक सिंह (32) निवासी सैदपुर, बेन, नालंदा, रोशन कुमार (21) निवासी नया बाईपास, विष्णुपथ, गया, अमन कुमार (23) निवासी मंगला बोरिंग, विष्णुपथ, गया, अंकित कुमार (25), निवासी नीमडीह, रूपौ, नवादा और विकास वैभव (25) निवासी वारिस नगर रामशिला, कोतवाली, गया। रौनक को पुलिस ने कॉल सेंटर का मैनेजर बताया है।
गया में सीखी जापानी भाषा, चंदौली में खोला कॉल सेंटर
पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों ने गया और नालंदा क्षेत्र में जापानी भाषा सीखी थी। इसके बाद जापान के नागरिकों से बातचीत के लिए इसी भाषा का इस्तेमाल करते थे। कैलाशपुरी में किराये की जगह लेकर कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक गिरोह का निशाना खासतौर पर ऐसे बुजुर्ग थे, जो तकनीक के कम जानकार थे। विदेशी नंबर और तकनीकी सहायता का भरोसा देकर उन्हें बातचीत में फंसाया जाता था।
ऐसे बुना ठगी का जाल
आरोपी इंटरनेट आधारित कॉलिंग के जरिए जापानी नागरिकों से संपर्क करते थे। खुद को कंप्यूटर या तकनीकी सहायता से जुड़ा कर्मचारी बताकर समस्या का समाधान करने का भरोसा दिलाते थे। इसके बाद पीड़ित के कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस लेने का प्रयास किया जाता था। पुलिस के अनुसार एक्सेस मिलने के बाद बैंकिंग से जुड़ी जानकारी का दुरुपयोग कर रकम दूसरे खातों में भेजी जाती थी। लेनदेन की जानकारी गिरोह के सदस्यों के बीच साझा की जाती थी और रकम म्यूल खातों के जरिये आगे भेजी जाती थी। पूरी रकम चाइना से हवाला के जरिये कोलकाता आती थी। इसके बाद कोलकाता से चंदौली में कॉल सेंटर संचालक को राशि मिल जाती थी।
वाट्सएप ग्रुप में तीन लोग जुड़े थे
पुलिस ने जांच के दौरान मैनेजर रौनक के पास से मिले मोबाइल में एक वाट्सएप ग्रुप मिला, जिसमें तीन लोग जुड़े थे। इसमें से एक तो मैनेजर स्वयं था और जो दो लोग थे उनमें से एक का नाम सुपरमैन और दूसरे का नाम गुगल था। इनके बीच कारोबार को लेकर वार्ता होती थी। वाट्सएप ग्रुप में तीनों के नंबर वर्चुअल सिम के जरिये जुड़े थे।
हर माह होता था दस करोड़ का कारोबार, दो माह में बदल जाते थे लड़के
पीडीडीयू नगर के कैलाशपुरी में पिछले छह माह से फर्जी काल सेंटर संचालित हो रहा था। सूत्रों के अनुसार हर माह दस करोड़ रुपये का कारोबार होता था। ठगी से मिलने वाली राशि कमीशन काटकर हवाला के जरिये भारत आती थी। खास बात यह है कि हर डेढ़ से दो माह में नये लड़के काम करने के लिए आते थे। पकड़े गये सभी युवक डेढ़ माह पहले की काम करने से पीडीडीयू नगर आये थे।