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घटने लगा बाढ़ का पानी, संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ा
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चंदौली जनपद में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संक्रामक रोग फैलने की आशंका बढ़ गई है। गंगा का पानी जिन-जिन इलाकों में घुसा है, वहां के लोगों में चर्म रोग और पेट की समस्या बढ़ गयी है। बाढ़ आने और पानी घटने का क्रम शुरू होने के बाद से सरकारी नलों से आ रहे गंदे पानी और कूड़ा सड़ने से परेशानियां और बढ़ गई हैं।इससे संक्रामक रोग का खतरा भी बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि संक्रामक रोगों को रोकने की सभी तैयारी पूरी कर ली गई है।
जनपद में चहनिया, धानापुर, नियमताबाद विकासखंड के गंगा तटवर्ती इलाके बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के अनुसार मोहल्लों व बस्तियों में न किसी तरह की स्वास्थ्य व्यवस्था की गई है और न ही साफ-सफाई की। जबकि यहां लोगों में अभी से स्वास्थ्य समस्याएं आने लगी है। ज्यादातर लोग पीने के गंदे पानी की वजह से पेट की समस्या से पीड़ित पाए जा रहे हैं। मोहल्ले में पीड़ितों के इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। सिर्फ हॉस्पिटल जाने वाले मरीजों का ही इलाज किया जा रहा है। क्षेत्र के सरकारी हॉस्पिटल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर मरीज चर्म रोग, डायरिया, टायफाइड व मलेरिया से पीड़ित पाएं जा रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार बाढ़ प्रभावित संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों की ओर से यहां लोगों की जांच के साथ ही दवाओं को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जा चुका है। इसके साथ ही जो सूचनाएं कंट्रोल रूम को मिल रही हैं, वहां दवा का छिड़काव कराने के साथ ही कैंप लगवाकर लोगों को पानी उबालकर पीने और साफ-सफाई के प्रति जागरुक किया जाएगा।
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जनपद में चहनिया, धानापुर, नियमताबाद विकासखंड के गंगा तटवर्ती इलाके बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के अनुसार मोहल्लों व बस्तियों में न किसी तरह की स्वास्थ्य व्यवस्था की गई है और न ही साफ-सफाई की। जबकि यहां लोगों में अभी से स्वास्थ्य समस्याएं आने लगी है। ज्यादातर लोग पीने के गंदे पानी की वजह से पेट की समस्या से पीड़ित पाए जा रहे हैं। मोहल्ले में पीड़ितों के इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। सिर्फ हॉस्पिटल जाने वाले मरीजों का ही इलाज किया जा रहा है। क्षेत्र के सरकारी हॉस्पिटल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर मरीज चर्म रोग, डायरिया, टायफाइड व मलेरिया से पीड़ित पाएं जा रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार बाढ़ प्रभावित संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों की ओर से यहां लोगों की जांच के साथ ही दवाओं को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जा चुका है। इसके साथ ही जो सूचनाएं कंट्रोल रूम को मिल रही हैं, वहां दवा का छिड़काव कराने के साथ ही कैंप लगवाकर लोगों को पानी उबालकर पीने और साफ-सफाई के प्रति जागरुक किया जाएगा।
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