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Chandauli News: जिला अस्पताल में एलाइजा जांच
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चंदौली। डेंगू के मरीजों को एलाइजा की जांच के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अब संयुक्त जिला अस्पताल में ही जांच होगी और 24 घंटे में ही रिपोर्ट मिल जाएगी। पहले बीएचयू और मंडलीय अस्पताल वाराणसी में जांच होती है, जिसमें हफ्ते भर लग जाते थे।
जिला मलेरिया विभाग ने पहली बार पांच जांच किट मंगाई हैं। एक किट से 96 लोगों की जांच की जा सकेगी। अब तक जिले में 54 ऐसे मामले आए, जिनमें डेंगू की जांच करानी पड़ी। तीन मरीजों में बीमारी की पुष्टि हुई। उनका उपचार जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में चल रहा है।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. जयप्रकाश सोनकर ने बताया कि काफी प्रयास के बाद पहली बार एलाइजा की जांच के लिए लखनऊ से किट मिली है। अन्य जिलों के दो-दो किट दी गई है जबकि यहां पांच किट प्राप्त हुई है। एलाइजा टेस्ट के लिए 54 मरीजों के नमूने बनारस भेजे गए। उनकी रिपोर्ट आने में एक सप्ताह का वक्त लग जाता था। तब तक डेंगू के मरीज की हालत बिगड़ जाती थी। अब एलाइजा की जांच यहीं जिला अस्पताल में ही होगी। रिपोर्ट 24 घंटे में मिल जाएगी तो इलाज में सहूलियत होगी।
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जिले में दो से अधिक डेंगू मरीज मिलने वाले 108 इलाकों को हॉटस्पॉट की सूची में शामिल किया गया है। उनकी निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग के अलावा पंजायती राज, कृषि विभाग के अधिकारियों को नोडल बनाया गया है। मच्छरमार दवाओं के छिड़काव के लिए जिले की पांच में से एक मशीन खराब है। जबकि दो मशीनों एक को नौगढ़ और एक चहनिया भेजा गया है। दो मशीनें जिले अन्य इलाकों में छिड़काव कर रही हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को दो-दो स्प्रे मशीनें दी गई हैं।
नहीं है प्लेटलेट की सुविधा
डेंगू मरीजों के लिए एलाइजा जांच की सुविधा से थोड़ी राहत तो हुई है लेकिन अस्पताल में प्लेटलेट्स की उपलब्धता नहीं है। ऐसे में किसी मरीज को प्लेटलेट्स की जरूरत होगी तो उसे वाराणसी ही रेफर करना पड़ेगा।
पीएचसी और सीएचसी पर बनेंगे डेगू वार्डमलेरिया अधिकारी ने बताया कि जिले में डेंगू से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बीमारी के संक्रमण को देखते हुए प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू वार्ड बनाने के लिए कहा गया है। जिला अस्पताल में छह बेड का वार्ड बना है , जहां तीन मरीज भर्ती हैं। डेंगू वार्ड में मच्छरदानी लगाना अनिवार्य है। मरीज बढ़ने पर महिला विंग अस्पताल में 20 बेड के डेंगू वार्ड बनाने की तैयारी है। जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में छह मरीज भर्ती हैं। इनमें से तीन ही डेंगू के हैं। तीन अन्य बीमारियों के मरीज हैं जबकि एक ही बेड पर ही मच्छरदानी लगी है।
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जिला मलेरिया विभाग ने पहली बार पांच जांच किट मंगाई हैं। एक किट से 96 लोगों की जांच की जा सकेगी। अब तक जिले में 54 ऐसे मामले आए, जिनमें डेंगू की जांच करानी पड़ी। तीन मरीजों में बीमारी की पुष्टि हुई। उनका उपचार जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में चल रहा है।
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जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. जयप्रकाश सोनकर ने बताया कि काफी प्रयास के बाद पहली बार एलाइजा की जांच के लिए लखनऊ से किट मिली है। अन्य जिलों के दो-दो किट दी गई है जबकि यहां पांच किट प्राप्त हुई है। एलाइजा टेस्ट के लिए 54 मरीजों के नमूने बनारस भेजे गए। उनकी रिपोर्ट आने में एक सप्ताह का वक्त लग जाता था। तब तक डेंगू के मरीज की हालत बिगड़ जाती थी। अब एलाइजा की जांच यहीं जिला अस्पताल में ही होगी। रिपोर्ट 24 घंटे में मिल जाएगी तो इलाज में सहूलियत होगी।
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जिले में दो से अधिक डेंगू मरीज मिलने वाले 108 इलाकों को हॉटस्पॉट की सूची में शामिल किया गया है। उनकी निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग के अलावा पंजायती राज, कृषि विभाग के अधिकारियों को नोडल बनाया गया है। मच्छरमार दवाओं के छिड़काव के लिए जिले की पांच में से एक मशीन खराब है। जबकि दो मशीनों एक को नौगढ़ और एक चहनिया भेजा गया है। दो मशीनें जिले अन्य इलाकों में छिड़काव कर रही हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को दो-दो स्प्रे मशीनें दी गई हैं।
नहीं है प्लेटलेट की सुविधा
डेंगू मरीजों के लिए एलाइजा जांच की सुविधा से थोड़ी राहत तो हुई है लेकिन अस्पताल में प्लेटलेट्स की उपलब्धता नहीं है। ऐसे में किसी मरीज को प्लेटलेट्स की जरूरत होगी तो उसे वाराणसी ही रेफर करना पड़ेगा।
पीएचसी और सीएचसी पर बनेंगे डेगू वार्डमलेरिया अधिकारी ने बताया कि जिले में डेंगू से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बीमारी के संक्रमण को देखते हुए प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू वार्ड बनाने के लिए कहा गया है। जिला अस्पताल में छह बेड का वार्ड बना है , जहां तीन मरीज भर्ती हैं। डेंगू वार्ड में मच्छरदानी लगाना अनिवार्य है। मरीज बढ़ने पर महिला विंग अस्पताल में 20 बेड के डेंगू वार्ड बनाने की तैयारी है। जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में छह मरीज भर्ती हैं। इनमें से तीन ही डेंगू के हैं। तीन अन्य बीमारियों के मरीज हैं जबकि एक ही बेड पर ही मच्छरदानी लगी है।