फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chandauli News ›   Eighty per cent coal trading

अस्सी फीसदी घटा कोयला कारोबार

Fri, 18 Nov 2016 01:30 AM IST
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला Updated Fri, 18 Nov 2016 01:30 AM IST
विज्ञापन
Eighty per cent coal trading
मंडी में खड़ी ट्रकें।
एशिया की बड़ी चंदासी कोयला मंडी 500 और 1000 रुपये के नोट बंदी से बंदी के कगार पर पहुंच गई है। दस दिनों में मंडी का व्यवसाय 80 प्रतिशत तक गिर गया है। कोयला लेकर आए ट्रक खड़े हैं लेकिन कोयला के खरीददार नहीं मिल रहे हैं। व्यवसायियों के बकाए तो व्यापारी देने को तैयार हैं लेकिन पांच और हजार रुपये के नोट में। ऐसे में व्यवसायियों की समझ में नहीं आ रहा है कि वे मजदूरो का भुगतान कहां से करें और खर्च कैसे चलाएं।  
विज्ञापन

कोयला मंडी वैसे ही तमाम दुश्वारियों से जूझ रही है लेकिन 500 और हजार रुपये के नोट बंद होने के बाद व्यवसाय पूरी तरह चरमरा गया है। व्यापारियों का कहना है कि पूरा कोयला व्यवसाय नकदी पर ही आधारित है। मंडी में पांच हजार से अधिक लाइसेंसी व्यापारी हैं। इसी तरह दो से तीन हजार एजेंट, इतने ही डिपो संचालक और दस हजार से अधिक मजदूर काम करते हैं। पश्चिम बंगाल, ओसोम सहित अन्य कोयला उत्पादन स्थलों पर होने वाले ई निलामी में यहां के व्यापारी कोयला खरीदते हैं और उसे चंदासी लाते हैं।
विज्ञापन

यहां से देश के विभिन्न कोने में कोयला पहुंचाया जाता है। मंडी से पचास हजार लोगों का परिवार पेट पलता है। व्यवसाय की दृष्टि से देखे तो प्रतिमाह यहां करोड़ो का व्यवसाय होता है, लेकिन आठ नवंबर के बाद व्यवसाय लगभग पूरी तरह ठप हो गया है। इस बावत ट्रांसपोर्टर राधेश्याम यादव कहते हैं कि मंडी का व्यवसाय पूरी तरह नकदी पर आधारित है। लेकिन बड़े नोटों के बंद होने की वजह से परेशानी हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कोल व्यवसायी बद्री नरायन सिंह उर्फ मुन्ना ने बताया कि नोटों की बंदी से ट्रक चालकों और मजदूरों का भुगतान बड़ी समस्या बन गया है। कोल व्यवसायी दयाशंकर मौर्य ने बताया कि खरीददार दूर दूर से आते हैं, इसी वजह से चेक से लेन देने की परंपरा यह अधिक नहीं है। नकदी संकट से कोयला आपूर्ति पर भी असर पड़ रहा है। कोल व्यवसायी अजय सिंह ने बताया कि कोयला मंगाने में दो से ढाई लाख रुपये की लागत आती है। कोयला बिकने पर ही लाभ होता है लेकिन भुगतान संकट की वजह से सैकड़ो ट्रक कोयला फंस गया है और इसके साथ ही हमारी पूंजी भी फंस गई। अन्य व्यवसायियों ने बताया कि बारिश के मौसम में मंडी का व्यवसाय पूरी तरह ठप था और अब सीजन शुरू हुआ था तभी यह फैसला आ गया है। इसका अत्यधिक विपरीत असर पड़ा है। व्यवसाय पर असर पड़ने से न सिर्फ व्यापारी परेशान हैं बल्कि सरकार को मिलने वाले राजस्व पर भी असर पड़ा है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed