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खंडहर ना समझें...अनदेखी का सबूत है ये साधन सहकारी समिति

Mon, 13 Jun 2022 09:42 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jun 2022 09:42 PM IST
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Do not understand ruins... this is the proof of ignorance, this means cooperative society
कंदवा के कम्हरिया में खंडहर में तब्दील सहकारी समिति का भवन। संवाद - फोटो : CHANDAULI
कंदवा। किसानों को समय से खाद और बीज उपलब्ध कराने के लिए सैयदराजा जमानिया राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे चार दशक पूर्व बना कम्हरिया साधन सहकारी समिति का भवन खंडहर हो चुका है। यहां बैठने और भंडारण की उपयुक्त सुविधा नहीं होने से खाद-बीज अन्यत्र स्थान से वितरण किया जा रहा है। इसके चलते कई बार किसानों को खाद और बीज समय से नहीं मिल पाता। मजबूरन उन्हें खुले बाजार के भरोसे अपनी खेती करनी पड़ रही है। वर्ष 1980-81 में क्षेत्रीय किसानों की सुविधा के लिए जब कम्हरिया में साधन सहकारी समिति का भवन तैयार हुआ तो लोगों को प्रसन्नता हुई कि अब उन्हें खाद और बीज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। लगभग 15 वर्षों से भवन जर्जर है। किसानों ने विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी कई बार दी और भवन की मरम्मत का आग्रह भी किया। लेकिन किसानों की मांग की बार-बार उपेक्षा की गई और भवन की मरम्मत नहीं कराई गई। नतीजतन किसानों को यहां से वितरित होने वाला खाद और बीज समय से मिलना भी मुश्किल हो गया है। अब पिछले 15 वर्षों से भवन खंडहर का रूप ले चुका है। उसके दरवाजे, खिड़कियां और फर्श टूट गए हैं। क्षेत्रीय किसानों में कम्हरिया साधन सहकारी समिति के भवन की बदहाली को लेकर रोष है। उनका कहना है कि अब उन्हें खाद बीज लेने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। सहकारी समिति के जर्जर होने से क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि सहकारी समिति का अपना भवन होने के बाद भी दूसरे स्थानों से धान और बीज लेना पड़ता है। कई बार इसकी शिकायत की गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। कम्हरिया निवासी किसान राम मूरत सिंह ने कहा कि भवन सही नहीं होने के कारण खाद और बीज का वितरण दूसरी जगह से करना पड़ रहा है। जो ठीक नहीं है। विभागीय अधिकारियों को इसके निर्माण के लिए सक्रियता दिखानी चाहिए। कंदवा निवासी अच्युतानंद त्रिपाठी ने कहा कि भवन की मरम्मत के लिए किसानों का प्रतिनिधिमंडल कई बार विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर चुका है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जिससे किसान खाद बीज के लिए भटकने को विवश हैं। पिपरदहां निवासी केदार सिंह ने कहा कि बड़े किसान तो कहीं से भी खाद बीज का इंतजाम कर लेते हैं लेकिन असली परेशानी छोटे किसानों की है। जिनको खाद बीज के लिए बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता है। नूरी निवासी अरविंद सिंह ने कहा कि विभाग को कम्हरिया सहकारी समिति भवन की मरम्मत करानी चाहिए ताकि खाद बीज का वितरण सुचारू रूप से संचालित हो और क्षेत्रीय किसानों को इसका लाभ मिले।
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