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ग्राम सचिवालयों के अभाव में रुके विकास कार्य, ग्रामीणों को हो रही असुविधा

Thu, 07 Apr 2022 12:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 07 Apr 2022 12:21 AM IST
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Development work stopped due to lack of village secretariats, inconvenience to villagers
पीडीडीयू नगर। प्रदेश सरकार ग्राम सचिवालय की शुरुआत कर पंचायतीराज व्यवस्था की परिकल्पना को साकार करने का प्रयास कर रही है। ग्राम सचिवालय में फर्नीचर कंप्यूटर, इंटरनेट आदि लगाने के साथ ही पंचायत सहायक को तैनात करने का आदेश भी जारी किया गया है। जिले के सभी 734 ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय बनने थे । लेकिन जमीन नहीं मिलने के कारण ग्राम पंचायतों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। कई पंचायत भवन जर्जर होने के कारण बंद हैं। जिसे गांव की सरकार चलाने में दिक्क्त आ रही है और विकास कार्य भी प्रभावित रहे हैं।
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ग्राम सचिवालयों का उद्देश्य ग्रामीणों को अब अपने गांव में ही भूमि से जुड़े कागजात के साथ आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र ऑनलाइन देने का है। इनके लिए उन्हें तहसील व ब्लॉक का चक्कर लगाने से छुटकारा दिलाना है। इसके अलावा ग्राम सचिवालय से शासन की सभी योजनाओं की जानकारी और बैंकिंग सुविधाओं का लाभ भी ग्रामीणों तक पहुंचाना है। सचिवालय में सचिव और बैंक सखी बैठाकर बैंक आपके द्वार का सपना भी साकार करना है। बावजूद इसके शासन की इस मंशा को पूरा नहीं किया जा रहा है। जर्जर होने से अधिकांश पंचायत भवनों पर लटक रहे ताले इसकी गवाही कर रहे हैं।
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12 लाख खर्च कर बनाए जाने हैं ग्राम सचिवालय
शासन ने पंचायत भवनों को अपडेट कर मिनी सचिवालय का रूप देने का निर्देश दिया है। जिन गांवों में पंचायत भवन नहीं वहां नए बनवाए जाने हैं। इसके लिए ग्राम पंचायतों की निधि से 12 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं। वहीं जिन ग्राम पंचायतों में पहले पंचायत भवन बनवाए गए थे उन्हें अपडेट भी किया जाना है। इनकी मरम्मत, रंगरोगन के साथ ही इनमें अन्य संसाधन विकसित किए जाने हैं। मिनी सचिवालयों में ग्राम पंचायत सचिवों को बैठने का निर्देश है। इनमें गांव के सारे अभिलेख रखने व एक कक्ष में कंप्यूटर लगाया जाना है। इंटरनेट की सुविधा भी दी जानी है।
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धानापुर के पांच गांवों में जमीन के अभाव में नहीं बना पंचायत भवन
धानापुर ब्लॉक के 84 ग्राम पंचायतों में 63 में ही पंचायत भवन हैं। इनमें भी मिर्जापुर, रैथा, प्रसहटा, सरैया व हेतमपुर सहित कई गांवों में पंचायत भवन जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। ब्लॉक में 21 नए पंचायत भवन बनाए जाने हैं। इनमें इकबालपुर, गुरैनी, धरांव, चिलबिली व नौरंगाबाद में जमीन न मिल पाने के कारण अब तक पंचायत भवन का निर्माण शुरू ही नहीं हो पाया है। वहीं 12 गांवों में काफी धीमी गति से पंचायत भवन का निर्माण चल रहा है। शेष गांवों में पंचायत भवन बनकर लगभग तैयार हैं।
जमीन संबंधी विवाद में अटके हैं डेढ़ दर्जन पंचायत भवन
नियामताबाद। विकासखंड क्षेत्र के 88 ग्राम पंचायतों में डेढ़ दर्जन के लगभग पंचायत भवन जमीन न मिल पाने व जमीन संबंधित विवाद में नहीं बन पाए हैं। हालांकि कुछ गांवों में नए पंचायत भवन का निर्माण हो रहा है। पटनवा में एक वर्ष पूर्व पंचायत भवन की नींव डालकर छोड़ दिया गया है। विकासखंड में जहां पंचायत भवन बन गए हैं, उनमें भी पंचायत मित्र कभी बैठते ही नहीं हैं। अधिकांश समय ताला लटकता रहता है। कुछ ही गिने चुने पंचायत भवन नियमित खुलते हैं।
ताराजीनवपुर। शासन की ओर से भले ही ग्रामीणों की सुविधा को देखते हुए पंचायत भवन को ही चाक-चौबंद व्यवस्था कर कंप्यूटरीकृत करने के साथ ही सीसीटीवी कैमरे के अंदर ऑपरेटर को काम करने के लिए रखने के निर्देश हों लेकिन हकीकत यह है कि बहुत से पंचायत भवनों का गेट बंद ही रहता है। विकासखंड सकलडीहा के सरेसर गांव में जमीनी विवाद के कारण अभी तक पंचायत भवन का निर्माण अधर में लटका हुआ है। राजस्व विभाग द्वारा पैमाइश कराने के बाद भी अभी तक इसको अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।
10 गांवों में नही बन पाया पंचायत भवन
शहाबगंज। जमीन के अभाव में अभी तक कई ग्रामपंचायतों कानिर्माण नही हो पाया है। इससे पंचायत सहायकों को कार्यालय संचालन में समस्या आ रही है। कुछ गांवों में तो स्कूल के भवन या निजी मकान में कार्यालय चलाना पड़ रहा है। विकास खंड के ग्रामपंचायत हाटा, खिलची, शाहपुर, सरैया, अमरसीपुर, बरियारपुर, रसिया, डुमरी, खखड़ा व करनौल गांव में पंचायत भवन ही नहीं बन पाया है। इसका खामियाजा गांव में नियुक्त पंचायतों सहायकों को उठाना पड़ रहा है। साथ ही कार्यों के निष्पादन में समस्या हो रही है और विकास कार्य प्रभावित हो रहे है। ग्रामीणों को कुटुंब रजिस्टर की नकल, विधवा, वृद्धा, विकलांग पेंशन के लिए ब्लॉक मुख्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है।

इस मामले में प्रभारी एडीओ चंद्रबलि सिंह ने बताया कि कुछ गांवों में जमीन नहीं मिलने के कारण पंचायत भवन का निर्माण नहीं हो पाया है। कुछ गांवों में निर्माण कार्य चल रहा है। बाकी जगहों पर किराये के भवन में पंचायत का संचालन कराया जा रहा है।
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