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Chandauli News: करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं सुधरी गरई नदी से जलनिकासी
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चंदौली। चंदौली के सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि गरई नदी और प्राकृतिक नालों की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन बारिश का पानी खेतों से पानी नहीं निकल पा रहा है।
इससे हजारों हेक्टेयर धान की फसल पर संकट मंडरा रहा है। उन्होंने डीएम को पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ तत्काल जलनिकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।
सांसद ने कहा कि पिछले करीब दो वर्षों से किसानों को जलभराव से राहत दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बाद गरई नदी और प्राकृतिक नालों के गहरीकरण व सफाई के लिए योजनाएं स्वीकृत हुईं और करोड़ों रुपये खर्च किए गए।
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इसके बावजूद जलनिकासी की समस्या जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कवई-पहाड़पुर से अगहरबीर-बहुरिया नाले में मिलने वाले प्राकृतिक नाले व मझवार-चंदौली से बिसौरी, जमुनीपुर और रायल ताल होते हुए अगहरबीर-बहुरिया नाले में मिलने वाले नाले की स्थिति की तत्काल जांच की मांग की।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की सफलता फाइलों में नहीं, बल्कि मौके पर किसानों को मिलने वाली राहत से तय होनी चाहिए। उन्होंने कार्यों की स्वीकृत लागत, भुगतान, माप पुस्तिका (एमबी), लंबाई, चौड़ाई और गहराई के साथ मौके पर हुए कार्य का स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन कराने के साथ वित्तीय और तकनीकी अनियमितता और अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारी से जुड़े जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की।
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इससे हजारों हेक्टेयर धान की फसल पर संकट मंडरा रहा है। उन्होंने डीएम को पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ तत्काल जलनिकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।
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सांसद ने कहा कि पिछले करीब दो वर्षों से किसानों को जलभराव से राहत दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बाद गरई नदी और प्राकृतिक नालों के गहरीकरण व सफाई के लिए योजनाएं स्वीकृत हुईं और करोड़ों रुपये खर्च किए गए।
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इसके बावजूद जलनिकासी की समस्या जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कवई-पहाड़पुर से अगहरबीर-बहुरिया नाले में मिलने वाले प्राकृतिक नाले व मझवार-चंदौली से बिसौरी, जमुनीपुर और रायल ताल होते हुए अगहरबीर-बहुरिया नाले में मिलने वाले नाले की स्थिति की तत्काल जांच की मांग की।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की सफलता फाइलों में नहीं, बल्कि मौके पर किसानों को मिलने वाली राहत से तय होनी चाहिए। उन्होंने कार्यों की स्वीकृत लागत, भुगतान, माप पुस्तिका (एमबी), लंबाई, चौड़ाई और गहराई के साथ मौके पर हुए कार्य का स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन कराने के साथ वित्तीय और तकनीकी अनियमितता और अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारी से जुड़े जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की।