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बोर्ड की परीक्षा में ड्यूटी देने वाले शिक्षकों का डाटा हुआ ऑनलाइन
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यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में कक्ष निरीक्षकों का डेटा ऑनलाइन होगा। केंद्र व्यवस्थापक कक्ष निरीक्षक की डयूटी लगाने में भी मनमानी नहीं कर सकेंगे और न ही शिक्षकों को बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी के मानदेय के लिए केंद्र व्यवस्थापकों के चक्कर लगाने होंगे।
बोर्ड परीक्षा को संपन्न कराने के लिए इस बार परीक्षा ड्यूटी करने वाले शिक्षकों का डेटा ऑनलाइन फीड किया गया है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की माने तो ड्यूटी के भुगतान का शासनादेश के बाद ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।
शिक्षकों का डेटा फीड होने के बाद जिस विषय का शिक्षक हैं उस विषय की परीक्षा के दिन उस शिक्षक की डयूटी नहीं लगाई जाएगी। इसके अलावा केंद्र व्यवस्थापक ड्यूटी लगाने में मनमानी नहीं कर सकेंगे। कक्ष निरीक्षकों को ड्यूटी के भुगतान के लिए परीक्षा केंद्रों पर भटकना नहीं पड़ेगा। डेटा आनलाइन होने के बाद यूपी बोर्ड के साफ्टवेयर में डयूटी देने वाले शिक्षकों की डयूटी की संख्या के साथ उसके बैैंक अकाउंट की डिटेल के माध्यम से ड्यूटी का पारिश्रमिक सीधे अकाउंट में भेज दिया जाएगा। पहले पारिश्रमिक का बिल केंद्र व्यवस्थापक के माध्यम से डीआईओएस कार्यालय भेजा जाता था। डीआईओएस कार्यालय से मांग बोर्ड कार्यालय जाती थी। इसके बाद बिल मंजूर होता था, लेकिन डेटा ऑनलाइन होने से सभी का पारिश्रमिक अकाउंट में भेज दिया जाएगा।
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बोर्ड परीक्षा को संपन्न कराने के लिए इस बार परीक्षा ड्यूटी करने वाले शिक्षकों का डेटा ऑनलाइन फीड किया गया है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की माने तो ड्यूटी के भुगतान का शासनादेश के बाद ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।
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शिक्षकों का डेटा फीड होने के बाद जिस विषय का शिक्षक हैं उस विषय की परीक्षा के दिन उस शिक्षक की डयूटी नहीं लगाई जाएगी। इसके अलावा केंद्र व्यवस्थापक ड्यूटी लगाने में मनमानी नहीं कर सकेंगे। कक्ष निरीक्षकों को ड्यूटी के भुगतान के लिए परीक्षा केंद्रों पर भटकना नहीं पड़ेगा। डेटा आनलाइन होने के बाद यूपी बोर्ड के साफ्टवेयर में डयूटी देने वाले शिक्षकों की डयूटी की संख्या के साथ उसके बैैंक अकाउंट की डिटेल के माध्यम से ड्यूटी का पारिश्रमिक सीधे अकाउंट में भेज दिया जाएगा। पहले पारिश्रमिक का बिल केंद्र व्यवस्थापक के माध्यम से डीआईओएस कार्यालय भेजा जाता था। डीआईओएस कार्यालय से मांग बोर्ड कार्यालय जाती थी। इसके बाद बिल मंजूर होता था, लेकिन डेटा ऑनलाइन होने से सभी का पारिश्रमिक अकाउंट में भेज दिया जाएगा।
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