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Chandauli News: मौसम परिवर्तन से सरसों की फसल पर माहो का खतरा
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चंदौली। मौसम का मिजाज बदलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। इन दिनों बादल छाने और सर्द हवाएं चलने से किसान सहम गए हैं। किसानों का मानना है कि यदि बारिश संग ओलावृष्टि हुई तो सरसों आलू और अगेती मटर व चना के फसलों को नुकसान पहुंचेगा। ऐसे में अगेती सरसों की फसल को नुकसान हो सकता है।
पिछले एक सप्ताह से मौसम में बदलाव आया है। बादल छाने के साथ ठंडी हवाएं चलने से मौसम का मिजाज बदला नजर आया। इससे किसानों को चिंता सताने लगी है। बारिश हुई तो अगेती गेहूं को तो फायदा होगा, लेकिन आलू, चना और सरसों की फसलों को नुकसान हो सकता है। सरसों में माहों कीट का खतरा बढ़ जाएगा। यही नहीं अभी किसानों के धान खेत और खलिहान के साथ क्रय केंद्र पर पड़े है।
जिले में इस बार लगभग 470 हेक्टेयर में सरसों की खेती की जा रही है। किसान रमेश यादव, सुरेश मौर्य बताते हैं कि अगेती फसलों को बचाने के लिए उपाय नहीं किए गए तो सरसों की फसल नष्ट होने का खतरा बढ़ जाएगा। वहीं, कृषि वैज्ञानिक डाॅ. अभय दीप गौतम ने बताया कि माहों की रोकथाम के लिए क्लोरपायरीफास-20 दवा एक लीटर या मोनोक्रोटोफास-36 एसएल दवा एक लीटर सात से आठ सौ लीटर पानी का घोल तैयार कर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से खेत में छिड़काव करें तो माहो के प्रकोप से सरसों की फसल को बचाया जा सकता है।
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पिछले एक सप्ताह से मौसम में बदलाव आया है। बादल छाने के साथ ठंडी हवाएं चलने से मौसम का मिजाज बदला नजर आया। इससे किसानों को चिंता सताने लगी है। बारिश हुई तो अगेती गेहूं को तो फायदा होगा, लेकिन आलू, चना और सरसों की फसलों को नुकसान हो सकता है। सरसों में माहों कीट का खतरा बढ़ जाएगा। यही नहीं अभी किसानों के धान खेत और खलिहान के साथ क्रय केंद्र पर पड़े है।
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जिले में इस बार लगभग 470 हेक्टेयर में सरसों की खेती की जा रही है। किसान रमेश यादव, सुरेश मौर्य बताते हैं कि अगेती फसलों को बचाने के लिए उपाय नहीं किए गए तो सरसों की फसल नष्ट होने का खतरा बढ़ जाएगा। वहीं, कृषि वैज्ञानिक डाॅ. अभय दीप गौतम ने बताया कि माहों की रोकथाम के लिए क्लोरपायरीफास-20 दवा एक लीटर या मोनोक्रोटोफास-36 एसएल दवा एक लीटर सात से आठ सौ लीटर पानी का घोल तैयार कर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से खेत में छिड़काव करें तो माहो के प्रकोप से सरसों की फसल को बचाया जा सकता है।
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