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Chandauli News: गंगा में बाढ़ से 11 गांवों में फसलें बर्बाद, 100 किसानों की लागत भी डूबी

Thu, 20 Aug 2026 11:43 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 11:43 PM IST
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Crops in 11 villages destroyed by Ganga floods; 100 farmers lose their investment.
सहजौर में डूब रही फसल से सब्जी तोड़ते किसान।   संवाद
लगातार बारिश के बीच गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण तटवर्ती गांवों के किसानों की चिंता बढ़ गई है। टांडाकला क्षेत्र के 11 गांवों में करीब 35 बीघा सब्जी की फसल जलमग्न हो गई है। इससे करीब 100 किसानों की लागत भी डूब गई है। किसानों का कहना है कि फसल पूरी तरह बर्बाद होने से लागत तक निकलना मुश्किल है।
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हालांकि अभी तटवर्ती गांवों के रिहायशी इलाकों में बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन जिस तेजी से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है, उससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। किसानों को आशंका है कि जलस्तर में वृद्धि जारी रही तो कछार के बाकी खेत भी जलमग्न हो जाएंगे। इससे सब्जी की तैयार और तैयार होने वाली फसल दोनों बर्बाद हो सकती हैं।
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गंगा की कछार में में किसान परवल, मिर्च, टमाटर, लौकी समेत विभिन्न मौसमी सब्जियों की खेती करते हैं। इस बार भी किसानों ने बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती की थी, लेकिन गंगा में आई बाढ़ में खेत जलमग्न हो गए हैं। पानी पानी भरा होने से फसलों के नष्ट होने की चिता सता रही है। सोनबरसा, चकरा, पूरा विजई, पूरा गणेश, सरौली, महमदपुर, निधौरा, पकड़ी, डेरवा, कैलावर समेत कई गांवों में सब्जी की फसलें पानी में डूब गई हैं। खेतों में भी पानी भरने से मिर्च, टमाटर, लौकी और अन्य मौसमी सब्जियों की फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं।
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पशुओं के चारे की भी सता रही चिंता
बाढ़ से फसलें बर्बाद होने के साथ पशुओं के लिए चारे का संकट भी उत्पन्न होने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को चारे के लिए परेशान होना पड़ेगा। किसानों ने कहा कि सब्जी की खेती में बीज, खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च होती है। फसल बर्बाद होने से उन्हें दोहरा नुकसान होता है। इसलिए प्रशासन नुकसान का आकलन कर किसानों को मुआवजा दे।
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केस-1 : अजय की आठ बीघा परवल की फसल डूबी
सहजौर गांव के किसान अजय ने कछार में करीब 10 बीघे में परवल की खेती की थी। उनका कहना है कि गंगा में बाढ़ आने से आठ बीघे खेत जलमग्न हो चुके हैं। पानी में डूबी फसल बर्बाद होने लगी है। अजय ने बताया कि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो बाकी फसल भी डूब जाएगी। ऐसे में पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी और लागत भी वापस नहीं मिलेगी। उन्होंने प्रशासन से सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की है।
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केस-2 : गुड्डू का एक बीघा खेत जलमग्न
सहजौर गांव के ही गुड्डू ने तीन बीघे में परवल की खेती की है। एक बीघा खेत पानी में डूब चुका है। गुड्डू के मुताबिक बाकी खेतों में भी पानी पहुंचने लगा है। अगर जलस्तर में वृद्धि जारी रही तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी। उन्होंने कहा कि बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई में काफी पैसा लगा है। फसल बर्बाद हुई तो काफी नुकसान होगा।
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केस-3 : टांडाकला में मिर्च और टमाटर की फसल प्रभावित
सोनबरसा और आसपास के गांवों के किसानों की मिर्च और टमाटर की फसल पानी में डूबने लगी है। किसानों का कहना है कि सब्जियों की फसल तैयार होने के समय पानी भरने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जलस्तर और बढ़ा तो पूरी फसल नष्ट हो जाएगी। कछार में 50 किसानों ने लौकी की खेती की है। खेतों में पानी भरने से फसल पर संकट मंडरा रहा है। किसानों का कहना है कि लगातार पानी भरा रहने से पौधे सड़ने लगेंगे।
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इनसेट : इन गांवों में पहुंचा बाढ़ का पानी
गंगा में बाढ़ से टांडाकला क्षेत्र के सोनबरसा, चकरा, पूरा विजई, पूरा गणेश, सरौली, महमदपुर, निधौरा, पकड़ी, डेरवा और कैलावर समेत आसपास के गांव प्रभावित हुए हैं। सहजौर के कछार में खेत जलमग्न हो गए हैं। इन इलाकों में बड़ी संख्या में किसान सब्जी की खेती पर निर्भर हैं।
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इनसेट
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किसान बोले-
गंगा में बाढ़ से मिर्च, टमाटर और लौकी की फसल डूब रही है। अगर पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो बची हुई फसलें भी बरबाद हो जाएंगी। प्रशासन को सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा देना चाहिए। - कक्कू पांडेय, सोनबरसा
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कछार में सब्जी की खेती से ही परिवार का खर्च चलता है। खेतों में पानी भरने से फसलें बर्बाद हो गई हैं। बीज, खाद, दवा और मजदूरी में काफी खर्च हुआ था, लेकिन अब लागत भी डूब रही है। - प्रदीप पांडेय, सोनबरसा

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कोट-
- गंगा में बाढ़ की वजह से तटवर्ती गांवों में फसलें डूब रही हैं। ज्यादा नुकसान होने पर लेखपाल रिपोर्ट बनाकर भेजते हैं। इसके बाद किसानों का सहायता दी जाती है। अगर किसानों ने बीमा कराया होगा, तो उसका भी लाभ मिलेगा। - विनोद कुमार यादव, जिला कृषि अधिकारी, चंदौली
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