बरहनी विकासखंड की बहोरा ग्राम पंचायत के सलेमपुर गांव स्थित पशु आश्रय स्थल बंद होने के बाद क्षेत्र में छुट्टा पशुओं की समस्या बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले गौशाला में 70 से 80 निराश्रित पशु रखे जाते थे, लेकिन इसके बंद होने के बाद पशु खुले में घूम रहे हैं और किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, करीब सात माह पहले शासन के निर्देश पर कम क्षमता वाले पशु आश्रय स्थलों को बंद कर वहां मौजूद पशुओं को बड़ी क्षमता वाली गौशालाओं में स्थानांतरित किया गया। इसी क्रम में सलेमपुर पशु आश्रय स्थल को बंद कर यहां के पशुओं को नेकनामपुर-धानापुर स्थित गौशाला भेज दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला बंद होने के बाद परिसर खंडहर में तब्दील हो गया है। यहां लगे टीन शेड भी हटा दिए गए हैं और पूरा परिसर उपेक्षित पड़ा है। उनका कहना है कि पूर्वी क्षेत्र के गांवों से छुट्टा पशुओं को नेकनामपुर-धानापुर गौशाला तक पहुंचाने के लिए 25 से 30 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। लंबी दूरी और संसाधनों के अभाव में अधिकांश पशु खुले में ही घूमते रहते हैं, जिससे खेतों में खड़ी फसलों को लगातार नुकसान हो रहा है। बरहनी के एडीओ पंचायत राकेश सिंह ने बताया कि छुट्टा एवं निराश्रित पशुओं को पशु आश्रय स्थल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायत की है। यदि किसी ग्राम पंचायत में इस तरह की समस्या है तो ग्राम प्रधान और पंचायत स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर ब्लॉक प्रशासन भी समस्या के समाधान के लिए सहयोग करेगा।