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Chandauli News: चहनिया पीएचसी के बाहर कूड़े में मिलीं बच्चों की दवाएं
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चहनियां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में कूड़े के ढेर में मिली दवाईयां। संवाद
- फोटो : Archive
स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर बुधवार को कूड़े में दवाएं मिलीं। दवाएं एक्सपायर्ड नहीं थी इसके बावजूद उन्हें कचरे में फेंक दिया गया था। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से की है।
वहीं मरीजों को बांटने के बजाय कूड़े में दवा फेंके जाने की चर्चा हो रही है। वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अपना पक्ष रखा है। चिकित्सा अधिकारी डॉ. रितेश कुमार ने बताया कि दवाओं के रखरखाव में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है और सभी औषधियां वर्तमान में सुरक्षित हैं।
डॉ. रितेश कुमार ने कहा कि एक दिन पूर्व आरबीएसके कार्यालय के बगल वाले कक्ष में, जहां औषधियों का भंडारण किया गया था, वहां सांप दिखाई देने की सूचना मिली थी। कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए कक्ष की सफाई कराई गई। दवाओं को अस्थायी रूप से बाहर सुरक्षित स्थान पर रखा गया था।
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उन्होंने बताया कि कक्ष की साफ-सफाई, निरीक्षण और आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद सभी दवाओं को पुनः नियमानुसार निर्धारित स्थान पर सुरक्षित रखवा दिया गया है। चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि दवाओं को फेंका नहीं गया था, बल्कि सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से हटाया गया था। उन्होंने कहा कि अस्पताल में उपलब्ध सभी औषधियां पूरी तरह सुरक्षित हैं और मरीजों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत वितरित की जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी दावा किया है कि दवाओं के भंडारण और रखरखाव में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है।
मरीज डॉक्टर का पर्चा लेकर दवा के लिए घंटों लाइन में खड़े रहते हैं और कई बार उन्हें दवाएं नहीं मिल पाती हैं। दवाओं के रख-रखाव और वितरण की जिम्मेदारी सीएचसी प्रभारी और फार्मासिस्ट की होती है।
स्टॉक रजिस्टर का नियमित सत्यापन न होने के कारण ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। यदि दवाएं खराब हो गई थीं तो उसे नष्ट करने का एक निर्धारित प्रोटोकॉल होता है, कूड़े में फेंकना नियम विरुद्ध है। बुधवार की सुबह लोग इलाज कराने अस्पताल पहुंचे तो यहां कूड़ेदान में दवाओं के स्ट्रिप, सिरप की बोतलें और अन्य जरूरी दवाएं बिखरी पड़ी थीं।
फार्मासिस्ट से पूछताछ पर उसने बताया कि ये दवाएं बच्चों को वितरित करनी थीं। इस संंबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. परितोष मिश्रा ने कहा कि यह गंभीर मामला है। मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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वहीं मरीजों को बांटने के बजाय कूड़े में दवा फेंके जाने की चर्चा हो रही है। वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अपना पक्ष रखा है। चिकित्सा अधिकारी डॉ. रितेश कुमार ने बताया कि दवाओं के रखरखाव में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है और सभी औषधियां वर्तमान में सुरक्षित हैं।
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डॉ. रितेश कुमार ने कहा कि एक दिन पूर्व आरबीएसके कार्यालय के बगल वाले कक्ष में, जहां औषधियों का भंडारण किया गया था, वहां सांप दिखाई देने की सूचना मिली थी। कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए कक्ष की सफाई कराई गई। दवाओं को अस्थायी रूप से बाहर सुरक्षित स्थान पर रखा गया था।
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उन्होंने बताया कि कक्ष की साफ-सफाई, निरीक्षण और आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद सभी दवाओं को पुनः नियमानुसार निर्धारित स्थान पर सुरक्षित रखवा दिया गया है। चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि दवाओं को फेंका नहीं गया था, बल्कि सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से हटाया गया था। उन्होंने कहा कि अस्पताल में उपलब्ध सभी औषधियां पूरी तरह सुरक्षित हैं और मरीजों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत वितरित की जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी दावा किया है कि दवाओं के भंडारण और रखरखाव में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है।
मरीज डॉक्टर का पर्चा लेकर दवा के लिए घंटों लाइन में खड़े रहते हैं और कई बार उन्हें दवाएं नहीं मिल पाती हैं। दवाओं के रख-रखाव और वितरण की जिम्मेदारी सीएचसी प्रभारी और फार्मासिस्ट की होती है।
स्टॉक रजिस्टर का नियमित सत्यापन न होने के कारण ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। यदि दवाएं खराब हो गई थीं तो उसे नष्ट करने का एक निर्धारित प्रोटोकॉल होता है, कूड़े में फेंकना नियम विरुद्ध है। बुधवार की सुबह लोग इलाज कराने अस्पताल पहुंचे तो यहां कूड़ेदान में दवाओं के स्ट्रिप, सिरप की बोतलें और अन्य जरूरी दवाएं बिखरी पड़ी थीं।
फार्मासिस्ट से पूछताछ पर उसने बताया कि ये दवाएं बच्चों को वितरित करनी थीं। इस संंबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. परितोष मिश्रा ने कहा कि यह गंभीर मामला है। मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।