{"_id":"5db88d9b8ebc3e93db11c4aa","slug":"chandauli-newsw-chandauli-news-vns491431680","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिवधनुष के टूटते ही लगे हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिवधनुष के टूटते ही लगे हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कंदवा। क्षेत्र के अमड़ा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में सोमवार की रात रामलीला समिति के बैनर तले गांव के युवकों ने धनुष यज्ञ और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का आकर्षक मंचन किया गया। इस एक दिवसीय रामलीला में भगवान श्रीराम की गुरु भक्ति व भाई के प्रति मर्यादा के निर्वहन का मंचन देख श्रद्धालु निहाल हो उठे। शिवधनुष के टूटते ही पंडाल में हर-हर महादेव और जय श्रीराम के जयकारे लगे।
गांव में वर्ष से दीपावली के अगले दिन एक दिवसीय रामलीला होती है। गांव के उत्साही युवक ही इसमें पत्र बनते हैं। रामलीला में धनुष यज्ञ और परशुराम-लक्ष्मण संवाद की लीला हुई। लीला का आरंभ सीता स्वयंवर के साथ हुआ। दरबार में महाराज जनक व महर्षि विश्वामित्र के साथ श्रीराम अनुज लक्ष्मण के साथ विराजमान थे। पराक्रमी राजाओं ने भगवान शिव के धनुष को तोड़ने का प्रयास किया पर वे धनुष को हिला भी नहीं सके। उसके बाद राजा जनक ने तमाम उलाहना दी। जनक की तीखी बातें सुनकर लक्ष्मण क्रोधित हो उठते हैं राम क्रोधित लक्ष्मण को शांत करते हैं। इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर राम धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष बीच से टूट जाता है। माता सीता हाथ में जयमाल लेकर राम की ओर बढ़ती हैं और उनके गले में जयमाल डाल देती हैं। तभी परशुराम पहुंचते हैं। और परशुराम-लक्ष्मण संवाद होता है। राम उन्हें शांत कराते हैं। अपनी शंका दूर होने पर परशुराम उन्हें आशीर्वाद देकर वापस लौट जाते हैं। इस दौरान डा. समर बहादुर सिंह , बलराम पाठक, अनिल सिंह, प्रमोद कुमार, पवन जनसेवक, अंशुमान सिंह, संजय सिंह, रामकिशुन, मृत्युंजय चौरसिया आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
गांव में वर्ष से दीपावली के अगले दिन एक दिवसीय रामलीला होती है। गांव के उत्साही युवक ही इसमें पत्र बनते हैं। रामलीला में धनुष यज्ञ और परशुराम-लक्ष्मण संवाद की लीला हुई। लीला का आरंभ सीता स्वयंवर के साथ हुआ। दरबार में महाराज जनक व महर्षि विश्वामित्र के साथ श्रीराम अनुज लक्ष्मण के साथ विराजमान थे। पराक्रमी राजाओं ने भगवान शिव के धनुष को तोड़ने का प्रयास किया पर वे धनुष को हिला भी नहीं सके। उसके बाद राजा जनक ने तमाम उलाहना दी। जनक की तीखी बातें सुनकर लक्ष्मण क्रोधित हो उठते हैं राम क्रोधित लक्ष्मण को शांत करते हैं। इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर राम धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष बीच से टूट जाता है। माता सीता हाथ में जयमाल लेकर राम की ओर बढ़ती हैं और उनके गले में जयमाल डाल देती हैं। तभी परशुराम पहुंचते हैं। और परशुराम-लक्ष्मण संवाद होता है। राम उन्हें शांत कराते हैं। अपनी शंका दूर होने पर परशुराम उन्हें आशीर्वाद देकर वापस लौट जाते हैं। इस दौरान डा. समर बहादुर सिंह , बलराम पाठक, अनिल सिंह, प्रमोद कुमार, पवन जनसेवक, अंशुमान सिंह, संजय सिंह, रामकिशुन, मृत्युंजय चौरसिया आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन