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कभी भी हटाया जा सकता है नगर का रोडवेज बस अड्डा
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पीडीडीयू नगर। पीडीडीयू नगर में संचालित रोडवेज बस स्टैंड का अस्तित्व जल्द ही समाप्त हो जाएगा। कारण कि परिवहन निगम की ओर से रेलवे की भूमि को मामूली किराए पर लेकर बस अड्डा संचालित किया जा रहा था। लेकिन परिवहन विभाग ने 10 साल रेलवे को किराया ही नहीं दे रहा था। किराए नहीं देने पर रेलवे ने क्षेत्रीय प्रबंधक राज्य सड़क परिवहन निगम वाराणसी डिपो को कारण बताओ नोटिस दिया है। साथ ही नोटिस को बस स्टैंड पर चस्पा भी कर दिया है। 25 अक्तूबर तक परिसर खाली करने की मोहलत दी गई थी। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि परिसर खाली नहीं कराया गया तो रेल प्रशासन परिसर खाली कराएगा।
जिले में परिवहन निगम की ओर से दो बस स्टैंड बनाए गए हैं। इसमें चकिया में निगम ने अपनी भूमि पर स्टैंड बनाया है लेकिन देखरेख के अभाव में वह भी बदहाल है। वहीं दूसरा पीडीडीयू नगर में रेलवे की भूमि पर परिवहन निगम ने अस्सी के दशक में किराए पर भूमि लेकर बस अड्डे के संचालन साथ परिसर में कैंटीन और दुकानें भी खोल रखी थी। यात्री वहीं से बस का इंतजार करते थे। ट्रेन पकड़ने के लिए भी लोग आते है। यहां से अब वर्ष 2009-10 से विभाग ने रेलवे को किराया देना भी बंद करने के साथ ही परिसर में यात्री सुविधाओं शौचालय, प्रतीक्षालय, पेयजल पर ध्यान ही नहीं देर रहे थे। पूर्व मध्य रेलवे के मुगलसराय मंडल के संपदा अधिकारी ने 11 अक्तूबर को नोटिस जारी कर स्टैंड का संचालन और कैंटीन बंद करने के लिए 25 अक्तूबर तक का समय दिया था। मियाद बीतने के बाद अब रेलवे परिसर खाली कराने की पूरी तैयारी कर चुका है।
कोट-
परिवहन निगम ने दस वर्षों से किराया नहीं दिया है और रेलवे की भूमि पर कब्जा जमा रखा है। रेलवे को इस भूमि की आवश्यकता है। इसी वजह से नोटिस भेजा गया है। जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। विवेकानंद भारती, डीईएन हेडक्वार्टर, मुगलसराय रेल मंडल
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रेलवे से बस स्टैंड खाली करने की नोटिस मिलने के बाद वहां से परिसर को खाली कराया जा रहा है। इससे उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया जा चुका है। दूसरी जगह जमीन की तलाश की जा रही है ताकि बस स्टैंड का संचालन हो सके। जगदीश, एआरएम, परिवहन निगम।
02- बदहाल रोडवेज
बस स्टैंड में खड़े होते हैं निजी हैं वाहन, यात्रियों को होती है परेशानी
चकिया, नौगढ़, सैयदराजा, चहनिया और धानापुर तक जाती हैं सिटी बसें
अमर उजाला ब्यूरो
पीडीडीयू नगर। बदहाल रोडवेज बस अड्डे में सरकारी बसें कम और निजी वाहन अधिक खड़े होते हैं। सरकारी बसें स्टैैड के पास सड़क किनारे कुछ देर के लिए खड़ी होती हैं और यात्री लेने के बाद रवाना हो जाती हैै। इससे बस पकड़ने वाले यात्रियों को काफी परेशानी होती है। इस पर अधिकारी ध्यान ही नहीं देते हैं। इसी में रेलवे से नोटिस मिलने के बाद परिवहन निगम के पास बस स्टैंड को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए कोई जमीन भी नहीं है, जहां से बसों का संचालन किया जा सके।
बता दें यहां से पहले डिपो की बड़ी बसें बनारस, सोनभद्र, नौगढ़, चकिया, धानापुर, चहनियां, कमालपुर, सकलडीहा सहित जिले के विभिन्न इलाकों जाती थी। बाद में राजघाट पुल से भारी वाहनों के आवागमन ठप होने से एक दशक पहले जेएनएनयूआरएम बसों का संचालन शुरू हुआ तो इसका भी संचालन यहीं से किया जाने लगा। लेकिन वहां भी निजी वाहन खड़े होते हैं। इससे यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है। नगर के तनुज का कहना है कि बस अड्डा पहले से बदहाल था लेकिन सिटी बसें आने से चकिया, नौगढ़ तक जाने में सहूलियत होती थी। परिसर में निजी वाहन खड़े होने से दिक्कत होती। वहीं गोपाल गुप्ता कहते हैं कि बस स्टैंड की बेहतर व्यवस्था नहीं होने से जिले में दूर दराज से ट्रेन पकड़ने के आने और जाने वाले यात्रियों को परेशानी होती है। परिवहन निगम को बस स्टैंड की व्यवस्था करनी चाहिए। जेपी यादव का कहना है कि रोडवेज की लापरवाही से अव्यवस्था है। इससे ट्रेन पकड़ने वालों को काफी दिक्कत होती है। दिलीप सिंह कहते हैं यात्रियों को बैठने तक की जगह नहीं है। पेयजल और शौचालय की भी सुविधा नहीं है। एआरएम जगदीश का कहना है कि जगह की तलाश की जा रही है ताकि कहीं बेहतर बस स्टैंड का निर्माण कराया जा सके।
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जिले में परिवहन निगम की ओर से दो बस स्टैंड बनाए गए हैं। इसमें चकिया में निगम ने अपनी भूमि पर स्टैंड बनाया है लेकिन देखरेख के अभाव में वह भी बदहाल है। वहीं दूसरा पीडीडीयू नगर में रेलवे की भूमि पर परिवहन निगम ने अस्सी के दशक में किराए पर भूमि लेकर बस अड्डे के संचालन साथ परिसर में कैंटीन और दुकानें भी खोल रखी थी। यात्री वहीं से बस का इंतजार करते थे। ट्रेन पकड़ने के लिए भी लोग आते है। यहां से अब वर्ष 2009-10 से विभाग ने रेलवे को किराया देना भी बंद करने के साथ ही परिसर में यात्री सुविधाओं शौचालय, प्रतीक्षालय, पेयजल पर ध्यान ही नहीं देर रहे थे। पूर्व मध्य रेलवे के मुगलसराय मंडल के संपदा अधिकारी ने 11 अक्तूबर को नोटिस जारी कर स्टैंड का संचालन और कैंटीन बंद करने के लिए 25 अक्तूबर तक का समय दिया था। मियाद बीतने के बाद अब रेलवे परिसर खाली कराने की पूरी तैयारी कर चुका है।
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कोट-
परिवहन निगम ने दस वर्षों से किराया नहीं दिया है और रेलवे की भूमि पर कब्जा जमा रखा है। रेलवे को इस भूमि की आवश्यकता है। इसी वजह से नोटिस भेजा गया है। जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। विवेकानंद भारती, डीईएन हेडक्वार्टर, मुगलसराय रेल मंडल
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रेलवे से बस स्टैंड खाली करने की नोटिस मिलने के बाद वहां से परिसर को खाली कराया जा रहा है। इससे उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया जा चुका है। दूसरी जगह जमीन की तलाश की जा रही है ताकि बस स्टैंड का संचालन हो सके। जगदीश, एआरएम, परिवहन निगम।
02- बदहाल रोडवेज
बस स्टैंड में खड़े होते हैं निजी हैं वाहन, यात्रियों को होती है परेशानी
चकिया, नौगढ़, सैयदराजा, चहनिया और धानापुर तक जाती हैं सिटी बसें
अमर उजाला ब्यूरो
पीडीडीयू नगर। बदहाल रोडवेज बस अड्डे में सरकारी बसें कम और निजी वाहन अधिक खड़े होते हैं। सरकारी बसें स्टैैड के पास सड़क किनारे कुछ देर के लिए खड़ी होती हैं और यात्री लेने के बाद रवाना हो जाती हैै। इससे बस पकड़ने वाले यात्रियों को काफी परेशानी होती है। इस पर अधिकारी ध्यान ही नहीं देते हैं। इसी में रेलवे से नोटिस मिलने के बाद परिवहन निगम के पास बस स्टैंड को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए कोई जमीन भी नहीं है, जहां से बसों का संचालन किया जा सके।
बता दें यहां से पहले डिपो की बड़ी बसें बनारस, सोनभद्र, नौगढ़, चकिया, धानापुर, चहनियां, कमालपुर, सकलडीहा सहित जिले के विभिन्न इलाकों जाती थी। बाद में राजघाट पुल से भारी वाहनों के आवागमन ठप होने से एक दशक पहले जेएनएनयूआरएम बसों का संचालन शुरू हुआ तो इसका भी संचालन यहीं से किया जाने लगा। लेकिन वहां भी निजी वाहन खड़े होते हैं। इससे यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है। नगर के तनुज का कहना है कि बस अड्डा पहले से बदहाल था लेकिन सिटी बसें आने से चकिया, नौगढ़ तक जाने में सहूलियत होती थी। परिसर में निजी वाहन खड़े होने से दिक्कत होती। वहीं गोपाल गुप्ता कहते हैं कि बस स्टैंड की बेहतर व्यवस्था नहीं होने से जिले में दूर दराज से ट्रेन पकड़ने के आने और जाने वाले यात्रियों को परेशानी होती है। परिवहन निगम को बस स्टैंड की व्यवस्था करनी चाहिए। जेपी यादव का कहना है कि रोडवेज की लापरवाही से अव्यवस्था है। इससे ट्रेन पकड़ने वालों को काफी दिक्कत होती है। दिलीप सिंह कहते हैं यात्रियों को बैठने तक की जगह नहीं है। पेयजल और शौचालय की भी सुविधा नहीं है। एआरएम जगदीश का कहना है कि जगह की तलाश की जा रही है ताकि कहीं बेहतर बस स्टैंड का निर्माण कराया जा सके।