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बाढ़ पीड़ितों को सरकारी मदद की आस, शिविरों में पहुंचने लगे लोग
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पीडीडीयू नगर। जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं, वहां बाढ़ पीड़ित पहुंचने लगे हैं और उन्हें अब सरकारी मदद की आस है। बाढ़ शिविरों में आए शरणार्थियों के लिए भोजन का इंतजाम तो किसी तरह हो जा रहा है मगर पशुओं के लिए पर्याप्त चारा नहीं मिल पा रहा है। सबसे अधिक संकट पशुओं के चारे का है। इसे लेकर ग्रामीणों में ने नाराजगी है। वहीं बाढ़ से घिरे कई लोग चोरी के भय से मकानों की छतों पर रात गुजार रहे हैं और बाहर नहीं आ रहे हैं। उन लोगों का कहना है कि वहां न तो अफसर जा रहे हैं और न ही कोई मदद की जा रही है। वहीं गंगा का जलस्तर 71.80 मीटर पर स्थिर है। जो खतरे के निशान 71.26 मीटर से 54 सेमी ऊपर है। लगभग 30 गांव बाढ़ से घिरे हुए हैं।
चहनिया संवाददाता के अनुुसार मारुफपुर, तिरगावां, टांडाकला में बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं। क्षेत्र में मारुफपुर स्थित बाढ़ राहत शिविर में मुकुंदपुर के ग्रामीण शरण लिए हुए हैं। गांव में बाढ़ का पानी घुसने के चार दिन बाद ग्रामीणों की मदद के लिए जिला प्रशासन आगे आया। पशुपालक दूधनाथ यादव के पास 20 पशु हैं तो रामबहादुर के पास नौ और मिश्री यादव के पास 10 पशु हैं। सभी पशुपालकों को 16-16 किलो भूसा उपलब्ध कराया गया है। पशुपालकों का कहना है कि 16 किलो भूसा में इतने पशुओं का पेट कैसे भरेगा। वहीं मुकुंदपुर के ही रामचंदर, बलिराम और कमलेश के भी पशु हैं लेकिन इन्हें भूसा तक नहीं मिला जिससे कि पशुओं को खिला सके। मौके पर पहुंचे एसडीएमएम रामसजीवन मौर्य और तहसीलदार वंदना मिश्रा से ग्रामीणों ने शिकायत की। एसडीएम का कहना था कि जो लोग शिविर में मौजूद हैँ उन्हें ही सरकारी सुविधाएं और मदद मुहैया कराई जाएगी। वहीं शेरपुर-सरैया निवासी उदय नारायण यादव और शर्मा यादव का घर डूब गया है। पड़ोसी के यहां शरण लिए हुए हैं। इन लोगों ने बताया कि एसडीएम और तहसीलदार आए और समस्या पूछकर चले गए। मदद के नाम पर कुछ भी नहीं मिला है।
पड़ाव संवाददाता के अनुसार बहादुरपुर, मढिया, रतनपुर, कटेसर, कुंडकला कुछ परिवारों ने बाढ़ राहत शिविर में शरण ली है। वहीं कुछ परिवार दूसरे के मकान में आसरा लिए हुए हैं तो कुछ अपने मकान के छत पर किसी तरह व्यवस्था करके रह रहे हैं। रतनपुर निवासी अरूण देव मौर्य का कहना है कि भोजन, पीने के लिए पानी, बच्चों के लिए दूध इत्यादि के लिए तरसना पड़ रहा है। वही मढिया गांव निवासी मुन्ना लाल का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी पशुओं के लिए चारे की है। जो लोग छतों पर रह रहे है, प्रशासन की ओर से कुछ भी व्यवस्था नहीं की गई है। सिर्फ गांव में नाव की व्यवस्था कराई गई है।
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ढाई किमी दूर बना दिया गया बाढ़ शिविर
धानापुर। ग़ुरैनी और प्रहलादपुर गांव के लोग बाढ़ से घिर चुके हैं। वहीं बूढ़ेपुर, नौघरा, नरौली, दीया प्रसहटा में भी पानी पहुंच चुका है। सबसे अधिक दिक्कत गुरैनल और प्रहलादपुर के लोगों को है। यहां के बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि प्राइमरी स्कूल गुरैनी की जगह ढाई किमी दूर डबरिया में राहत शिविर बनाया गया है। केरोसिन तेल भी नहीं दिया जा रहा है। एसडीओ आकाश सिंह ने कहा कि जो ट्रांसफार्मर पानी में डूबने के करीब हैं, सुरक्षा की दृष्टि से वहां की आपूर्ति ठप कर दी गई है। मगर वहां करोसिन तेल भी उपलब्ध नहीं कराया गया है।
दुलहीपुर संवाददाता के अनुसार कुंडा खुर्द, मल्लाह बस्ती, कुंडा कला, सहजौर और रौना में गंगा किनारे कटान तेज हो गई है। वहीं कुंडा कला का संपर्क मार्ग में समाहित हो गया। कटान की सूचना मिलते ही लेखपाल, कानूनगो ने इसकी रिपोर्ट डीएम को दे दी। वहीं मलोखर चौराहे तक पानी पहुंच गया। कुंडा खुर्द और भिसौड़ी के लोगों ने भूसे की व्यवस्था करने की मांग की है। राहत शिविर प्राथमिक विद्यालय दुलहीपुर बनाया गया है, वहां ताला लटका हुआ है। लेखपाल मिथिलेश का कहना है कि शिविर में कोई पीड़ित पहुंचा नहीं है। वहां लोगों के आते ही शिविर खोल दिया जाएगा।
पशुओं के लिए चारे की मांग
पीडीडीयू नगर। बाढ़ का दंश झेल रहे ग्रामीणों और पशुपालकों के सामने चारे का संकट है। हरा चारा नष्ट हो गया है। घरों में पानी भरने से भूसा भी भींगकर सड़ने लगा है। पूर्व सांसद रामकिशुन ने जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल को पत्र लिखकर बाढ़ पीड़ित गांवों में पशु पालकों के लिए चारे के रूप में भूसा उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। बाढ़ के पानी से घिरे होने के कारण बीमारियां भी पशुओं में उत्पन्न हो रही है बीमारियों के रोकथाम के लिए पशु डॉक्टर आदि की व्यवस्था कराने का भी आग्रह किया है। वहीं पूर्व ब्लाक प्रमुखबाबू लाल यादव क्षेत्र के बहादुरपुर, मढ़िया, रतनपुर, कुंडा, कुंडा कला, बिसौडी, मलोखर, सहजौर गांव का दौरा किया। इस दौरान बहादुरपुर पहुंचे एसडीएम कुमार हर्ष से उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन, मिट्टी का तेल, दूध, बिस्किट, पशुओं के लिए चारा की व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की।
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चहनिया संवाददाता के अनुुसार मारुफपुर, तिरगावां, टांडाकला में बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं। क्षेत्र में मारुफपुर स्थित बाढ़ राहत शिविर में मुकुंदपुर के ग्रामीण शरण लिए हुए हैं। गांव में बाढ़ का पानी घुसने के चार दिन बाद ग्रामीणों की मदद के लिए जिला प्रशासन आगे आया। पशुपालक दूधनाथ यादव के पास 20 पशु हैं तो रामबहादुर के पास नौ और मिश्री यादव के पास 10 पशु हैं। सभी पशुपालकों को 16-16 किलो भूसा उपलब्ध कराया गया है। पशुपालकों का कहना है कि 16 किलो भूसा में इतने पशुओं का पेट कैसे भरेगा। वहीं मुकुंदपुर के ही रामचंदर, बलिराम और कमलेश के भी पशु हैं लेकिन इन्हें भूसा तक नहीं मिला जिससे कि पशुओं को खिला सके। मौके पर पहुंचे एसडीएमएम रामसजीवन मौर्य और तहसीलदार वंदना मिश्रा से ग्रामीणों ने शिकायत की। एसडीएम का कहना था कि जो लोग शिविर में मौजूद हैँ उन्हें ही सरकारी सुविधाएं और मदद मुहैया कराई जाएगी। वहीं शेरपुर-सरैया निवासी उदय नारायण यादव और शर्मा यादव का घर डूब गया है। पड़ोसी के यहां शरण लिए हुए हैं। इन लोगों ने बताया कि एसडीएम और तहसीलदार आए और समस्या पूछकर चले गए। मदद के नाम पर कुछ भी नहीं मिला है।
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पड़ाव संवाददाता के अनुसार बहादुरपुर, मढिया, रतनपुर, कटेसर, कुंडकला कुछ परिवारों ने बाढ़ राहत शिविर में शरण ली है। वहीं कुछ परिवार दूसरे के मकान में आसरा लिए हुए हैं तो कुछ अपने मकान के छत पर किसी तरह व्यवस्था करके रह रहे हैं। रतनपुर निवासी अरूण देव मौर्य का कहना है कि भोजन, पीने के लिए पानी, बच्चों के लिए दूध इत्यादि के लिए तरसना पड़ रहा है। वही मढिया गांव निवासी मुन्ना लाल का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी पशुओं के लिए चारे की है। जो लोग छतों पर रह रहे है, प्रशासन की ओर से कुछ भी व्यवस्था नहीं की गई है। सिर्फ गांव में नाव की व्यवस्था कराई गई है।
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ढाई किमी दूर बना दिया गया बाढ़ शिविर
धानापुर। ग़ुरैनी और प्रहलादपुर गांव के लोग बाढ़ से घिर चुके हैं। वहीं बूढ़ेपुर, नौघरा, नरौली, दीया प्रसहटा में भी पानी पहुंच चुका है। सबसे अधिक दिक्कत गुरैनल और प्रहलादपुर के लोगों को है। यहां के बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि प्राइमरी स्कूल गुरैनी की जगह ढाई किमी दूर डबरिया में राहत शिविर बनाया गया है। केरोसिन तेल भी नहीं दिया जा रहा है। एसडीओ आकाश सिंह ने कहा कि जो ट्रांसफार्मर पानी में डूबने के करीब हैं, सुरक्षा की दृष्टि से वहां की आपूर्ति ठप कर दी गई है। मगर वहां करोसिन तेल भी उपलब्ध नहीं कराया गया है।
दुलहीपुर संवाददाता के अनुसार कुंडा खुर्द, मल्लाह बस्ती, कुंडा कला, सहजौर और रौना में गंगा किनारे कटान तेज हो गई है। वहीं कुंडा कला का संपर्क मार्ग में समाहित हो गया। कटान की सूचना मिलते ही लेखपाल, कानूनगो ने इसकी रिपोर्ट डीएम को दे दी। वहीं मलोखर चौराहे तक पानी पहुंच गया। कुंडा खुर्द और भिसौड़ी के लोगों ने भूसे की व्यवस्था करने की मांग की है। राहत शिविर प्राथमिक विद्यालय दुलहीपुर बनाया गया है, वहां ताला लटका हुआ है। लेखपाल मिथिलेश का कहना है कि शिविर में कोई पीड़ित पहुंचा नहीं है। वहां लोगों के आते ही शिविर खोल दिया जाएगा।
पशुओं के लिए चारे की मांग
पीडीडीयू नगर। बाढ़ का दंश झेल रहे ग्रामीणों और पशुपालकों के सामने चारे का संकट है। हरा चारा नष्ट हो गया है। घरों में पानी भरने से भूसा भी भींगकर सड़ने लगा है। पूर्व सांसद रामकिशुन ने जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल को पत्र लिखकर बाढ़ पीड़ित गांवों में पशु पालकों के लिए चारे के रूप में भूसा उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। बाढ़ के पानी से घिरे होने के कारण बीमारियां भी पशुओं में उत्पन्न हो रही है बीमारियों के रोकथाम के लिए पशु डॉक्टर आदि की व्यवस्था कराने का भी आग्रह किया है। वहीं पूर्व ब्लाक प्रमुखबाबू लाल यादव क्षेत्र के बहादुरपुर, मढ़िया, रतनपुर, कुंडा, कुंडा कला, बिसौडी, मलोखर, सहजौर गांव का दौरा किया। इस दौरान बहादुरपुर पहुंचे एसडीएम कुमार हर्ष से उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन, मिट्टी का तेल, दूध, बिस्किट, पशुओं के लिए चारा की व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की।