चंदौली हत्याकांड: बैनर फाड़ने और झोपड़ी जलाने के बाद हत्या तक पहुंच गया विवाद, परिवार का आरोप- पुलिस की लापरवाही से हुई हत्या
चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र के सिकटिया चौराहे पर शनिवार की सुबह विशाल पासवान(24) की हत्या काफी दिनों से दो पक्षों के बीच पनप रहे विवाद के बाद हुई। बैनर फाड़ने से शुरू हुआ विवाद झोपड़ी जलाने के बाद हत्या तक पहुंच जाएगा यह किसी ने नहीं सोचा था। मृतक के परिजनों ने अलीनगर पुलिस की लापरवाही को हत्या की वजह बताई। कहा कि पुलिस ने झोपड़ी जलाने के बाद उचित कार्रवाई की होती तो आज विशाल जिंदा होता।
अलीनगर थाना क्षेत्र के सिकटिया निवासी विक्की पासवान पंचायत चुनाव में प्रधान का प्रत्याशी था। उसने सिकटिया चौराहे और आसपास कई चुनावी बैनर लगाए थे। उसी दौरान क्षेत्र के रंजीत यादव ने उसका एक बैनर फाड़कर अपने जन्मदिन का बैनर लगा दिया। आरोप है कि तीन नवंबर को दोबारा रंजीत ने विक्की पासवान का एक बैनर फाड़कर एलबीएस कॉलेज के एक छात्रनेता का बैनर लगा दिया।
इसकी सूचना मिलने के बाद विक्की और उसके गांव के कई लोगों मौके पर पहुंचे गए। दोनों पक्षों में मारपीट हुई। मामला थाने तक पहुंचा तो पुलिस ने सुलह करा दिया लेकिन तनाव कम नहीं हुआ।
आरोप है कि दूसरे पक्ष को लगा कि विक्की को बैनर फाड़ने की सूचना चौराहे पर गुमटी में दुकान चलाने वाला बबलू पासवान ने ही दी है। इसलिए बृहस्पतिवार की रात चौराहे पर स्थित बबलू पासवान की गुमटी फूंक दी गई। बबलू ने पुलिस से इसकी शिकायत की। आरोप है कि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। विवाद यहां तक थमा नहीं और शनिवार की सुबह 8-10 लोगों ने विक्की के मुहल्ले के ही विशाल और अजय पर हमला कर दिया। अजय जान बचाकर भाग गया वहीं विशाल की निर्ममता से हत्या कर दी गई। वहीं आरोप है कि हत्या के बाद आरोपियों ने खुद की भी झोपड़ी जला दी।
शनिवार को ही थी विशाल की एलएलबी की काउंसिलिंग
विशाल पासवान(24) अपने चार भाइयों में सबसे बड़ा था। पिता ब्रह्मालाल एलआईसी में बड़े पद पर थे। विशाल ने वाराणसी के मैदागिन स्थित हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज से बीए पास किया था और एलएलबी में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा दी थी। शनिवार को उसकी एलएलबी की काउंसिलिंग थी।
सूचना के बाद से घंटों बेहोश रही मां
बड़े बेटे विशाल की मौत की सूचना मिलते ही उसकी मां इंदू देवी बेहोश हो गईं। घंटों तक उन्हें होश नहीं आया। बहन और भाइयों का रो-रोकर बुरा हाल था। पिता के आंखों से भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। बहन सृष्टि रोते रोते यही कह रही थी-‘हमारे भाई का हाथ पैर तोड़ दिए होते, जान से क्यों मार दिए। उसने क्या बिगाड़ा था। अब मम्मी-पापा का सहारा कौन बनेगा।’