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रावण का वध कर श्रीराम ने सत्य और धर्म की स्थापना की : मारुति किंकर
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इलिया में कथा सुनतीं महिलाएं। संवाद
इलिया। कस्बे में मां काली सेवा समिति की ओर से आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन कथावाचक पं. मारुति किंकर ने सीता हरण, श्रीराम-रावण युद्ध, भगवान श्रीराम के विजय उत्सव व राज्याभिषेक की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने रावण का वध कर सत्य और धर्म की स्थापना की।
कथा श्रवण के दौरान पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और जय श्रीराम के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया। कथावाचक ने कहा कि रावण ने छलपूर्वक माता सीता का हरण किया। इससे संपूर्ण प्रकृति भी शोकाकुल हो उठी। इसके बाद उन्होंने भगवान श्रीराम के वन-वन भटककर माता सीता की खोज करने, सुग्रीव से मित्रता और हनुमान जी की भक्ति व पराक्रम का विस्तृत वर्णन किया।
हनुमान जी के लंका पहुंचकर माता सीता का पता लगाने और लंका दहन का प्रसंग सुनाते ही श्रद्धालु रोमांचित हो उठे। श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध का वर्णन करते हुए कहा कि अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः धर्म की ही विजय होती है। भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर सत्य और धर्म की स्थापना की। इस दौरान पंडाल ‘जय श्रीराम’ के जयकारे से गूंज उठा। कथा के समापन पर भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन, विजय उत्सव और भव्य राज्याभिषेक की आकर्षक झांकी भी प्रस्तुत की गई। कथा के दौरान आयोजक समिति के सदस्य और क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे। अंत में आरती की गई और प्रसाद वितरित किया गया।
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कथा श्रवण के दौरान पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और जय श्रीराम के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया। कथावाचक ने कहा कि रावण ने छलपूर्वक माता सीता का हरण किया। इससे संपूर्ण प्रकृति भी शोकाकुल हो उठी। इसके बाद उन्होंने भगवान श्रीराम के वन-वन भटककर माता सीता की खोज करने, सुग्रीव से मित्रता और हनुमान जी की भक्ति व पराक्रम का विस्तृत वर्णन किया।
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हनुमान जी के लंका पहुंचकर माता सीता का पता लगाने और लंका दहन का प्रसंग सुनाते ही श्रद्धालु रोमांचित हो उठे। श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध का वर्णन करते हुए कहा कि अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः धर्म की ही विजय होती है। भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर सत्य और धर्म की स्थापना की। इस दौरान पंडाल ‘जय श्रीराम’ के जयकारे से गूंज उठा। कथा के समापन पर भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन, विजय उत्सव और भव्य राज्याभिषेक की आकर्षक झांकी भी प्रस्तुत की गई। कथा के दौरान आयोजक समिति के सदस्य और क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे। अंत में आरती की गई और प्रसाद वितरित किया गया।
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