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बोर्ड परीक्षा: बदहाल है इंटर कॉलेजों की प्रयोगशालाएं
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पीडीडीयू नगर। यूपी बोर्ड के प्रायोगिक परीक्षाओं की तारीख भले ही न आई हो लेकिन शिक्षा विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। बोर्ड परीक्षा शुरू होने से पहले विज्ञान वर्ग की प्रायोगिक परीक्षाएं होनी है। मगर कालेजों में प्रयोगशालाओं की हालत बहुत ठीक नहीं है। कहीं लैब टूटे हैं तो किसी कालेज में उपकरण और अन्य जरूरी केमिकल नहीं हैं।
कोरोना काल के चलते बोर्ड परीक्षा 2020 होने के बाद से ही स्कूल बंद हो गए। कक्षाएं भी संचालित होनी बंद हो गई। अनलाक के बाद अक्तूबर महीने से कोविड-19 के नियमों के अनुसार स्कूलों में कक्षाएं शुरू हो गईं। पढ़ाई तो चल रही हैं मगर प्रयोगशालाएं बदहाल हैं। वहां जरूरी सामान और उपकरण नहीं होने से छात्र प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं। यह हाल तब है जब शिक्षा विभाग प्रायोगिक परीक्षाएं कराने की तैयारी कर रहा है। प्रधानाचार्योँ के सामने दिक्कत है कि धन की कमी और संसाधन नहीं मिलने से जो व्यवस्था है उसी में प्रैक्टिकल की खानापूर्ति की जा रही है। इससे छात्रों का नुकसान हो रहा है। जिले में सरकारी, अनुदानित और निजी लगभग 226 हाईस्कूल और इंटर कालेज हैं। इसमें 35 फीसदी से अधिक विद्यालयों में विज्ञान वर्ग की कक्षाएं संचालित हैं। मगर प्रैक्टिक्ल की कहीं बेहतर सुविधाएं छात्र-छात्राओं को नहीं मिल पा रही हैं।
कोरोना संक्रमण के चते पढ़ाई के साथ छात्रों का प्रैक्टिकल भी प्रभावित हुआ है। प्रधानाचार्यों और स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों का प्रैक्टिकल जरूर कराएं। जहां परेशानी है वहां आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएं। जिससे विद्यार्थियों का नुकसान न हो। डॉ. वीके राय, डीआईओएस, चंदौली
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कोरोना काल के चलते बोर्ड परीक्षा 2020 होने के बाद से ही स्कूल बंद हो गए। कक्षाएं भी संचालित होनी बंद हो गई। अनलाक के बाद अक्तूबर महीने से कोविड-19 के नियमों के अनुसार स्कूलों में कक्षाएं शुरू हो गईं। पढ़ाई तो चल रही हैं मगर प्रयोगशालाएं बदहाल हैं। वहां जरूरी सामान और उपकरण नहीं होने से छात्र प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं। यह हाल तब है जब शिक्षा विभाग प्रायोगिक परीक्षाएं कराने की तैयारी कर रहा है। प्रधानाचार्योँ के सामने दिक्कत है कि धन की कमी और संसाधन नहीं मिलने से जो व्यवस्था है उसी में प्रैक्टिकल की खानापूर्ति की जा रही है। इससे छात्रों का नुकसान हो रहा है। जिले में सरकारी, अनुदानित और निजी लगभग 226 हाईस्कूल और इंटर कालेज हैं। इसमें 35 फीसदी से अधिक विद्यालयों में विज्ञान वर्ग की कक्षाएं संचालित हैं। मगर प्रैक्टिक्ल की कहीं बेहतर सुविधाएं छात्र-छात्राओं को नहीं मिल पा रही हैं।
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कोरोना संक्रमण के चते पढ़ाई के साथ छात्रों का प्रैक्टिकल भी प्रभावित हुआ है। प्रधानाचार्यों और स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों का प्रैक्टिकल जरूर कराएं। जहां परेशानी है वहां आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएं। जिससे विद्यार्थियों का नुकसान न हो। डॉ. वीके राय, डीआईओएस, चंदौली
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