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दीपोत्सव पर दूर हुआ अंधेरा, रोशनी से नहाया हर घर-आंगन

Sat, 14 Nov 2020 09:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 14 Nov 2020 09:33 PM IST
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Blinded away on Deepotsav, home spread in courtyard
चंदौली के पीडीडीयू नगर के सेंट्रल कालोनी स्थित शास्त्री पार्क में दीप जलाते खिलाड़ी। - फोटो : CHANDAULI
पीडीडीयू नगर। चौदह वर्ष के वनवास और लंका विजय के बाद भगवान राम, लक्ष्मण, सीता के अयोध्या वापसी की खुशी में लोगों ने हर्षोल्लास के साथ दीपावली मनाई। शनिवार को साफ-सफाई के बाद विद्युत झालरों, आकर्षक बल्ब और रंग बिरंगे कागजों से घर आंगन को दुल्हन की तरह सजाया। रोशनी से घर आंगन ही नही गलियां भी चमक उठी। शुभ मुहूर्त में लोगों ने वैभव और धन-ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी और प्रथम पूज्य गणेश की पूजा अर्चना की और मिष्ठान का भोग लगाया। इसके बाद लोगों ने खूब आतिशबाजी की। देर रात तक नगर, कस्बों और ग्रामीण इलाकों में आतिशबाजी होती रही।
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पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरूआत धनतेरस से ही हो गई। दीपावली पर घरों को सजाने का काम भी कई दिनों से चल रहा था। दीपावली की सुबह से ही शाम के पूजन अर्चन की तैयारी शुरू हो गई। घरों की साफ-सफाई के बाद फूल-माला और रंगोली से घरों को सजाया। शाम वक्त शुभ मुहुर्त में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की और पुरोहितों को बुलाकर विधि-विधान से पूजा अर्चना की। देव विग्रहों को लावा, लाई, चुरा, खील-बतासे और मिठाइयों का भोग लगाया। फूल-माला, धूप-दीप से शृंगार किया और इसके बाद आरती उतारी।
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घरों में घरौंदा बनाकर कुल्हिया, चुकिया, ग्वालिन, खिलौनों को लाई, खील बतासों से भरा और पूरे घर को दीप से जलाया। पूजन अर्चन के बाद घर की छतों, दरवाजों पर दीप मालाएं सजाई। दीप मालिका के साथ घरों की छतों पर लगाए गए विद्युत झालरों को शाम को जलाया गया। इससे पूरा इलाका रोशनी से नहा उठा। दीपक की लौ और विद्युत झालरों की लड़ियों की टिमटिमाती रोशनी से आसमान के तारे भी शरमाते नजर आए। पूजा अर्चना के बाद प्रसाद के रूप में मिठाइयों का स्वाद चखा। एक दूसरे के घरों में भी प्रसाद और मिठाइयों बांटी गई और एक दूसरे को दीपावली की शुभकमानाएं दी।
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पीडीडीयू नगर। शाम को घरों को झालरों से सजाने और पूजा पाठ के बाद घर के युवा, बुजुर्ग, महिलाएं सभी घर की छतों और दरवाजों पर एकत्र हो गए और आतिशबाजी का दौर शुरू हुआ। शाम छह बजे से शुरू हुआ आतिशबाजी का दौर रात दो बजे तक चलता रहा। आसमान रंग बिरंगी फूलझड़ियों से रोशन रहा, वहीं लोगों ने राकेट, अनार, चरखी, बिजली बम, आलू बम सहित अन्य पटाखे छोड़े। प्रतिबंधों की वजह से पिछले वर्ष के मुकाबले आतिशबाजी कम हुई। दुकानों में भी दिन भर दुकानदारी के बाद देर शाम पुरोहितों को बुलाकर पूजन अर्चन कराया गया। नया बही खाता की शुरूआत कराई और तुला पूजन, कुबेर पूजन के बाद शुभ के प्रतीक स्वास्तिक का निशान दरवाजे पर लगाया। इसकी पूजा अर्चना की और दूसरे को मिठाई खिलाकर दीपावली की शुभकामना दी।
पीडीडीयू नगर। बढ़ते प्रदूषण और सजावट के सामान की कीमतों में बेताहासा वृद्धि को देखते हुए घरों, प्रतिष्ठानों की सजावट के लिए लोग फिर से प्रकृति की शरण में पहुंच गए हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों से आर्टिफिशियल माला के साथ रंग बिरंगे फूलों की माला से घरों और प्रतिष्ठानों की सजावट की जा रही है।
शनिवार की सुबह से ही बाजार में फूलों की दुकान सजी रही। विशेष कर गेंदे की माला की खूब डिमांड रही। लोगों ने माला खरीद कर घर के दरवाजे को सजाया वहीं अशोक, आम के पत्तों की लड़ियां सजाई। दरवाजे पर शुभ प्रतीक केले के पेड़ भी लगाए। नगर में जीटी रोड पर मां काली मंदिर के समीप फूल मंडी के अलावा धर्मशाला रोड, परमार कटरा, गल्ला मंडी, रस्तोगी गली, नई सट्टी में फूलों की अस्थाई दुकाने सजाई गई। वहीं ठेलों पर भी गली मुहल्लों में गेंदा की माला की खूब बिक्री हुई। दुकानों और ठेलों पर फूलों की माला खरीदने के लिए ग्राहकों की भीड़ रही।
पीडीडीयू नगर। दीप पर्व पर शनिवार को नगर सहित पूरे जिले में परंपरा निभाने के लिए लोगों ने खूब जुआ खेला। मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा अर्चना के बाद जगह-जगह फड़ बिछाए गए और यहां लोगों ने किस्मत आजमाई।
लक्ष्मी पूजा का पर्व दीपावली पर जुआ खेलने की भी परंपरा रही है, लेकिन वर्तमान में यह परंपरा ने विभत्स रूप ले लिया है। वैसे तो पूरे वर्ष विभिन्न स्थानों पर जुआ का खेल होता है लेकिन दीपावली के एक माह पहले जुए का खेल बड़े पैमाने पर शुरू हो जाता है। ऐसा नहीं है कि जुआ के फड़ों की जानकारी पुलिस को नहीं है लेकिन पुलिस भी सिर्फ इक्का दुक्का स्थानों पर छापेमारी कर कर्तव्यों की इतिश्री कर लेती है। पिछले एक सप्ताह में चकिया इलाके में तीन चार स्थानों पर छापेमारी कर 15 से अधिक जुआरियों को गिरफ्तार किया गया और रुपये बरामद किए। बावजूद इसके दीपावली पर शनिवार की शाम नगर में ही एक दर्जन स्थानों पर फड़ सज गए थे। यहां ताश के बावन पत्तों को फेंटने का काम शुरू हो गया। कई स्थानों पर ताश के पत्तों की जगह लूडो, शतरंज, चौसड़ के सहारे बाजियां लगी।
पीडीडीयू नगर। दीपावली पर खुशियां बांटने की गरज से एक दूसरे को उपहार देने की भी परंपरा रही है। वर्तमान में काम निकालने के लिए घूस के रुप में उपहारों का आदान-प्रदान भी खूब हो रहा है। दीपावली पर एक दूसरे के प्रतिष्ठानों पर मिठाइयां, ड्राइ फ्रूट्स, सजावटी आइटम और नकदी खूब पहुंचाए गए। ठेकेदारों ने अपने अधिकारियों की खूब गणेश परिक्रमा की और उपहार पहुंचाए। रेलवे क्षेत्र में भी अधिकारियों, चिकित्सकों ने खूब उपहार लिए। संवाद
पीडीडीयू नगर। दीपावली पर्व पर शनिवार को दिन में बाजार में भीड़ उमड़ी रही। इस दौरान लोगों ने लक्ष्मी पूजन की सामग्री, मिष्ठान, दीपक, मोमबत्ती, आतिशबाजी की जमकर खरीददारी की। त्योहार पर उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस ने नगर के सुभाष नगर चौराहा के समीप ही वाराणसी की तरफ से आने वाले वाहनों को रोक दिया। बावजूद इसके बाजार में खरीदारों की भीड़ से दो पहिया वाहनों का चलना भी मुश्किल रहा।
सुबह से ही बाजार में भीड़ जुटने लगी। नगर के एलबीएस कटरा, जीटी रोड, काली मंदिर के पीछे, गल्ला मंडी, धर्मशाला रोड, परमार कटरा, नई सट्टी, मछली मंडी के समीप फूल माला, पूजन सामग्री, लक्ष्मी गणेेश की मूर्तियां, मिट्टी के बर्तन, चूड़ा, लाई, खील बतासे, रेवड़ी आदि की दुकानें सजी रही। यहां खरीदारों की भीड़ जुटी रही। इसके साथ ही मिठाई की दुकानों पर मिठाई खरीदने के लिए अत्यधिक भीड़ रही। दिन भर दुकानों पर पैर रखने की जगह नहीं रही।
पीडीडीयू नगर। दीपावली के साथ ही लोक आस्था का महापर्व डाला छठ की तैयारी भी शुरू हो गई है। तालाबों में साफ सफाई के बाद युवाओं ने अर्घ्य देने के लिए घाटों की छेका। यही नहीं तालाबों की साफ सफाई का काम भी शुरू किया गया है।

लोका आस्था का महापर्व डाला छठ की शुरूआत 18 नवंबर को नहाय खाय के साथ होगी। 19 नवंबर को व्रती महिलाएं बखीर बनाएंगी और भोग लगाएंगी। वहीं तालाबों में घाट की पूजा कर दीपदान करेंगी। 20 नवंबर को व्रती महिलाएं और पुरुष तालाब, सरोवरों के तटों पर पहुंचकर अस्ताचल गामी सर्य को अर्घ्य देंगे। वहीं 21 नवंबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाएगा। अत्यंत शुद्धता पूर्वक मनाए जाने वाले इस कठिन व्रत को लेकर महिलाओं में उत्साह है और इसकी तैयारी दीपावली के साथ ही शुरू हो गई है।
रिपोर्ट और संपादन- कृष्ण मुरारी मिश्र
बाइट-6400
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