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मां सिद्धिदात्री का दर्शन और कन्याओं का पूजन कर मांगा आशीर्वाद
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पीडीडीयू नगर। शारदीय नवरात्र के महानवमी को मां के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा अर्चना की गई। बृहस्पतिवार को मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए सुबह से ही भीड़ जुुटी रही। वहीं घरों में कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराया गया। इसके साथ ही देवी भक्तों ने कन्याओं में मां दुर्गा का स्वरूप देखते हुए उनसे आशीर्वाद लिया। नवरात्र के अंतिम दिन होने से कई जगहों पर हवन पूजन के साथ पूर्णाहुति भी हुई।
नवरात्र का अंतिम दिन नवमी तिथि होती है। इस दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है। जो भक्तों को सभी सिद्धियां प्रदान करती हैं। मां के दर्शन के लिए बृहस्पतिवार को सुबह से ही नगर और जिले के विभिन्न देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ जुटी रही। वहीं महानवमी को कन्या पूजन का विशेेष महत्व होता है। व्रत धारी श्रद्धालुओं ने मां सिद्धिदात्री की पूजा के बाद कन्याओं का पूजन-अर्चन कर घर-परिवार, देश-समाज की खुशहाली के लिए आशीष मांगा। पं. धीरेंद्र मनीषी ने बताया कि शास्त्रों में कन्या पूजन का बहुत महत्व है। इसमें दो वर्ष से लेकर 11 वर्ष तक की कन्या पूजन का विधान है। दो वर्ष की कुमारी, तीन वर्ष की त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी, पांच वर्ष की रोहिणी, छह वर्ष की बालिका, सात वर्ष की चंडिका, आठ वर्ष की शाम्भवी, नौ वर्ष की दुर्गा और दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती है। उन्होंने बताया कि सभी शुभ कार्यों का फल प्राप्त करने के लिए कन्या पूजन किया जाता है। कुमारी पूजन से सम्मान, लक्ष्मी, विद्या और तेज प्राप्त होता है। इससे विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश भी होता है। महानवमी को नवरात्र का अंतिम दिन होने से कई पंडालों और मंदिरों में हवन कर व्रत की पूर्णाहुति की गई।
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नवरात्र का अंतिम दिन नवमी तिथि होती है। इस दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है। जो भक्तों को सभी सिद्धियां प्रदान करती हैं। मां के दर्शन के लिए बृहस्पतिवार को सुबह से ही नगर और जिले के विभिन्न देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ जुटी रही। वहीं महानवमी को कन्या पूजन का विशेेष महत्व होता है। व्रत धारी श्रद्धालुओं ने मां सिद्धिदात्री की पूजा के बाद कन्याओं का पूजन-अर्चन कर घर-परिवार, देश-समाज की खुशहाली के लिए आशीष मांगा। पं. धीरेंद्र मनीषी ने बताया कि शास्त्रों में कन्या पूजन का बहुत महत्व है। इसमें दो वर्ष से लेकर 11 वर्ष तक की कन्या पूजन का विधान है। दो वर्ष की कुमारी, तीन वर्ष की त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी, पांच वर्ष की रोहिणी, छह वर्ष की बालिका, सात वर्ष की चंडिका, आठ वर्ष की शाम्भवी, नौ वर्ष की दुर्गा और दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती है। उन्होंने बताया कि सभी शुभ कार्यों का फल प्राप्त करने के लिए कन्या पूजन किया जाता है। कुमारी पूजन से सम्मान, लक्ष्मी, विद्या और तेज प्राप्त होता है। इससे विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश भी होता है। महानवमी को नवरात्र का अंतिम दिन होने से कई पंडालों और मंदिरों में हवन कर व्रत की पूर्णाहुति की गई।
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