{"_id":"60e9ee4b8ebc3ec234709a70","slug":"angry-villagers-themselves-cleaned-the-canal-chandauli-news-vns5997389164","type":"story","status":"publish","title_hn":"आक्रोशित ग्रामीणों ने खुद कर दी नहर की सफाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आक्रोशित ग्रामीणों ने खुद कर दी नहर की सफाई
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सैयदराजा। बरहनी विकास खंड बरहनी के दुधारी पुल से धारूपुर तक की करीब तीन किलोमीटर तक छोटी नहर की सफाई न कराए जाने से नाराज किसानों व ग्रामीणों ने शनिवार को स्वयं निजी मजदूरों के साथ सफाई की। इस दौरान उन्होंने नहर में उग आए झाड़-झंखाड़ की सफाई की।
किसानों ने कहा कि नहर के झाड़-झंखाड़ से पट जाने के चलते उनके खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इससे वे धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। वहीं कई किसान धान की नर्सरी डालने के लिए नहर से पानी आने का इंतजार कर रहे हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि कई बार सिंचाई विभाग से नहर की साफ-सफाई कराने के लिए कहे जाने के बाद भी विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे किसानों का सब्र का बांध टूट गया है। शनिवार की सुबह मरूई गांव के प्रधान जितेंद्र सिंह, अभय प्रताप सिंह, अजय सिंह और अवधेश सिंह के नेतृत्व में दुधारी नहर से धारुपुर नहर तक लगभग तीन किलोमीटर तक 50 लेबर से अपने निजी खर्चे से साफ सफाई करवाई। साथ ही खुद भी श्रमदान किया। नहर की सफाई करा दिए जाने से खेतों तक पानी पहुंचने लगा है। इससे किसानों ने राहत की सांस ली है।
विज्ञापन
किसानों ने कहा कि नहर के झाड़-झंखाड़ से पट जाने के चलते उनके खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इससे वे धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। वहीं कई किसान धान की नर्सरी डालने के लिए नहर से पानी आने का इंतजार कर रहे हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि कई बार सिंचाई विभाग से नहर की साफ-सफाई कराने के लिए कहे जाने के बाद भी विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे किसानों का सब्र का बांध टूट गया है। शनिवार की सुबह मरूई गांव के प्रधान जितेंद्र सिंह, अभय प्रताप सिंह, अजय सिंह और अवधेश सिंह के नेतृत्व में दुधारी नहर से धारुपुर नहर तक लगभग तीन किलोमीटर तक 50 लेबर से अपने निजी खर्चे से साफ सफाई करवाई। साथ ही खुद भी श्रमदान किया। नहर की सफाई करा दिए जाने से खेतों तक पानी पहुंचने लगा है। इससे किसानों ने राहत की सांस ली है।
विज्ञापन