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मानवाधिकार आयोग की सख्ती के बाद बैंक ने लौटाए पैसे
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पीडीडीयू नगर। बैंक की लापरवाही से गायब हुए सात लाख रुपये मानवाधिकार आयोग की सख्ती के बाद बैंक ने वापस कर दिए। पुलिस की सुनवाई न होने पर पीड़ित ग्राहक ने राष्ट्रीय मानावधिकार आयोग में शिकायत की थी। मानवाधिकार आयोग ने मामला संज्ञान में लिया और सख्ती दिखाई। इस पर 10 माह बाद बैंक ने चार जुलाई को पैैसे वापस कर दिए।
नगर के मानसनगर निवासी महेन्द्र सिंह ने 31 अगस्त 2021 को बैंक ऑफ बड़ौदा नई बस्ती शाखा में सात लाख रुपये मूल्य का चेक जमा किया था। जब खाते में पैसे नहीं आए तो बैंक में जाकर पता किया। पता चला कि तीन सितंबर को उसी चेक से बिहार के मोहनियां से रुपये निकाले गए हैं। बैक मैनेजर की बात सुनकर महेंद्र सिंह के पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़ित ने पुलिस से गुहार लगाई लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद पीड़ित ने न्याय के लिए मानवाधिकार सीडब्लूए के चेयरमैन योगेन्द्र कुमार सिंह (योगी) से न्याय की गुहार लगाई। चेयरमैन ने पूरे मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग नई दिल्ली में भेजकर बैंक मैनेजर सहित अन्य कर्मियों के ऊपर कार्यवाई करने एवं पीड़ित के गबन हुए रुपये वापस कराने की मांग की। आयोग ने मामले को संज्ञना में लिया और13 जून 2022 को सुनवाई करते हुए मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ एक्सक्यूटिव ऑफिसर बैंक ऑफ बड़ौदा मुंबई महाराष्ट्र को निर्देश दिया कि पूरे मामले पर चार सप्ताह में उचित कार्रवाई करे और आयोग को उसकी रिपोर्ट दे। आयोग की सख्ती के बाद बैंक ने पीड़ित एकाउंट में रुपये वापस कर दिए ।
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नगर के मानसनगर निवासी महेन्द्र सिंह ने 31 अगस्त 2021 को बैंक ऑफ बड़ौदा नई बस्ती शाखा में सात लाख रुपये मूल्य का चेक जमा किया था। जब खाते में पैसे नहीं आए तो बैंक में जाकर पता किया। पता चला कि तीन सितंबर को उसी चेक से बिहार के मोहनियां से रुपये निकाले गए हैं। बैक मैनेजर की बात सुनकर महेंद्र सिंह के पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़ित ने पुलिस से गुहार लगाई लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद पीड़ित ने न्याय के लिए मानवाधिकार सीडब्लूए के चेयरमैन योगेन्द्र कुमार सिंह (योगी) से न्याय की गुहार लगाई। चेयरमैन ने पूरे मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग नई दिल्ली में भेजकर बैंक मैनेजर सहित अन्य कर्मियों के ऊपर कार्यवाई करने एवं पीड़ित के गबन हुए रुपये वापस कराने की मांग की। आयोग ने मामले को संज्ञना में लिया और13 जून 2022 को सुनवाई करते हुए मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ एक्सक्यूटिव ऑफिसर बैंक ऑफ बड़ौदा मुंबई महाराष्ट्र को निर्देश दिया कि पूरे मामले पर चार सप्ताह में उचित कार्रवाई करे और आयोग को उसकी रिपोर्ट दे। आयोग की सख्ती के बाद बैंक ने पीड़ित एकाउंट में रुपये वापस कर दिए ।
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