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पसमांदा मुसलमानों से हुआ भेदभाव
Chandauli
Updated Mon, 25 Feb 2013 05:30 AM IST
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बबुरी। आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जनता दल यू के सांसद अनवर अली अंसारी ने सियासी दलों के रहनुमाओं को चेताया कि अगर 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले पिछड़े, दलित मुसलमानों, दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं दिया गया और दस्तकार तबकों के हितों की रक्षा के लिए ठोस प्रयास नहीं किया गया, तो इस भेदभाव का खामियाजा दलों को भुगतना होगा।
सांसद श्री अंसारी ने बबुरी में आयोजित पसमांदा स्वाभिमान सम्मेलन में कहा कि पिछड़े एवं दलित मुसलमानों तथा दलित ईसाइयों के साथ धर्म के नाम पर भेदभाव किया जा रहा है। जबकि सच्चर कमेटी एवं रंगनाथ मिश्रा आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट में पसमांदा महाज के लोगों के साथ भेदभाव खत्म करने की सिफारिश की है। इसके बावजूद भी केंद्र सरकार ने महाज के मुसलमानों के लिए कुछ भी नहीं किया। श्री अली ने प्रदेश के सपा सरकार को कोसते हुए कहा कि इस सरकार के कार्यकाल में एक दर्जन से ज्यादा जगहों पर दंगे हुए। जिसमें सबसे ज्यादा मुसलमानों पर अत्याचार किए गए। उन्होंने कहा कि मुसलमानों के हितों की रक्षा नहीं हो रही है। साथ ही उन्होंने धर्म और राजनीति के घालमेल पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब सपा सुप्रीमो को समझ लेना चाहिए कि न तो अब जामा मजिस्द के इमाम बुखारी और न ही असद मदिनी के हाथों में वोट हैं। पसमांदा मुसलमान अब जाग चुके हैं। वोट हमारा, फतवा तुम्हारा नहीं चलेगा। वोट अब पिछड़े मुसलमानों के पास है।
इसलिए मुखिया अखिलेश यादव को चाहिए कि ये अन्य पिछड़े वर्गों को दो भागों में पिछड़े व अति पिछड़े वर्ग में बांट दें। यही काम केंद्र सरकार को भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संतों की राजनीति में बढ़ती दखलंदाजी कहीं से भी न्यायोचित नहीं है। इसके पूर्व सम्मेलन को महाज के उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष हाजी निसार अहमद, बिहार इकाई के अध्यक्ष प्रोफेसर ताजुद्दीन मंसूरी, बिहार महिला आयोग की सदस्य साफिया अख्तर अंसारी के अलावा डा. परवेज अंसारी, नायाब राइन रिंकू, अल्ताफ मंसूरी, ख्वाजा मैनुद्दीन, नसीर बनारसी, अब्बास अंसारी, सुल्तान, जाकिर मंसूरी, डा. जकारिया अंसारी, शेर अली, रुस्तम अली आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता मोहम्मद इलियाकत अंसारी एवं संचालन कयामुद्दीन अंसारी ने किया।
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सांसद श्री अंसारी ने बबुरी में आयोजित पसमांदा स्वाभिमान सम्मेलन में कहा कि पिछड़े एवं दलित मुसलमानों तथा दलित ईसाइयों के साथ धर्म के नाम पर भेदभाव किया जा रहा है। जबकि सच्चर कमेटी एवं रंगनाथ मिश्रा आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट में पसमांदा महाज के लोगों के साथ भेदभाव खत्म करने की सिफारिश की है। इसके बावजूद भी केंद्र सरकार ने महाज के मुसलमानों के लिए कुछ भी नहीं किया। श्री अली ने प्रदेश के सपा सरकार को कोसते हुए कहा कि इस सरकार के कार्यकाल में एक दर्जन से ज्यादा जगहों पर दंगे हुए। जिसमें सबसे ज्यादा मुसलमानों पर अत्याचार किए गए। उन्होंने कहा कि मुसलमानों के हितों की रक्षा नहीं हो रही है। साथ ही उन्होंने धर्म और राजनीति के घालमेल पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब सपा सुप्रीमो को समझ लेना चाहिए कि न तो अब जामा मजिस्द के इमाम बुखारी और न ही असद मदिनी के हाथों में वोट हैं। पसमांदा मुसलमान अब जाग चुके हैं। वोट हमारा, फतवा तुम्हारा नहीं चलेगा। वोट अब पिछड़े मुसलमानों के पास है।
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इसलिए मुखिया अखिलेश यादव को चाहिए कि ये अन्य पिछड़े वर्गों को दो भागों में पिछड़े व अति पिछड़े वर्ग में बांट दें। यही काम केंद्र सरकार को भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संतों की राजनीति में बढ़ती दखलंदाजी कहीं से भी न्यायोचित नहीं है। इसके पूर्व सम्मेलन को महाज के उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष हाजी निसार अहमद, बिहार इकाई के अध्यक्ष प्रोफेसर ताजुद्दीन मंसूरी, बिहार महिला आयोग की सदस्य साफिया अख्तर अंसारी के अलावा डा. परवेज अंसारी, नायाब राइन रिंकू, अल्ताफ मंसूरी, ख्वाजा मैनुद्दीन, नसीर बनारसी, अब्बास अंसारी, सुल्तान, जाकिर मंसूरी, डा. जकारिया अंसारी, शेर अली, रुस्तम अली आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता मोहम्मद इलियाकत अंसारी एवं संचालन कयामुद्दीन अंसारी ने किया।
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