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नहरों के घाटों की फिजा में बिखरी भक्ति की रंगत
Chandauli
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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शहाबगंज(संवाददाता)। डाला छठ पर्व के तीसरे दिन नदी, तालाबों तथा नहर के घाटों पर व्रती महिलाओं सहित पुरुष व बच्चों की भारी भीड़ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पहुंची। वहीं घाटों पर गीत संगीत का भी आयोजन किया गया। अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए व्रती महिलाएं गाजे बाजे के साथ अपने परिवारजनों के साथ घाटों पर पहुंचने के लिए निकले तो क्षेत्र की फिजा में भक्ति की लहरे बिखर गई।
व्रती महिलाएं छठ गीत... कांचे ही बांस के बंहगिया, बंहगी लचकत जाए..आदि गीत गाते चल रही थीं। व्रती महिलाएं कमर भर पानी में हाथ में फल फूल नारियल लेकर खड़ी रही। संध्या समय में जैसे ही सूर्य डूबने को हुआ अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देने के लिए होड़ लगी रही। क्षेत्र के इलिया, भुड़कुड़ा, खरौझा, कलानी, शहाबगंज, तियरा, मुरकौल, अतायस्तगंज, सेमरा, एकौना गांव स्थित नदी तालाबों व नहरों के किनारे स्थित घाटों पर भारी भीड़ जमा रही।
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व्रती महिलाएं छठ गीत... कांचे ही बांस के बंहगिया, बंहगी लचकत जाए..आदि गीत गाते चल रही थीं। व्रती महिलाएं कमर भर पानी में हाथ में फल फूल नारियल लेकर खड़ी रही। संध्या समय में जैसे ही सूर्य डूबने को हुआ अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देने के लिए होड़ लगी रही। क्षेत्र के इलिया, भुड़कुड़ा, खरौझा, कलानी, शहाबगंज, तियरा, मुरकौल, अतायस्तगंज, सेमरा, एकौना गांव स्थित नदी तालाबों व नहरों के किनारे स्थित घाटों पर भारी भीड़ जमा रही।
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