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चौबीस हजार हैंडपंप नहीं बुझा पा रहे प्यास
Chandauli
Updated Sun, 06 May 2012 12:00 PM IST
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चंदौली। गर्मी का पारा चढ़ते ही भूजल स्तर गिरना आरंभ हो गया है। जनपद ही नहीं समूचा पूर्वांचल इससे प्रभावित है। भूजल स्तर में गिरावट शहरी क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण इलाकों में इधर कई वर्षों से होता जा रहा है। इससे जनपद से सटे मिर्जापुर, सोनभद्र व बिहार प्रांत के कई गांवों में पेयजल की समस्या गंभीर होती जा रही है। वहीं कई गांवों में शुद्ध पेयजल की समस्या बनी हुई है।
गौरतलब है कि शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीणों क्षेत्रों में भी भूजल स्तर इधर कई वर्षों से लगातार गिरता जा रहा है। चंदौली सहित समीपवर्ती कई जनपद ऐसे है जहां पेयजल की शुद्धता की गंभीर समस्या है। वहीं सोनभद्र एवं मिर्जापुर जिले तथा बिहार राज्य से सटे इस जनपद के अनेक गांवों में पेयजल को शुद्ध किए बिना पानी पीना काफी मुश्किल है। कहने को तो चंदौली जिले में पेयजल के लिए 24 हजार 500 हैंडपंप लगाए गए हैं, जो लोगों की प्यास बुझाने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। शुद्ध पेयजल के लिए ही सतही जल पर्याप्त मात्रा में बचाया जा सकता है। बशर्ते उसका अनावश्यक जल दोहन बंद किया जाए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक तकरीबन 30 से 40 प्रतिशत क्षेत्र वर्तमान समय में पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। वास्तविकता की धरातल पर देखा जाए तो भूजल स्तर गिरने के पीछे उद्योग भी अहम् भूमिका निभा रहे हैं। सरकारी रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो एक बार में फैक्ट्रियों द्वारा जितने भूजल का दोहन किया जाता है, उतने में एक गांव को एक माह तक जलापूर्ति की जा सकती है। ऐेसे में हमें जल संरक्षण के बारे में गंभीरता से सोचना होगा तभी हम जीवन को सुरक्षित कर सकते हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि अनगिनत निजी और सरकारी हैंडपंप और निजी नलकूपों के माध्यम से धरती का सीना चीर कर निकाले जा रहे पानी को पुन: रिचार्ज करने की आवश्यकता लोग नहीं महसूस कर रहे हैं। जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ी को भुगतना पड़ सकता है।
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गौरतलब है कि शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीणों क्षेत्रों में भी भूजल स्तर इधर कई वर्षों से लगातार गिरता जा रहा है। चंदौली सहित समीपवर्ती कई जनपद ऐसे है जहां पेयजल की शुद्धता की गंभीर समस्या है। वहीं सोनभद्र एवं मिर्जापुर जिले तथा बिहार राज्य से सटे इस जनपद के अनेक गांवों में पेयजल को शुद्ध किए बिना पानी पीना काफी मुश्किल है। कहने को तो चंदौली जिले में पेयजल के लिए 24 हजार 500 हैंडपंप लगाए गए हैं, जो लोगों की प्यास बुझाने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। शुद्ध पेयजल के लिए ही सतही जल पर्याप्त मात्रा में बचाया जा सकता है। बशर्ते उसका अनावश्यक जल दोहन बंद किया जाए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक तकरीबन 30 से 40 प्रतिशत क्षेत्र वर्तमान समय में पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। वास्तविकता की धरातल पर देखा जाए तो भूजल स्तर गिरने के पीछे उद्योग भी अहम् भूमिका निभा रहे हैं। सरकारी रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो एक बार में फैक्ट्रियों द्वारा जितने भूजल का दोहन किया जाता है, उतने में एक गांव को एक माह तक जलापूर्ति की जा सकती है। ऐेसे में हमें जल संरक्षण के बारे में गंभीरता से सोचना होगा तभी हम जीवन को सुरक्षित कर सकते हैं।
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सबसे बड़ी बात यह है कि अनगिनत निजी और सरकारी हैंडपंप और निजी नलकूपों के माध्यम से धरती का सीना चीर कर निकाले जा रहे पानी को पुन: रिचार्ज करने की आवश्यकता लोग नहीं महसूस कर रहे हैं। जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ी को भुगतना पड़ सकता है।
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