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पेट्रो मूल्यों में बढ़ोतरी का असर किचन तक पहुंचा
Updated Mon, 17 Sep 2018 01:16 AM IST
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पीडीडीयू नगर। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी का असर रोजमर्रा के वस्तुओं पर भी दिखने लगा है। अनाज, दाल, चीनी, तेल आदि की कीमत एक माह में दस फीसदी तक बढ़ गई है। इसका असर रसोई पर दिख रहा है। इससे आमजन और गृहणियां परेशान हैं। महिलाओं का कहना है कि महंगाई के मुद्दे पर ही कांग्रेस की सरकार गई थी और एनडीए की सरकार बनी, लेकिन फिर से वहीं हालात बन गए हैं।
पिछले एक माह से लगातार पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम में बढोत्तरी होती जा रही है। पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अनाज और दालों पर पड़ रहा है। इसका सीधा असर किचन पर पड़ा है। महिलाओं की समझ में नहीं आ रहा है कि वे अचानक बढ़ी कीमतों का सामना कैसे करें। अनाज विक्रेता राहुल, संजय और राम कुमार ने बताया कि डीजल की कीमत में बढ़ोत्तरी की वजह से माल भाड़ा बढ़ने लगे हैं। इससे थोक भाव में अनाज के भाव बढ़े हैं और इसका असर फुटकर अनाज पर भी पड़ रहा है। जिस तरह से कीमतें बढ़ीं हैं आने वाले समय में कम होने के संभावना कम दिख रही है। दूसरी तरफ लगातार कीमत बढ़ने से महिलाएं परेशान हैं। नगर के मैनाताली निवासी लक्ष्मी सेठ कहती हैं कि धीमे धीमे ही सही कीमतों में बढ़ोत्तरी हो रही है। जो चावल एक माह पहले तीस रुपये प्रति किलो थी वर्तमान में 33 से 34 रुपये हो गई। अरहर दाल साठ से 64 रुपये, आटा 22 से 24 रुपये हो गई। रसोई गैस की कीमत भी एक माह में पचास रुपये तक बढ़ गया है। ऐसे में समझ में नहीं आ रहा है कि वे गृहस्थी कैसे संभाले। इसी तरह मोनी सिंह और निशा शर्मा का कहना है कि चुपके से महंगाई बढ़ रही है, इसलिए अधिक शोर नहीं हो रहा है, लेकिन यदि छह माह की स्थिति का मूल्यांकन करें तो पता चलेगा कि महंगाई किस कदर बढ़ी है। तेल, घी, रिफाइंड, चना, मटर सहित अन्य वस्तुओं की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है। संध्या विश्वकर्मा कहती हैं कि बढ़ती महंगाई पर आवाज भी नहीं उठ रही है। बात बात में आंदोलन करने वाले राजनीतिक दल मौन हैं वहीं सत्ताधारी दल भी चुप हैं।
पिछले एक माह से लगातार पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम में बढोत्तरी होती जा रही है। पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अनाज और दालों पर पड़ रहा है। इसका सीधा असर किचन पर पड़ा है। महिलाओं की समझ में नहीं आ रहा है कि वे अचानक बढ़ी कीमतों का सामना कैसे करें। अनाज विक्रेता राहुल, संजय और राम कुमार ने बताया कि डीजल की कीमत में बढ़ोत्तरी की वजह से माल भाड़ा बढ़ने लगे हैं। इससे थोक भाव में अनाज के भाव बढ़े हैं और इसका असर फुटकर अनाज पर भी पड़ रहा है। जिस तरह से कीमतें बढ़ीं हैं आने वाले समय में कम होने के संभावना कम दिख रही है। दूसरी तरफ लगातार कीमत बढ़ने से महिलाएं परेशान हैं। नगर के मैनाताली निवासी लक्ष्मी सेठ कहती हैं कि धीमे धीमे ही सही कीमतों में बढ़ोत्तरी हो रही है। जो चावल एक माह पहले तीस रुपये प्रति किलो थी वर्तमान में 33 से 34 रुपये हो गई। अरहर दाल साठ से 64 रुपये, आटा 22 से 24 रुपये हो गई। रसोई गैस की कीमत भी एक माह में पचास रुपये तक बढ़ गया है। ऐसे में समझ में नहीं आ रहा है कि वे गृहस्थी कैसे संभाले। इसी तरह मोनी सिंह और निशा शर्मा का कहना है कि चुपके से महंगाई बढ़ रही है, इसलिए अधिक शोर नहीं हो रहा है, लेकिन यदि छह माह की स्थिति का मूल्यांकन करें तो पता चलेगा कि महंगाई किस कदर बढ़ी है। तेल, घी, रिफाइंड, चना, मटर सहित अन्य वस्तुओं की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है। संध्या विश्वकर्मा कहती हैं कि बढ़ती महंगाई पर आवाज भी नहीं उठ रही है। बात बात में आंदोलन करने वाले राजनीतिक दल मौन हैं वहीं सत्ताधारी दल भी चुप हैं।
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