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नहर में पानी, समितियों पर बीज नहीं कैसे होगी खेती
Updated Sun, 03 Dec 2017 01:30 AM IST
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नहर
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मुगलसराय। धान की कटाई के बाद गेहूं की बुआई का सीजन शुरू हो गया है। बुआई के एक पखवारे के भीतर पानी आवश्यकता होती है। बावजूद इसके जनपद के सहकारी समितियों पर बीज नहीं है। वहीं अधिकतर नहरों में धूल उड़ रहा है। हालांकि अभी बुआई का शुरूआती दौर है। यदि यही स्थिति रही तो किसानों के सामने मुश्किल होगी।
जनपद में दो लाख 53 हजार हेक्टेयर में खेती होती है। खेतों की सिंचाई छोटी बड़ी 365 नहरों और 265 सरकारी नलकूप के सहारे होती है। जनपद में धान की कटाई लगभग समाप्त हो चुकी है। इसके साथ ही रबी की बुआई का दौर शुरू हो गया है। जनपद में 83 सहकारी समितियां हैं लेकिन साधन सहकारी समितियों पर खाद और बीज का अभाव बना हुआ है। रबी की बुआई का सबसे उत्तम समय 15 नवंबर से 15 दिसंबर माना जाता है। दिसंबर माह की शुरूआत हो चुकी है, लेकिन समितियों पर खाद ,बीज का अभाव होने से किसानों में आक्रोश है। जनपद के नरायनपुर बड़ी गंगा नहर, भूपौली, चंद्रप्रभा, कूड़ा रजवाहा, नेवाजगंज आदि में पानी नहीं है। अधिकतर नहरों में धूल उड़ रही है और सूखी नहरों में बच्चे खेल रहे हैं। शासन ने रबी की बुआई का लक्ष्य भी निर्धारित कर दिया है, लेकिन ऐसे में समस्याओं की वजह से रबी के उत्पादन पर असर पड़ेगा। नरवन के किसान रतन सिंह, हरिहर सिंह, संतोष राय, नियामताबाद के अखिलेश सिंह, कम्हरिया के महेन्द्र सिंह, इमिलिया के नंदकिशोर सिंह, बबुरी के आनंद सिंह आदि ने बताया कि समय पर संसाधन उपलब्ध हो तो किसान अच्छा उत्पादन कर लेंगे, लेकिन हर बार आंदोलनों के बाद शासन की नींद खुलती है। इस संबंध कें उपकृषि निदेशक आरके सिंह ने बताया कि समितियों पर खाद बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। इसी तरह नहरों के संचालन के लिए निर्देश दिए गए हैं।
जनपद में दो लाख 53 हजार हेक्टेयर में खेती होती है। खेतों की सिंचाई छोटी बड़ी 365 नहरों और 265 सरकारी नलकूप के सहारे होती है। जनपद में धान की कटाई लगभग समाप्त हो चुकी है। इसके साथ ही रबी की बुआई का दौर शुरू हो गया है। जनपद में 83 सहकारी समितियां हैं लेकिन साधन सहकारी समितियों पर खाद और बीज का अभाव बना हुआ है। रबी की बुआई का सबसे उत्तम समय 15 नवंबर से 15 दिसंबर माना जाता है। दिसंबर माह की शुरूआत हो चुकी है, लेकिन समितियों पर खाद ,बीज का अभाव होने से किसानों में आक्रोश है। जनपद के नरायनपुर बड़ी गंगा नहर, भूपौली, चंद्रप्रभा, कूड़ा रजवाहा, नेवाजगंज आदि में पानी नहीं है। अधिकतर नहरों में धूल उड़ रही है और सूखी नहरों में बच्चे खेल रहे हैं। शासन ने रबी की बुआई का लक्ष्य भी निर्धारित कर दिया है, लेकिन ऐसे में समस्याओं की वजह से रबी के उत्पादन पर असर पड़ेगा। नरवन के किसान रतन सिंह, हरिहर सिंह, संतोष राय, नियामताबाद के अखिलेश सिंह, कम्हरिया के महेन्द्र सिंह, इमिलिया के नंदकिशोर सिंह, बबुरी के आनंद सिंह आदि ने बताया कि समय पर संसाधन उपलब्ध हो तो किसान अच्छा उत्पादन कर लेंगे, लेकिन हर बार आंदोलनों के बाद शासन की नींद खुलती है। इस संबंध कें उपकृषि निदेशक आरके सिंह ने बताया कि समितियों पर खाद बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। इसी तरह नहरों के संचालन के लिए निर्देश दिए गए हैं।
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