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Chandauli News: 6.72 करोड़ से 56 आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलेंगे अपने भवन
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चंदौली। जिले में छह करोड़ 72 लाख रुपये से 56 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों का निर्माण कराया जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग ने ग्राम पंचायतों से मिले प्रस्ताव का सत्यापन कराने के बाद शासन को भेज दिया है। जिले में कुल 1873 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें 500 के पास ही अपने भवन हैं। बाकी 1373 केंद्र परिषदीय विद्यालयों, निजी भवनों और खुले में चल रहे हैं।
कही किराये के भवन में तो कही खुले आसमान के निजी चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को जल्द ही खुद का भवन मिलेगा। इसके लिए 56 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों के निर्माण के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव भेजा गया है। लगभग 12 लाख रुपये की लागत से एक आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण कराया जाएगा। ग्राम पंचायतों के प्रस्तावों का सत्यापन कराकर जिला कार्यक्रम अधिकारी ने शासन को भेज दिया है।
जिले में 1873 के करीब आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं जहां तीन से छह साल तक के ढाई लाख से अधिक बच्चों को पोषण और बेसिक शिक्षा दी जाती है। इनमें 500 केंद्र ही खुद के भवन में संचालित है जहां बच्चों के बैठने के लिए खुद की छत है, शौचालय पेयजल की सुविधा, बैठने के लिए टेबल सहित कई सुविधाएं है। जबकि कुछ केंद्र निजी भवनों में किराए के मकानों में चल रहे है जहां पर्याप्त सुविधाएं नहीं है।
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इलिया में खुले में चल रहे 17 आंगनबाड़ी केंद्र
शहाबगंज विकास खंड के 17 गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण ही नहीं हो पाया है। हाल इतना खराब है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्री अपने घर पर बच्चों को पढ़ाती हैं। जब कि स्थानीय कस्बा सहित कई गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र परिषदीय स्कूलों के भवन में चल रहे हैं तो कई ऐसे भी गांव हैं, जहां पेड़ के नीचे नौनिहालों को ककहरा सिखाया जा रहा है।
वर्जन
जिन गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों के पास भवन नहीं हैं, उन गांवों के सचिव और प्रधान की ओर से प्रस्ताव मिले थे। सत्यान कराने के बाद 56 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। - जया त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग
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कही किराये के भवन में तो कही खुले आसमान के निजी चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को जल्द ही खुद का भवन मिलेगा। इसके लिए 56 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों के निर्माण के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव भेजा गया है। लगभग 12 लाख रुपये की लागत से एक आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण कराया जाएगा। ग्राम पंचायतों के प्रस्तावों का सत्यापन कराकर जिला कार्यक्रम अधिकारी ने शासन को भेज दिया है।
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जिले में 1873 के करीब आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं जहां तीन से छह साल तक के ढाई लाख से अधिक बच्चों को पोषण और बेसिक शिक्षा दी जाती है। इनमें 500 केंद्र ही खुद के भवन में संचालित है जहां बच्चों के बैठने के लिए खुद की छत है, शौचालय पेयजल की सुविधा, बैठने के लिए टेबल सहित कई सुविधाएं है। जबकि कुछ केंद्र निजी भवनों में किराए के मकानों में चल रहे है जहां पर्याप्त सुविधाएं नहीं है।
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इलिया में खुले में चल रहे 17 आंगनबाड़ी केंद्र
शहाबगंज विकास खंड के 17 गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण ही नहीं हो पाया है। हाल इतना खराब है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्री अपने घर पर बच्चों को पढ़ाती हैं। जब कि स्थानीय कस्बा सहित कई गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र परिषदीय स्कूलों के भवन में चल रहे हैं तो कई ऐसे भी गांव हैं, जहां पेड़ के नीचे नौनिहालों को ककहरा सिखाया जा रहा है।
वर्जन
जिन गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों के पास भवन नहीं हैं, उन गांवों के सचिव और प्रधान की ओर से प्रस्ताव मिले थे। सत्यान कराने के बाद 56 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। - जया त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग