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विनम्र बनकर मनुष्य हासिल कर सकता है सबकुछ

Tue, 13 Nov 2018 01:16 AM IST
Updated Tue, 13 Nov 2018 01:16 AM IST
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विनम्र बनकर मनुष्य हासिल कर सकता है सबकुछ

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इलिया। विनम्रता भगवान को प्रिय है। मानव जीवन का मूल उद्देश्य विनम्र बनकर रहने में ही निहित है। मनुष्य विनम्र बनकर सब कुछ सहज रूप से हासिल कर सकता है। व्यक्ति के अंदर स्वयं को सबसे बड़ा बनने का भाव आ जाए तो छोटा कार्य भी असंभव हो जाता है।

उक्त बातें मानव प्रेम यज्ञ सेवा समिति, खरौझा की ओर से राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय सरैया, बसाढ़ी के प्रांगण में चल रहे श्रीराम कथा की तीसरी निशा पर कथावाचक नीरजानंद शास्त्री ने कहीं। कहा कि समुद्र अपने खारे पानी के कारण किसी को प्रिय नहीं होता लेकिन समुद्र का यही पानी जब बादल बनकर धरती पर बरसता है तो लोग उसे पाकर धन्य हो जाते हैं। कहा कि गाय का दूध पीने वाला छोटा बछड़ा बड़ा होने पर घास भूसा खाने लगता है। इसलिए छोटा बन कर रहना हर तरह से लाभकारी है। कहा कि भगवान राम प्रेम की प्रतिपूर्ति हैं। वहीं माता सीता भक्ति की जननी है। प्रेम और भक्ति का मिलन होने पर देवता भी प्रसन्नता व्यक्त करते हैं। कथा के दौरान विश्वनाथ दुबे, जयप्रकाश शर्मा, राजेश सिंह, अरुण श्रीवास्तव, विनोद द्विवेदी, बिहारी पांडेय, कन्हैया जयसवाल, पूनम सिंह, आनंद नारायण पांडेय, रामचंद्र जायसवाल उपस्थित रहे।
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