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बहुफसली खेती पर कृषि विभाग का जोर
Updated Wed, 04 Apr 2018 12:44 AM IST
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चंदौली। किसान की आय बढ़े इसके लिए कृषि विभाग बहुफसली खेती को बढ़ावा दे रहा है। विभाग की ओर से अप्रैल माह में की जाने वाली विभिन्न फसलों की खेती के तौर-तरीके और रख-रखाव खाका तैयार कर किसानों को इसके लिए जागरूक किया जा रहा है। किसान फल, सब्जी और फूलों की खेती कर मुनाफा अर्जित कर सकते हैं।
कृषि उप निदेशक आरके सिंह का कहना है कि किसान अप्रैल माह में चारे, फल, फूलों की खेती कर सकते हैं। बीज वाले बरसीम के खेत में हल्की सिंचाई करें अन्यथा वानस्पतिक वृद्घि अधिक होगी और बीज का उत्पादन घटेगा। सब्जियों में सूरन की बोआई पूरे माह और अदरक और हल्दी की बोआई माह के दूसरे पखवारे से शुरू की जा सकती है। प्रति हेक्टेयर अदरक की बोआई के लिए 15उसे 20 कुंतल और सूरन हेतु 75 कुंतल बीज की आवश्यकता होती है। बताया कि आम के फलों को गिरने से बचाने के लिए एल्फा नेपथलीन एसिटिक एसिड 4.5 एसएल के 20 मिली का प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। साथ ही आम, अमरूद, नींबू, अंगूर, बेर और पपीता की सिंचाई करें। फूूलों में जीनिया, पोर्चुलाका और कोचिया के पौधों की सिंचाई और निराई-गुड़ाई का उपयुक्त समय है। कहा कि किसान बहुफसली खेती अपनाकर अपनी आय को बढ़ा सकते हैं।
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कृषि उप निदेशक आरके सिंह का कहना है कि किसान अप्रैल माह में चारे, फल, फूलों की खेती कर सकते हैं। बीज वाले बरसीम के खेत में हल्की सिंचाई करें अन्यथा वानस्पतिक वृद्घि अधिक होगी और बीज का उत्पादन घटेगा। सब्जियों में सूरन की बोआई पूरे माह और अदरक और हल्दी की बोआई माह के दूसरे पखवारे से शुरू की जा सकती है। प्रति हेक्टेयर अदरक की बोआई के लिए 15उसे 20 कुंतल और सूरन हेतु 75 कुंतल बीज की आवश्यकता होती है। बताया कि आम के फलों को गिरने से बचाने के लिए एल्फा नेपथलीन एसिटिक एसिड 4.5 एसएल के 20 मिली का प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। साथ ही आम, अमरूद, नींबू, अंगूर, बेर और पपीता की सिंचाई करें। फूूलों में जीनिया, पोर्चुलाका और कोचिया के पौधों की सिंचाई और निराई-गुड़ाई का उपयुक्त समय है। कहा कि किसान बहुफसली खेती अपनाकर अपनी आय को बढ़ा सकते हैं।
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