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दस साल से ‘आसरा’ के इंतजार में लाभार्थी
Updated Mon, 27 Aug 2018 12:54 AM IST
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आसारा
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पीडीडीयू नगर। गरीबों व असहायों को, आठ पहले शुरू की गई ‘आसरा’ योजना के तहत मिलने वाला घर निर्माण पूरा न होने के कारण अभी तक नहीं मिल सका है। राज्य सरकार द्वारा यह योजना 2009-10 में शुरू की गई थी। इसके लिए चालिस परिवारों का चयन किया गया था। इसके लिए धन जारी कर दिया गया है इसके बाद भी लापरवाही के कारण निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया जा सका है। वहीं डूडा विभाग द्वारा लाभार्थियों को बार-बार कब्जा दिलाने की तिथि देकर टाल दिया जा रहा है।
राज्य सरकार की ओर से लगभग 10 वर्ष पूर्व आसरा आवास निर्माण की योजना आई थी। योजना में चंदौली में 24 व पीडीडी- चकिया मार्ग स्थित आलू मिल के समीप 48 आवास बनाए जा रहे हैं। मुगलसराय में बन रहे आवासों के लिए लाथार्थियों का चयन भी कर लिया गया है। चार विंगों में 12-12 आवास बनाए जा रहे हैं। यह हाल तब है जब निर्माण की अंतिम किश्त 54 लाख 45 हजार रुपये विभाग को मिल चुके हैं। इसके अलावा अलीनगर क्षेत्र में वर्षों से निवास कर रहे दलितों (मुसहरों) के लिए केंद्र सरकार की ओर से आईएचएसडीपी योजना के तहत 24 आवास बनवाए जा रहे हैं। लेकिन वह भी अधूरा है। जरूरतमंद झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं।
वहीं बस्ती के पांच लाभार्थियों को आवास बनाने को धन दिया जा रहा है। इन लाभार्थियों का नाम उक्त योजना में चयनित नहीं किया गया था। इन लाभार्थियों को अब तक केवल 50 हजार रुपये ही मिले हैं जबकि योजना प्रत्येक को ढ़ाई लाख रुपये दिए जाने की है। शेष धन न मिलने से ये आवास भी आधे- अधूरे पड़े हैं। वहीं बस्ती के पास बन रहे शौचालय भी धन के अभाव में नहीं बन पाए हैं। इससे बस्ती के लोग खुले में शौच जाने को विवश हैं। बस्ती के शंकर, भैरो, मंजू, जोखनी, अतवारी, लीलावती, लक्ष्मीना, आशा, पन्ना, रामजी का कहना है कि आवास की सूची में नाम शामिल किया तो लगा कि अब उन्हें भी छत नसीब हो जाएगी लेकिन अब मकान का सपना पूरा नहीं हो सका।
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कोट---
आवासों को बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कब्जे में दे दिए जाने की योजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस वर्ष सितंबर तक आवास लाभार्थियों के आवंटित कर दिए जाएंगे। पीके दास, परियोजना अधिकारी, डूडा।)
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दस साल से ‘आसरा’ के इंतजार में लाभार्थी
केंद्र व प्रदेश सरकार की आवासीय योजनाओं में हो रही देरी
धन जारी होने के बाद भी अधिकारी चल रहे कछुआ चाल
सचित्र
अमर उजाला ब्यूरो
पीडीडीयू नगर। गरीबों व असहायों को रहने के लिए घर दिए जाने की सरकारी योजनाओं की धरातल की सच्चाई कुछ और ही है। इसकी वास्तविकता जनपद में चल रही दो आवासीय योजनाएं बयां कर रही हैं। इन योजनाओं में एक तो ‘आसरा’ आवास योजना है और दूसरी दलितों (मुसहरों) के लिए केंद्र सरकार की आईएचएसडीपी आवास योजना है। दोनों योजनाओं के तहत बनाए जा रहे आवास वर्षों से निर्माण की प्रक्रिया में हैं। धन जारी होने के बाद भी विभागीय अधिकारियों की कछुआ चाल से इन आवासों के लाभार्थी कब्जे के इंतजार में हैं। वहीं डूडा विभाग द्वारा लाभार्थियों को बार-बार कब्जा दिलाने की तिथि देकर टाल दिया जा रहा है।
राज्य सरकार की ओर से लगभग 10 वर्ष पूर्व आसरा आवास निर्माण की योजना आई थी। योजना में चंदौली में 24 व पीडीडी- चकिया मार्ग स्थित आलू मिल के समीप 48 आवास बनाए जा रहे हैं। मुगलसराय में बन रहे आवासों के लिए लाभा र्थियों का चयन भी कर लिया गया है। चार विंगों में 12-12 आवास बनाए जा रहे हैं। यह हाल तब है जब निर्माण की अंतिम किश्त 54 लाख 45 हजार रुपये विभाग को मिल चुके हैं। इसके अलावा अलीनगर क्षेत्र में वर्षों से निवास कर रहे दलितों (मुसहरों) के लिए केंद्र सरकार की ओर से आईएचएसडीपी योजना के तहत 24 आवास बनवाए जा रहे हैं। लेकिन वह भी अधूरा है। जरूरतमंद झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं।
वहीं बस्ती के पांच लाभार्थियों को आवास बनाने को धन दिया जा रहा है। इन लाभार्थियों का नाम उक्त योजना में चयनित नहीं किया गया था। इन लाभार्थियों को अब तक केवल 50 हजार रुपये ही मिले हैं जबकि योजना प्रत्येक को ढाई लाख रुपये दिए जाने की है। शेष धन न मिलने से ये आवास भी आधे- अधूरे पड़े हैं। बस्ती के शंकर, भैरो, मंजू, जोखनी, अतवारी, लीलावती, लक्ष्मीना, आशा, पन्ना, रामजी का कहना है कि आवास की सूची में नाम शामिल किया तो लगा कि अब उन्हें भी छत नसीब हो जाएगी लेकिन अब मकान का सपना पूरा नहीं हो सका।
कोट---
आवासों को बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कब्जे में दे दिए जाने की योजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस वर्ष सितंबर तक आवास लाभार्थियों के आवंटित कर दिए जाएंगे। पीके दास, परियोजना अधिकारी, डूडा।
राज्य सरकार की ओर से लगभग 10 वर्ष पूर्व आसरा आवास निर्माण की योजना आई थी। योजना में चंदौली में 24 व पीडीडी- चकिया मार्ग स्थित आलू मिल के समीप 48 आवास बनाए जा रहे हैं। मुगलसराय में बन रहे आवासों के लिए लाथार्थियों का चयन भी कर लिया गया है। चार विंगों में 12-12 आवास बनाए जा रहे हैं। यह हाल तब है जब निर्माण की अंतिम किश्त 54 लाख 45 हजार रुपये विभाग को मिल चुके हैं। इसके अलावा अलीनगर क्षेत्र में वर्षों से निवास कर रहे दलितों (मुसहरों) के लिए केंद्र सरकार की ओर से आईएचएसडीपी योजना के तहत 24 आवास बनवाए जा रहे हैं। लेकिन वह भी अधूरा है। जरूरतमंद झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं।
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वहीं बस्ती के पांच लाभार्थियों को आवास बनाने को धन दिया जा रहा है। इन लाभार्थियों का नाम उक्त योजना में चयनित नहीं किया गया था। इन लाभार्थियों को अब तक केवल 50 हजार रुपये ही मिले हैं जबकि योजना प्रत्येक को ढ़ाई लाख रुपये दिए जाने की है। शेष धन न मिलने से ये आवास भी आधे- अधूरे पड़े हैं। वहीं बस्ती के पास बन रहे शौचालय भी धन के अभाव में नहीं बन पाए हैं। इससे बस्ती के लोग खुले में शौच जाने को विवश हैं। बस्ती के शंकर, भैरो, मंजू, जोखनी, अतवारी, लीलावती, लक्ष्मीना, आशा, पन्ना, रामजी का कहना है कि आवास की सूची में नाम शामिल किया तो लगा कि अब उन्हें भी छत नसीब हो जाएगी लेकिन अब मकान का सपना पूरा नहीं हो सका।
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आवासों को बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कब्जे में दे दिए जाने की योजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस वर्ष सितंबर तक आवास लाभार्थियों के आवंटित कर दिए जाएंगे। पीके दास, परियोजना अधिकारी, डूडा।)
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दस साल से ‘आसरा’ के इंतजार में लाभार्थी
केंद्र व प्रदेश सरकार की आवासीय योजनाओं में हो रही देरी
धन जारी होने के बाद भी अधिकारी चल रहे कछुआ चाल
सचित्र
अमर उजाला ब्यूरो
पीडीडीयू नगर। गरीबों व असहायों को रहने के लिए घर दिए जाने की सरकारी योजनाओं की धरातल की सच्चाई कुछ और ही है। इसकी वास्तविकता जनपद में चल रही दो आवासीय योजनाएं बयां कर रही हैं। इन योजनाओं में एक तो ‘आसरा’ आवास योजना है और दूसरी दलितों (मुसहरों) के लिए केंद्र सरकार की आईएचएसडीपी आवास योजना है। दोनों योजनाओं के तहत बनाए जा रहे आवास वर्षों से निर्माण की प्रक्रिया में हैं। धन जारी होने के बाद भी विभागीय अधिकारियों की कछुआ चाल से इन आवासों के लाभार्थी कब्जे के इंतजार में हैं। वहीं डूडा विभाग द्वारा लाभार्थियों को बार-बार कब्जा दिलाने की तिथि देकर टाल दिया जा रहा है।
राज्य सरकार की ओर से लगभग 10 वर्ष पूर्व आसरा आवास निर्माण की योजना आई थी। योजना में चंदौली में 24 व पीडीडी- चकिया मार्ग स्थित आलू मिल के समीप 48 आवास बनाए जा रहे हैं। मुगलसराय में बन रहे आवासों के लिए लाभा र्थियों का चयन भी कर लिया गया है। चार विंगों में 12-12 आवास बनाए जा रहे हैं। यह हाल तब है जब निर्माण की अंतिम किश्त 54 लाख 45 हजार रुपये विभाग को मिल चुके हैं। इसके अलावा अलीनगर क्षेत्र में वर्षों से निवास कर रहे दलितों (मुसहरों) के लिए केंद्र सरकार की ओर से आईएचएसडीपी योजना के तहत 24 आवास बनवाए जा रहे हैं। लेकिन वह भी अधूरा है। जरूरतमंद झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं।
वहीं बस्ती के पांच लाभार्थियों को आवास बनाने को धन दिया जा रहा है। इन लाभार्थियों का नाम उक्त योजना में चयनित नहीं किया गया था। इन लाभार्थियों को अब तक केवल 50 हजार रुपये ही मिले हैं जबकि योजना प्रत्येक को ढाई लाख रुपये दिए जाने की है। शेष धन न मिलने से ये आवास भी आधे- अधूरे पड़े हैं। बस्ती के शंकर, भैरो, मंजू, जोखनी, अतवारी, लीलावती, लक्ष्मीना, आशा, पन्ना, रामजी का कहना है कि आवास की सूची में नाम शामिल किया तो लगा कि अब उन्हें भी छत नसीब हो जाएगी लेकिन अब मकान का सपना पूरा नहीं हो सका।
कोट---
आवासों को बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कब्जे में दे दिए जाने की योजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस वर्ष सितंबर तक आवास लाभार्थियों के आवंटित कर दिए जाएंगे। पीके दास, परियोजना अधिकारी, डूडा।