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मौसम की बेरुखी से किसानों के छूट रहे पसीने

Mon, 09 Jul 2018 01:04 AM IST
Updated Mon, 09 Jul 2018 01:04 AM IST
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मौसम की बेरुखी से किसानों के छूट रहे पसीने

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मुगलसराय। धान की नर्सरी लगभग तैयार हो चुकी है। रोपाई का सीजन शुरू हो चुका है। हालात यह है कि अब तक एक भी अच्छी बारिश न होने से किसान परेशान हो गए हैं। यह तब है जब आषाढ़ का महीना भी बीतता जा रहा है और सावन की शुरूआत होने वाली है, ऐसे में मौसम का रुख देखकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
जिले में 1.23 लाख हेक्टेयर में खरीफ की फसल रोपी-बोई जाती है। इसमें 70 फीसदी खेती का हिस्सा तटबंधों, बांधों और बंधियों पर निर्भर है। मगर पिछले साल हुई कम बारिश का असर यह है कि अब तक सभी छोटे-बड़े बंधे सूख चुके हैं। पंप कैनालों के भरोसे गिनती की नहरें चल रही हैं। जिन इलाकों में गंगा पंप कैनालों से पानी छोड़ा जा रहा है वहां तो कुुछ किसान जिनकी नर्सरी तैयार हो गई है वे रोपाई शुरू कर दिए हैं मगर जहां बंधों के भरोसे नहरें चलती हैं वहां के किसानों के सामने रोपाई की बड़ा संकट खड़ा हो गया है। नौगढ़ क्षेत्र सहित चकिया, इलिया, शहाबगंज, महुजी कंदवा के इलाकों में पानी की समस्या से किसान चिंतित होने लगे हैं।
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बीएचयू के मौसम विज्ञानी प्रो एसएन पांडेय के अनुसार मानसून के हिमालयन क्षेत्र में खिसक जाने से बारिश में देर हो रही है लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश मेें अब जल्द बारिश होगी। बंगाल की खाड़ी में मानसून बन चुका है। सोमवार को भारी बारिश होने की संभावना है।
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चकिया। धान के कटोरे के दक्षिणी हिस्से में मानसून सत्र के पहले हफ्ते में मात्र 20 मिलीमीटर बरसात ही दर्ज की गई है। इसके चलते इस मौसम में भी खेतों में धूल उड़ रही है। बरसात न होने से धान की रोपाई में देरी होने के आसार पैदा हो गए हैं। जिससे उत्पादन कम हो सकता है। फिलहाल अभी नदी के किनारे के गांवों में धान की रोपाई शुरू हो पाई है।
धान के कटोरे के दक्षिणी हिस्से की सिंचाई के प्रमुख आधार स्तंभ बांध तथा बंधिया पूरी तरह से सूखे की स्थिति में है। जिसके चलते धान की नर्सरी के लिए भी पानी नहीं मिल सका। जून माह के प्रथम सप्ताह में डाली गयी धान की नर्सरी लगभग तैयार हो चुकी है लेकिन मानसून की बेरुखी के चलते खेतों में पानी नहीं है। तेज धूप के कारण धान की नर्सरी भी झुलस रही है। वर्तमान मानसून सत्र के आरम्भ होने के बाद से अब तक सिर्फ 20 मिलीमीटर बरसात ही हुई है। किसान बच्चन सिंह, हरिकीर्तन सिंह, मदन पांडेय, विजय त्रिपाठी, रमाशंकर पटेल, भरत सिंह पटेल, श्यामलाल मौर्या, भगवान सिंह का कहना है बारिश नहीं होने से खेती को लेकर चिंता होने लगी है।



नहरों में पानी नहीं होने से सिंचाई की दिक्कत
मुगलसराय । किसानों को सिंचाई की सुविधा प्रदान करने को जनपद में नहरों का जाल बिछा है। सरकार की ओर से कुल 208 नहरें सिंचाई के लिए हैं। बावजूद इसके खेती के समय नहरों में पानी नहीं होने से सिंचाई के लिए समस्या उत्पन्न हो गई है।
एक समय था जब जिले के खेतों में धूल उड़ा करती थी। फिर सरकार ने सिंचाई के लिए कई नहरों का निर्माण करा दिया। इससे किसानों को खेती के लिए भरपूर पानी मिलने लगा। सिंचाई व्यवस्था सुधारने को जनपद में चार बंधे व दो बीयर बनवाए गए। इनमें चंद्रप्रभा, मूसाखांड, नौगढ़ व भैसोढ़ा बांध और लतीफशाह व मुजफ्फरपुर बीयर शामिल हैं। भैसोढ़ा बंधे से पहाड़ी इलाकों में पेयजल की व्यवस्था की जाती है जबकि अन्य सिंचाई के काम आते हैं। दोनों बीयरों से नहरें निकली हैं। इनसे खेतों की सिंचाई की जाती है। विड़बना यह कि बंधों में पानी न होने से अधिकांश नहरों में अभी तक पानी पहुंचा ही नहीं है। नरायनपुर पंप कैनाल से जुड़ी नहरों में ही पानी दिख रहा है। इन नहरों में संपन्न किसान तो पंप लगाकर पानी का उपयोग कर ले रहे हैं जबकि मंझोले व छोटे किसानों के सामने समस्या उत्पन्न हो गई।

कम बरसात समस्या का कारण बनी है। इससे बंधियों में पानी का अभाव हो गया है। रबी की फसल के समय बंधियों से प्रचुर मात्रा में पानी दिया गया था। समय से बरसात न होने से पानी की कमी बनी है। बंधियों में पानी एकत्र होते ही नहरों को पूरी क्षमता से चलाया जाएगा। जेपी वर्मा, अधिशासी अभियंता, चंद्रप्रभा प्रखंड।

मुगलसराय। आषाढ़ माह में चिलचिलाती धूप से जनजीवन बेहाल है। लगभग एक सप्ताह से आसमान से पानी के बादल गायब हो गये हैं। सुबह से लेकर शाम तक तीखी धूप हो रही है। पुरवा हवा के भी बंद होने से लोगों को गर्मी और उमस से जीना मुहाल हो गया है। रविवार को भी मौसम काफी गरम रहा।

रविवार को अधिकतम तापमान 38 और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री दर्ज किया गया। लेकिन उमस और तपिश ने 40 डिग्री के पार तापमान का अहसास हो रहा है। एक सप्ताह पहले बारिश शुरू हुई तो लोगों को लगा कि अब उमस भरी गर्मी से छुटकारा मिल जाएगा पर मौसम में बदलाव ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। आसमान पर छाए बादल गायब हो गए और एकबार फिर गर्मी ने लोगों को बेहाल करना आरंभ कर दिया। उमस व गर्मी से न केवल इंसान ही नही बल्कि पशु- पक्षी भी बेहाल हो गए हैं। सड़कों पर पूरे दिन सन्नाटा छाया रह रहा है। बीएचयू के मौसम विज्ञानी प्रो एसएन पांडेय का कहना है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून बन चुका है जल्द ही अच्छी बारिश होने के आसार हैं।
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