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किसानों को नहीं मना पाए अधिकारी
Updated Wed, 18 Apr 2018 12:44 AM IST
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चंदौली। रेल फ्रेट कारीडोर योजना का काम रोकने वाले किसानों को मनाने के लिए सदर एसडीएम और रेलवे के अधिकारी मंगलवार को दल-बल के साथ छीतों गांव पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से अनुरोध किया कि काम होने दें बदले में उनकी समस्याओं को जिलाधिकारी सहित रेलवे के उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। गांव में किसानों की चौपाल लगाकर समस्या सुनी जाएगी और भूमिहीन किसानों को तत्काल ग्राम सभा की जमीन पट्टा की जाएगी। लेकिन किसान परिवार के एक सदस्य को नौकरी और वर्तमान सर्किल रेट से चार गुना अधिक मुआवजा देने की अपनी मांग पर अड़े रहे। तीन घंटे तक किसानों और अधिकारियों के बीच चली वार्ता बेनजीता रही।
रेल फ्रेट कारीडोर योजना से प्रभावित छीतों गांव कि किसानों ने गांव के पास कार्य रोक दिया है। इसकी जानकारी मिलने के बाद रेल फ्रेट कारीडोर से जुड़े अधिकारी, सदर एसडीएम विकास कुमार सिंह और सीओ प्रदीप सिंह चंदेल पुलिस और पीएसी बल के साथ मौके पर पहुंचे। बड़ी संख्या में पुलिस बल को देख किसान सकते में आ गए। अधिकारियों ने किसानों को समझाया कि काम न रोकें। तीन दिन के भीतर गांव में चौपाल लगाई जाएगी। भूमिहीन किसानों को जमीन दी जाएगी। एसडीएम ने यह भी कहा कि लेखपाल और अमीनों की टीम लगाकर किसानों की जमीन चिन्हित कराई जाएगी। लेकिन किसान नहीं माने और तर्क दिया कि प्रशासनिक और रेलवे के अधिकारियों ने उचित मुआवजा और नौकरी का आश्वासन देकर 2011 में किसानों की जमीन अधिग्रहित कर ली। अब किसान किसी भी झांसे में नहीं आएंगे। लिखित आश्वासन मिलने पर ही काम होने दिया जाएगा।
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रेल फ्रेट कारीडोर योजना से प्रभावित छीतों गांव कि किसानों ने गांव के पास कार्य रोक दिया है। इसकी जानकारी मिलने के बाद रेल फ्रेट कारीडोर से जुड़े अधिकारी, सदर एसडीएम विकास कुमार सिंह और सीओ प्रदीप सिंह चंदेल पुलिस और पीएसी बल के साथ मौके पर पहुंचे। बड़ी संख्या में पुलिस बल को देख किसान सकते में आ गए। अधिकारियों ने किसानों को समझाया कि काम न रोकें। तीन दिन के भीतर गांव में चौपाल लगाई जाएगी। भूमिहीन किसानों को जमीन दी जाएगी। एसडीएम ने यह भी कहा कि लेखपाल और अमीनों की टीम लगाकर किसानों की जमीन चिन्हित कराई जाएगी। लेकिन किसान नहीं माने और तर्क दिया कि प्रशासनिक और रेलवे के अधिकारियों ने उचित मुआवजा और नौकरी का आश्वासन देकर 2011 में किसानों की जमीन अधिग्रहित कर ली। अब किसान किसी भी झांसे में नहीं आएंगे। लिखित आश्वासन मिलने पर ही काम होने दिया जाएगा।
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