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बेसिक कार्यालय पर उमड़ा शिक्षामित्रों का हुजूम
Updated Sun, 30 Jul 2017 01:15 AM IST
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शिक्षा मित्र का प्रदर्शन
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चंदौली। समायोजन रद्द होने के बाद शिक्षामित्रों का आंदोलन धीरे-धीरे तीव्र होता जा रहा है। नौकरी खो चुके शिक्षामित्रों ने शनिवार को एक बार पुन: बीएसए कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान खासकर महिला शिक्षामित्रों की संख्या ज्यादा रही नाराज शिक्षामित्रों सरकार से 17 वर्ष के अनुभव को ध्यान में रखकर शिक्षामित्रों के हित में उचित कदम उठाने की मांग की। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन को इसी तरह जारी रखने का ऐलान किया। बीएसए कार्यालय गेट पर शिक्षामित्रों का जमावड़ा होने की वजह से कर्मचारियों को दूसरे गेट का ताला तोड़कर निकलना पड़ा।
शिक्षामित्र सुबह ही बीएसए कार्यालय पर एकत्रित होने लगे। भीड़ बढ़ती देख बेसिक शिक्षा विभाग के बाहर पुलिस व पीएसी के जवानों के अलावा दमकल विभाग की एक गाड़ी को तैनात कर दिया गया। दस बजते-बजते महिला-पुरुष शिक्षामित्र बीएसए कार्यालय के मुख्य गेट के सामने धरने पर बैठ गए। भीड़ इतनी जबरदस्त थी कि पूरा कार्यालय परिसर शिक्षामित्रों से भर गया। शिक्षामित्रों के धरना-प्रदर्शन के कारण बीएसए कार्यालय का कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। न तो कार्यालय में कोई जा पा रहा है था और ना ही अंदर मौजूद कर्मचारी ही बाहर निकल पा रहे थे। शाम तक शिक्षामित्रों के कार्यालय पर डंटे होने की वजह से कर्मचारियों ने कार्यालय के दूसरे गेट पर लगे ताले को तुड़वाया। इसके बाद कर्मचारी कार्यालय से बाहर निकल सके। वहीं जब तक शिक्षामित्र धरने पर बैठे रहे, वहां मौजूद सुरक्षा बल शिक्षामित्रों के इर्द-गिर्द पूरी मुस्तैदी से तैनात रहे। खंड शिक्षा अधिकारी केके सिंह केधरनास्थल पर पहुंचने पर शिक्षामित्रों ने मांग पत्र से सम्बन्धित ज्ञापन उन्हें सौंपा।
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राजनीति के शिकार हुए शिक्षामित्र
चंदौली(ब्यूरो)। महिला शिक्षामित्र सोनी रानी ने कहा कि पिछली सरकार ने क्या किया? इससे शिक्षामित्रों को कोई लेना-देना नहीं। वर्तमान में शिक्षक पद समायोजित शिक्षामित्र राजनीति के शिकार बनाए जा रहे हैं। नौकरी खोने के बाद अब हम सभी अपने परिवार व बच्चों को लेकर कहां जाएं। अगर सरकार चाहती है कि शिक्षामित्र भीख मांगें तो वह भी करने से हम पीछे नहीं रहेंगे। जिलाध्यक्ष इंद्रजीत उर्फ अजीत ने कहा कि शिक्षामित्रों के हितों को देश के प्रधानमंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री को शिक्षामित्रों की मदद करनी चाहिए। सरकार इतने गंभीर मसले पर चुप है, जिससे शिक्षामित्रों का धैर्य धीरे-धीरे टूटता जा रहा है। कई शिक्षामित्र आत्महत्या कर चुके हैं। यदि सरकार हमें नौकरी नहीं दे सकती तो हमें मृत्यु दे देे। इस दौरान विजय श्याम तिवारी, जेपी मौर्या, जेपी पांडेय, संतोष सिंह, सुमन, सुषमा, प्रीति, श्याम दुलारी, मनोरमा आदि उपस्थित रहे।
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