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नहाय खाय के साथ चार दिवसीय डाला छठ की शुरूआत आज से, तैयारी पूरी

Varanasi Bureau Updated Sun, 11 Nov 2018 12:42 AM IST
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पीडीडीयू नगर। सूर्योपासना का महापर्व डाला छठ की शुरूआत रविवार से नहाय खाय के साथ होगी। नगर सहित पूरे जिले में शनिवार को इसकी तैयारी शुरू हो गई। बाजार में लोगों ने लौकी, गेहूं, चावल आदि की खरीददारी की। साथ ही भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने के लिए बाजार में सूप, दउरी आदि की खरीददारी हुई। तालाबों पर भी जगह-जगह साफ -सफाई की गई वहीं तालाबों के घाटों पर लोगों ने अपना नाम लिखकर जगह पक्की की।
लोक आस्था का महापर्व डाला छठ बिहार से होते हुए आज पूर्वांचल का महापर्व बन गया है। इसकी तैयारियां दीपावली से ही शुरू हा जाती है। इस वर्ष रविवार से चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरूआत हो रही है। महिलाएं अधिक संख्या में इस व्रत को करती हैं लेकिन पुरुष भी इस व्रत को करने में पीछे नहीं रहते हैं। रविवार को व्रती स्नान ध्यान के बाद व्रत का संकल्प लेंगी। इसके बाद चावल, चने की दाल, लौकी की सब्जी तैयार कर उसका भोग लगाएंगे। इसके बाद पूरे परिवार के लोग प्रसाद स्वरूप इसे ग्रहण करेंगे। सोमवार को दिन भर निराजल रहने के बाद शाम के वक्त सरोवर तटों पहुंच कर घाट का पूजन करेंगे और दीप-दान करेंगे। इसके बाद घर पहुंच कर दूध, गुड़ और चावल की बखीर तैयार कर चंद्रोदय के पूर्व छठ मइया की पूजा अर्चना कर बखीर का भोग लगाया जाएगा और व्रती जल ग्रहण करेंगी। इसके बाद 36 घंटे के लिए निराजल व्रत की शुरूआत होगी। मंगलवार को व्रती पूरे परिवार के साथ शाम के वक्त सरोवर तटों पर पहुुंचेंगे। यहां पूजन अर्चन के बाद अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद बुधवार की सुबह उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर इस व्रत का समापन किया जाएगा। इस कठिन व्रत की तैयारी के लिए शनिवार को ही बाजार पूरी तरह सज गया।

अपने ही पुत्र को श्राप दिया था श्रीकृष्ण ने
पीडीडीयू नगर। भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण और छठ पर्व का सीधा संबंध है। भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र शांब के चर्म रोग होने और सूर्योपासना से उसके ठीक होने के बाद से ही इस पर्व की शुरूआत हुई। पंडित कुंज बिहारी मिश्र के अनुसार छठ पर्व की कथा में आता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र शांब को अपने यौवन पर अहंकार हो गया था। एक दिन वह स्त्रियों के सामने ही नग्न होकर जल क्रीड़ा करने लगा। यह देख श्रीकृष्ण क्रोधित हो गए और अपने ही पुत्र को चर्म रोग होने का शाप दे दिया। बाद में उसके माफी मांगने पर श्रीकृष्ण ने शाकद्वीप से 72 ब्राह्मणों को बुलाया। ब्राह्मणों ने 12 वर्ष तक शांब से सूर्य को अर्घ्य दिलाया। इससे वह ठीक हुआ। इसके बाद से व्रत जग में प्रचलित हो गया


पिछले वर्ष से दस प्रतिशत बढ़ी सूप-दउरी की कीमत
छठ पर्व के लिए सजे बाजार, खरीदारी शुरू
सचित्र-04
पीडीडीयू नगर। लोक आस्था का महापर्व डाला छठ की शुरूआत रविवार से होगी। पवरऱ़् के पूर्व ही बाजार पूरी तरह सज गए हैं। बाजार में सर्वाधिक खरीदारी सूप, दउरी की हुई। पिछले वर्ष के मुकाबले सूप, दउरी की कीमतों में दस से पंद्रह प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
सूर्योपासना का महापर्व कार्तिक छठ में सूर्य को अर्घ्य देने का सर्वाधिक महत्व है। व्रती बांस के सूप, दउरी के साथ पीतल, कांसा के सूप और दउरी में फल और पकवान आदि रख कर दूध और जल से अस्ताचलगामी और उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसी वजह से छठ के पूर्व सूप दउरी की खूब खरीद फरोख्त होती है। छठ के मद्देनजर बाजार में गुरुवार से ही सूप, दउरी, नए बर्तन सज गए हैं। नगर में जीटी रोड पर परमार कटरा के सामने, नई सट्टी, गल्ला मंडी में छोटे बडे सूप, दउरी के ढेर लगाए गए हैं। यहां दउरी सौ से दो सौ रुपये तक और सूप अस्सी से डेढ़ सौ रुपये तक की कीमत में मिल रही है। यह पिछले वर्ष के मुकाबले दस से पंद्रह प्रतिशत अधिक है। दउरी बेच रहे अशोक कुमार ने बताया कि छठ के मौके पर रोजाना तकरीबन तीन सौ दउरी और सूप बिक रहे हैं।


02. छठ पूजा के लिए तैयार हुआ तालाब
अमर उजाला ब्यूरो
सचित्र-03
सैयदराजा। डाला छठ के मद्देनजर नगर पंचायत कार्यालय के समीप स्थित पोखरे पर अर्घ्य देने के लिए उमड़ने वाली व्रतियों की भीड़ को देखते हुए नगर पंचायत की ओर से तैयारी पूरी कर ली गई है। शनिवार को नगर पंचायत की ओर से अध्यक्ष वीरेन्द्र जायसवाल की देख-रेख में तालाब की साफ-सफाई की गई और सीढ़ियों को रंग रोगन कराया गया।
नगर पंचायत अध्यक्ष वीरेन्द्र जायसवाल ने बताया कि पोखरे पर स्थित सभी स्ट्रीट लाइट व हाईमास्ट लाइट को भी ठीक करा दिया गया है। अर्ध्य के दौरान आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए दो गोताखोरों को भी बुलाया गया है। सभासद महेंद्र राय ने बताया कि नगर में पोखरे पर छठ पूजा के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है।

इनसेट-
बांस अथवा तांबे के पात्रों से देना चाहिए अर्घ्य
सैयदराजा। छठ पूजा पर सूर्योपासना के दौरान अर्घ्य की विधि समझाते हुए पंडित बलदाऊ तिवारी ने बताया कि सूर्य को प्लास्टिक, चांदी, शीशा के पात्रों से अर्घ्य नहीं देना चाहिए। व्रतियों को तांबे के सूप अथवा बांस से बने सूप दउरी में फल, पकवान आदि सजा कर अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य के समय की जानकारी देते हुए बताया कि 13 नवंबर को शाम 5:25 बजे अस्ताचलगामी सूर्य को और 14 नवंबर सुबह 6.35 पर उदयाचल सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।



चकिया। छठ पूजा के त्योहार को देखते हुए नगर के युवकों की स्वयंसेवी संस्थाओं एवं नगर पंचायत की ओर से पूर्व काशी नरेश की धरोहर के रूप में विद्यमान मां काली के पोखरे पर सफाई अभियान चलाया गया।
नगर के युवकों की स्वयंसेवी संस्था युगांधर सेवा समिति तथा मां काली छठ पूजा समिति के युवकों ने छठ पूजा को देखते हुए शनिवार को पोखरे में पड़े सेवार तथा गंदगी को छानकर बाहर निकाला। स्वयंसेवी संस्थाओं के विकास मद्धेशिया, सरदार राजकुमार सिंह, विजय विश्वकर्मा, कैलाश प्रसाद जायसवाल, सुरज मोदनवाल, अजय मिश्रा, सकपाल राणा, लोहा चौहान, दरोगा चौहान, अशोक गुप्ता, अखिलेश चौहान, दीपक चौहान, रवि चौहान, प्रकाश सोनकर, सरोज प्रजापति, सचिन मद्धेशिया, लाली चौरसिया, सुरेश प्रजापति, लल्ला चौहान, विजय यादव सक्रिय रहे। नगर पंचायत की ओर से भी मां काली मंदिर परिसर की साफ-सफाई की गई।

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