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देर से बारिश और नहरों में पानी न होने से पिछड़ी धान की रोपाई
Updated Fri, 03 Aug 2018 01:16 AM IST
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चंदौली। मानसून और बारिश की देरी के चलते जिले में धान की रोपाई पिछड़ गई है। इससे किसान तो चिंतित हैं ही कृषि विभाग भी चिंतित है कि समय से बारिश न होने और नहरों में पानी उपलब्ध न होने से रोपाई का काम पिछड़ गया है। अब तक तकरीबन 95 फीसदी रोपाई का काम हो जाना चाहिए था लेकिन जुलाई बीत गई और अगस्त आ गया और अभी तक सिर्फ 60-65 फीसदी ही धान की रोपे जा सके हैं। इससे फसल की पैदावार पर भी असर पड़ेगा।
कृषि विभाग के अनुसार जिले में करीब 1.16 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया है। कभी सूखा तो कभी भारी बारिश की मार के चलते किसान परेशान हैं। समितियों से खाद गायब है और धान की बुआई का मध्य सीजन चल रहा है। वर्ष 2018-19 के लिए कृषि विभाग ने जनपद में लगभग एक लाख 16 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती करने और लगभग साढ़े तीन लाख एमटी धान का उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। लेकिन पहले नहरों से पानी गायब होने के चलते धान उत्पाद के प्रमुख क्षेत्र बरहनी और शहाबगंज और सकलडीहा ब्लाकों में धान की रोपाई प्रभावित हुई। बारिश के चलते धान की नर्सरी तैयार होने के बाद भी किसानों के खेत खाली पड़े हैं। अब इधर बीच बारिश के चलते राहत मिली है और रोपाई के काम में तेजी आ गई है। किसान रतन सिंह, पंकज सिंह, शिवाजी सिंह, दुखरन राय, इंद्रदेव सिंह, दीनानाथ श्रीवास्तव, शेषनाथ यादव ने बताया कि बारिश के चलते मजदूर खेतों में नहीं जा रहे हैं। इससे उनकी खेती पिछड़ गई है। आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग द्वारा समय से नहरों में पानी उपलब्ध करा दिया गया होता तो किसानों को धान रोपने में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के पूर्व डायरेक्टर और कृषि विज्ञानी प्रो आरपी सिंह का कहना है कि धान की रोपाई पिछड़ जाने से उसमें विकास कम होता है। इससे प्रति हेक्टेयर दो से तीन कुंतल धान की पैदावार कम होती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
कोट....
सिंचाई विभाग की लापरवाही के चलते किसानों की धान की खेती पिछड़ गई है। अब तक 95 फीसदी रोपाई का काम पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन अभी 60-65 फीसदी ही रोपाई हो सकी है। अब इधर मौसम धान रोपाई के लिए अनुकूल है और बारिश के चलते खेतों में भरपूर पानी उपलब्ध है।
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राजीव कुमार भारती, कृषि अधिकारी।
कृषि विभाग के अनुसार जिले में करीब 1.16 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया है। कभी सूखा तो कभी भारी बारिश की मार के चलते किसान परेशान हैं। समितियों से खाद गायब है और धान की बुआई का मध्य सीजन चल रहा है। वर्ष 2018-19 के लिए कृषि विभाग ने जनपद में लगभग एक लाख 16 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती करने और लगभग साढ़े तीन लाख एमटी धान का उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। लेकिन पहले नहरों से पानी गायब होने के चलते धान उत्पाद के प्रमुख क्षेत्र बरहनी और शहाबगंज और सकलडीहा ब्लाकों में धान की रोपाई प्रभावित हुई। बारिश के चलते धान की नर्सरी तैयार होने के बाद भी किसानों के खेत खाली पड़े हैं। अब इधर बीच बारिश के चलते राहत मिली है और रोपाई के काम में तेजी आ गई है। किसान रतन सिंह, पंकज सिंह, शिवाजी सिंह, दुखरन राय, इंद्रदेव सिंह, दीनानाथ श्रीवास्तव, शेषनाथ यादव ने बताया कि बारिश के चलते मजदूर खेतों में नहीं जा रहे हैं। इससे उनकी खेती पिछड़ गई है। आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग द्वारा समय से नहरों में पानी उपलब्ध करा दिया गया होता तो किसानों को धान रोपने में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के पूर्व डायरेक्टर और कृषि विज्ञानी प्रो आरपी सिंह का कहना है कि धान की रोपाई पिछड़ जाने से उसमें विकास कम होता है। इससे प्रति हेक्टेयर दो से तीन कुंतल धान की पैदावार कम होती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
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सिंचाई विभाग की लापरवाही के चलते किसानों की धान की खेती पिछड़ गई है। अब तक 95 फीसदी रोपाई का काम पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन अभी 60-65 फीसदी ही रोपाई हो सकी है। अब इधर मौसम धान रोपाई के लिए अनुकूल है और बारिश के चलते खेतों में भरपूर पानी उपलब्ध है।
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राजीव कुमार भारती, कृषि अधिकारी।