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धानापुर में तहसील की मांग ने पकड़ा जोर
Updated Mon, 17 Jul 2017 01:06 AM IST
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धानापुर। धानापुर विकास मंच के कार्यकर्ताओं की बैठक रविवार को डबरिया स्थित समाजसेवी राधेश्याम सिंह के आवास पर हुई। जिसमें प्रस्तावित तहसील, मुंसिफ कोर्ट और चोचकपुर में गंगा पर पुल की मांग को लेकर संघर्ष करने के लिए संकल्प लिया गया। इस दौरान क्षेत्र के विकास में अनदेखी करने पर जनप्रतिनिधियों की लचर कार्य शैली पर तीखा प्रहार किया।
बैठक में मंच के संयोजक गोविंद उपाध्याय ने कहा कि जिले की उत्तरी सीमा छोर पर स्थित महाइच एवं बरह परगने की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए धानापुर में तहसील, मुंसफ कोर्ट और चोचकपुर में गंगा पार पुल निर्माण का होना बेहद जरूरी है। क्योंकि इसके बिना क्षेत्र विकास के पैमाने पर खरा नहीं उतर सकता है। लेकिन जन सरोकार से जुड़े इस मुद्दे पर ना जाने क्यों अभी तक हमारे जन प्रतिनिधि मौन हैं। कहा कि ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि क्षेत्र के विकास और सम्मान के लिए आम जनता के सहयोग एवं सकारात्मक संघर्ष किया जाय। डाबरिया इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य एवं समाजसेवी राधेश्याम सिंह ने संघर्ष के लिए चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाने पर बल दिया। इस दौरान कई वक्ताओं ने विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला और संघर्ष करने का संकल्प दोहराया। इस दौरान हरवंश सिंह, कमला कांत मिश्र, नवनागर सिंह, रामचंद्र उपाध्याय, वीरेंद्र सिंह, दयाशंकर तिवारी, डा. राम अनुज यादव, नरेंद्र प्रताप सिंह, गुड्डू यादव, सजीव यादव, रविकांत, राजकुमार सिंह, अवधेश राम, विभूति प्रसाद, आरिफ खान, फतहुल इस्लाम, शियाराम तिवारी, रामप्रवेश सिंह, राजीव मौर्य आदि मौजूद रहे। संचालन मृत्युंजय सिंह ने किया।
बैठक में मंच के संयोजक गोविंद उपाध्याय ने कहा कि जिले की उत्तरी सीमा छोर पर स्थित महाइच एवं बरह परगने की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए धानापुर में तहसील, मुंसफ कोर्ट और चोचकपुर में गंगा पार पुल निर्माण का होना बेहद जरूरी है। क्योंकि इसके बिना क्षेत्र विकास के पैमाने पर खरा नहीं उतर सकता है। लेकिन जन सरोकार से जुड़े इस मुद्दे पर ना जाने क्यों अभी तक हमारे जन प्रतिनिधि मौन हैं। कहा कि ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि क्षेत्र के विकास और सम्मान के लिए आम जनता के सहयोग एवं सकारात्मक संघर्ष किया जाय। डाबरिया इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य एवं समाजसेवी राधेश्याम सिंह ने संघर्ष के लिए चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाने पर बल दिया। इस दौरान कई वक्ताओं ने विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला और संघर्ष करने का संकल्प दोहराया। इस दौरान हरवंश सिंह, कमला कांत मिश्र, नवनागर सिंह, रामचंद्र उपाध्याय, वीरेंद्र सिंह, दयाशंकर तिवारी, डा. राम अनुज यादव, नरेंद्र प्रताप सिंह, गुड्डू यादव, सजीव यादव, रविकांत, राजकुमार सिंह, अवधेश राम, विभूति प्रसाद, आरिफ खान, फतहुल इस्लाम, शियाराम तिवारी, रामप्रवेश सिंह, राजीव मौर्य आदि मौजूद रहे। संचालन मृत्युंजय सिंह ने किया।
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