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पूर्व विधायक की बेटी उड़ाएगी जहाज
Updated Sat, 20 Jan 2018 12:52 AM IST
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मुगलसराय।अगर कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो बाधाएं भी रास्ता बदल देती हैं। हौसलों में जान हो तो मंजिलें भी कदम चुमने लगती हैं। कुछ ऐसे ही इरादे के बल पर जनपद की पहली महिला पायलट होने का गौरव हासिल किया है। जनपद के सैयदराजा विधानसभा क्षेत्र से पहले विधायक रहे मनोज सिंह की बेटी शिरिषा सिंह।
पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू की तीन संतान हैं। प्रशांत सिंह, दो बेटी बड़ी बहन शिल्पी व छोटी शिरिषा है।बड़ी बेटी शिल्पी सिंह ने कंप्यूटर साइंस से बीटेक व बेटा प्रशांत सिंह सिविल इंजिनीयरिंग किया है। छोटी बेटी शिरिषा हैदराबाद स्थित उस्मानिया विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक में इंजीनियरिंग की शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद वह पायलट की ट्रेनिंग पूरी की। ट्रेनिंग के बाद उसका सेलेक्शन एयरलाइंस में महिला पायलट के पद पर हुआ। शिरिषा बचपन से ही कुशाग्र व हिम्मत वाली लड़की थी। हौसलों के आगे मंजिल भी घुटने टेकने को विवश हो जाती है। 2012के विधान सभा चुनाव में अपने पिता के लिए वोट की भावुक अपील की थी। जिसका नतीजा रहा की उनके पिता मनोज निर्दलय विधायक बने। शिरिषा ने लड़कियों को प्रेरणा देते हुए बताया कि लड़कियों को अपनी मंजिल खुद तय करनी होगी। उसी के आधार पर लक्ष्य का पीछा करना चाहिए। उसने अपनी सफलता का श्रेय माता नीलू व पिता के साथ भाई व बहन को दिया।बताया कि उनके सहयोग के बल पर ही मैं मंजिल पा सकी।शिरिषा ने अपने दादा रामअवध सिंह को प्रेरणास्रोत बताया कहा कि उनके निर्देशन में ही आगे बढ़ी।बेटी की सफलता पर पूरा जनपद ही गौरवान्वित है।
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पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू की तीन संतान हैं। प्रशांत सिंह, दो बेटी बड़ी बहन शिल्पी व छोटी शिरिषा है।बड़ी बेटी शिल्पी सिंह ने कंप्यूटर साइंस से बीटेक व बेटा प्रशांत सिंह सिविल इंजिनीयरिंग किया है। छोटी बेटी शिरिषा हैदराबाद स्थित उस्मानिया विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक में इंजीनियरिंग की शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद वह पायलट की ट्रेनिंग पूरी की। ट्रेनिंग के बाद उसका सेलेक्शन एयरलाइंस में महिला पायलट के पद पर हुआ। शिरिषा बचपन से ही कुशाग्र व हिम्मत वाली लड़की थी। हौसलों के आगे मंजिल भी घुटने टेकने को विवश हो जाती है। 2012के विधान सभा चुनाव में अपने पिता के लिए वोट की भावुक अपील की थी। जिसका नतीजा रहा की उनके पिता मनोज निर्दलय विधायक बने। शिरिषा ने लड़कियों को प्रेरणा देते हुए बताया कि लड़कियों को अपनी मंजिल खुद तय करनी होगी। उसी के आधार पर लक्ष्य का पीछा करना चाहिए। उसने अपनी सफलता का श्रेय माता नीलू व पिता के साथ भाई व बहन को दिया।बताया कि उनके सहयोग के बल पर ही मैं मंजिल पा सकी।शिरिषा ने अपने दादा रामअवध सिंह को प्रेरणास्रोत बताया कहा कि उनके निर्देशन में ही आगे बढ़ी।बेटी की सफलता पर पूरा जनपद ही गौरवान्वित है।
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