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सूखने के कगार पर पहुंची गंगा, जगह-जगह उभरे रेत के टीले

Fri, 07 Jun 2019 12:44 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 07 Jun 2019 12:44 AM IST
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सूखने के कगार पर पहुंची गंगा, जगह-जगह उभरे रेत के टीले

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पीडीडीडीयू नगर। भीषण गर्मी में जीवनदायिनी सदानीरा गंगा सिमटने लगी हैं। लगातार कम हो रहे पानी के चलते गंगा में जगह-जगह रेत के टीले उभर आए हैं। बीच बीच में पानी की धारा दिख रही है। इस स्थिति के देख कर गंगा के तटवर्ती इलाके के लोग चिंतित हैं। क्षेत्रीय लोगों की माने तो पिछले दो-तीन दशक में गंगा का जल स्तर इतना नीचे कभी नहीं गया था। जल स्तर कम होने की वजह से गंगा के तट से दो किलोमीटर तक के एरिया में हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है। यदि यही स्थिति रही और बारिश कम हुई तो सिंचाई के लिए भी मुश्किल हो जाएगी और पानी के लिए लोग तरसेंगे।
वाराणसी से सटे चंदौली जनपद में गंगा तीन ब्लाकों नियामताबाद, चहनियां और धानापुर ब्लाक से होकर गुजरती है। गंगा के तट पर 45 ग्राम पंचायते हैं। जिले में खेतों की सिंचाई का बड़ा साधन गंगा नहर और लिफ्ट कैनाल है। नरायनपुर पंप कैनाल, भूपौली पंप कैनाल और बलुआ पंप कैनाल के अलावा गुरैनी, रायपुर, और मेढ़वा में लिफ्ट पंप कैनाल बनाए गए हैं। तटवर्ती इलाके के लोगों की माने तो वर्ष दर वर्ष गंगा की हालत दयनीय होती जा रही है। पहले जनपद में सूखा पड़ने की स्थिति में भी गंगा के पानी से सिंचाई हो जाती थी लेकिन टिहरी बांध निर्माण के मार्च आते आते गंगा में रेत के टीले उभरने लगते हैं। इस वर्ष तो फरवरी माह में ही रेत के टीले उभर आए। इस वर्ष जून माह में गंगा का जल पाताल में समाता जा रहा है। बलुआ में वाराणसी के सिरसवल क्षेत्र में तट से एक किलोमीटर दूर गंगा चली आई है। वहीं बलुआ में घाट जो सीढ़ी हमेशा पानी में डूबी रहती थी, पानी से दूर हो रही है। जल स्तर कम होने से तटवर्ती नियमताबाद ब्लाक के कुंडा खुर्द, कुुंडा कला, बहादुरपुर, सहजौर, रौना, मवई कला, चहनियां ब्लाक के कुरहना, कैली, भूपौली, डेरवां, महुअरिया, बलुआ, महुअर, पूरा विजयी, पूरा गनेश, सोनवरसा, टांडा, सरौली, महमदपुर, भूसौला, हसनपुर, नादी, बरगांवा, निधौरा, धानापुर ब्लाक के कवलपुरा, सोनहुली, नरौली, बुद्धपुर, महुजी, नगवां, गुरैनी, पपरौल, दीया, प्रसहटा, रायपुर, मेढवा के लोग चिंतित हैं। चहनियां संवाददाता के अनुसार बलुआ के शिव कुमार सिंह, सराय के क्षमा शंकर मिश्र, प्रदीप मिश्र, महुअर निवासी सीताराम यादव, पूरा गनेश के दिनेश निषाद, टांडा के विजयनरायन पांडेय, राजमणि पांडेय, हसनपुर भुसौला के शिवशंकर यादव, नादी निधौरा के राजाराम यादव आदि ने बताया कि हाल में वर्षों में गंगा की स्थिति पहली बार दयनीय दिख रही है। 15 जून माना जाता है कि गंगा का जल स्तर बढ़ता है लेकिन इस वर्ष मौसम वैज्ञानिकों ने भी कम बारिश की आशंका जताई है। ऐसे में खेतों की सिंचाई के साथ पेयजल का संकट हो सकता है।
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ड्राइजोन में तब्दील हो रहे गंगा के तटवर्ती गांव
गंगा किनारे करीब 100 गांवों के हैंडपंपों ने दिया जवाब

अमर उजाला ब्यूरो
सचित्र-
पीडीडीयू नगर। जिले में पेयजल उपलब्धता की स्थिति चिंताजनक है। पहाड़ों पर बसे नौगढ़ इलाके के साथ गंगा के तटवर्ती सैकड़ों गांव तो ड्राईजोन में तब्दील हो चुके हैं। पानी पाताल में जाने की वजह से हैंडपंप सूखने लगे हैं। वहीं विभागीय लापरवाही की वजह से भी चार हजार हैंडपंप बेकार पड़े हैं।
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जिले में अत्यधिक जल दोहन और पानी संरक्षण की व्यवस्था न होने की वजह से जिले के सैकड़ो गांव ड्राइजोन में तब्दील होने लगे हैं। स्थिति यह है कि इन गांवों के प्रधानों के सहायता के लिए मुख्यमंत्री से गुहार लगानी पड़ रही है। पहाड़ पर बसे नौगढ़ ब्लाक तो लंबे समय से पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं। इस वर्ष जल निगम 38 टैंकरों की मदद से पानी आपूर्ति कर रहा है। दूसरी तरफ मैदानी इलाके में गंगा के तटवर्ती 45 ग्राम पंचायतों केे साथ तट से दो किलोमीटर तक की एरिया में बसे गांवों में भूजल काफी नीचे चला गया है। नियामताबाद ब्लाक के कुंडा खुर्द, कुुंडा कला, बहादुरपुर, सहजौर, रौना, मवई कला, चहनियां ब्लाक के कुरहना, कैली, भूपौली, डेरवां, महुअरिया, बलुआ, महुअर, पूरा विजयी, पूरा गनेश, सोनवरसा, टांडा, सरौली, महमदपुर, भूसौला, हसनपुर, नादी, बरगांवा, निधौरा, धानापुर ब्लाक के कवलपुरा, सोनहुली, नरौली, बुद्धपुर, महुजी, नगवां, गुरैनी, पपरौल, दीया, प्रसहटा, रायपुर, मेढवा सहित सौ से अधिक गांवों में पानी के लिए मारामारी की स्थिति है। विभाग के अनुसार जिले में 29 हजार 638 हैंडपंप स्थापित हैं। इसमें 38 सौ हैंडपंप सूखे हैं। 3155हैंडपंप के रिबोर की आवश्यकता है वहीं 650 की मरम्मत की आवश्यकता है। इस संबंध में जल निगम के एक्सईएन एके शर्मा ने बताया कि हैंडपंपों के मरम्मत की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दी गई है। ड्राइजोन इलाक में टैंकर से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
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