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प्रत्याशी नहीं, दिग्गज सपा नेता की हार
Updated Mon, 04 Dec 2017 12:57 AM IST
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मुगलसराय। चुनाव में हार जीत तो लगा रहता है लेकिन सपा प्रत्याशी की हार नगर में चर्चा का विषय बन गया है। और तो और सपा के कार्यकर्ता भी कहने लगे है कि यह सपा प्रत्याशी नहीं जिले के दिग्गज नेता की हार हुई है। क्योंकि सीट जीत कर लाने के वादे के साथ उन्होंने महेन्द्र सोनकर को टिकट दिलवाया था। सपा की प्रत्याशी चयन समिति के पैनल में जिन प्रत्याशियों का नाम भेजा गया था उसमें सपा के बागी राजाराम सोनकर का नाम भी था। जो निर्दल मैदान में कूदे और सपा नेताओं को अपनी हैसियत का लोहा मनवा दिया।
सपा कार्यकर्ताओं की माने तो जिले के एक दिग्गज नेता ने महेन्द्र सोनकर को अध्यक्ष का टिकट दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। जबकि निकाय चुनाव के पूर्व में सपा प्रत्याशी महेन्द्र सोनकर की राजनीतिक हिस्सेदारी न के बराबर रही। जिले के एक कद्दावर नेता ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से वादा किया था कि वे मुगलसराय नगर पालिका की सीट जीत कर ले आएंगे। प्रदेश संगठन द्वारा प्रत्याशी का ऐलान के बाद जिले सपाई आश्चर्य चकित थे कि ऊपर से प्रत्याशी कैसे टपक पड़ा। लेकिन जब हाई कमान ने निर्णय कर दिया तो कोई नेता इसका विरोध नहीं कर सका। लेकिन चेयरमैन के टिकट के प्रमुख दावेदार राजाराम सोनकर को पार्टी का फैसला रास नहीं आया और उन्होने बगावती तेवर अपना लिया। राजाराम ने निर्दल ही मैदान में उतने का फैसला किया। चुनाव परिणाम आने के बाद जिले के सपा नेताओं को राजाराम के कद का पता चला। जिसमें सपा प्रत्याशी महेन्द्र सोनकर को 10782 और सपा के बागी निर्दल प्रत्याशी राजाराम को 4202 मत प्राप्त हुआ। अब पार्टी की हार हो गई तो खुद कार्यकर्ता ही दिग्गज नेता की जिद पर सवाल दाग रहे है। कईयों ने तो यहां तक कह दिया कि दिग्गज नेता ने अपने स्वार्थ के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष और संगठन को भ्रमित करके गैर राजनीतिक व्यक्ति को टिकट दिलवाया। जिससे पार्टी को नगर पालिका चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा।
सपा कार्यकर्ताओं की माने तो जिले के एक दिग्गज नेता ने महेन्द्र सोनकर को अध्यक्ष का टिकट दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। जबकि निकाय चुनाव के पूर्व में सपा प्रत्याशी महेन्द्र सोनकर की राजनीतिक हिस्सेदारी न के बराबर रही। जिले के एक कद्दावर नेता ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से वादा किया था कि वे मुगलसराय नगर पालिका की सीट जीत कर ले आएंगे। प्रदेश संगठन द्वारा प्रत्याशी का ऐलान के बाद जिले सपाई आश्चर्य चकित थे कि ऊपर से प्रत्याशी कैसे टपक पड़ा। लेकिन जब हाई कमान ने निर्णय कर दिया तो कोई नेता इसका विरोध नहीं कर सका। लेकिन चेयरमैन के टिकट के प्रमुख दावेदार राजाराम सोनकर को पार्टी का फैसला रास नहीं आया और उन्होने बगावती तेवर अपना लिया। राजाराम ने निर्दल ही मैदान में उतने का फैसला किया। चुनाव परिणाम आने के बाद जिले के सपा नेताओं को राजाराम के कद का पता चला। जिसमें सपा प्रत्याशी महेन्द्र सोनकर को 10782 और सपा के बागी निर्दल प्रत्याशी राजाराम को 4202 मत प्राप्त हुआ। अब पार्टी की हार हो गई तो खुद कार्यकर्ता ही दिग्गज नेता की जिद पर सवाल दाग रहे है। कईयों ने तो यहां तक कह दिया कि दिग्गज नेता ने अपने स्वार्थ के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष और संगठन को भ्रमित करके गैर राजनीतिक व्यक्ति को टिकट दिलवाया। जिससे पार्टी को नगर पालिका चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा।
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