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Chandauli News: 13 विद्यालयों में कहीं चार दिन तो कहीं चार महीने से भरा पानी, नौ में पढ़ाई बंद
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शहाबगंज कम्पोजिट विद्यालय में हुआ जलभराव। संवाद
बारिश और लापरवाही के कारण जिले के 13 विद्यालयों में सीवर व बारिश का पानी जमा हो गया है। इनमें से नौ विद्यालय तो जलभराव की वजह से पूरी तरह से ही बंद कर दिए गए हैं। यहां पठन पाठन ठप है।
वहीं चार विद्यालयों के छात्र-छात्राएं और शिक्षक गंदे पानी से होकर विद्यालय आने-जाने को मजबूर हैं। यह पहली बार नहीं हुआ है। विद्यालयों में जलनिकासी की व्यवस्था न होने से हर बारिश में विद्यार्थियों को यह दर्द झेलना पड़ता है। विडंबना यह कि जिले के आलाधिकारियों को यह दर्द नहीं दिखाई देता। संवाद
नियामताबाद के नौ विद्यालय बंद, बीएसए कार्यालय जा रहे शिक्षक
बारिश की वजह से विकास खंड के शिवनाथपुर, चन्दाईत, उसडौरी, तकिया, पचोखर, हसनपुरकम्हरिया, रोहणा, नरैना और महदेऊर गांव में कम्पोजिट और प्राथमिक विद्यालयों में पानी भरने से पठन पाठन बंद कर दिया गया है। सभी अध्यापक सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर कार्य कर रहे हैं।
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शहाबगंज कस्बा स्थित कम्पोजिट विद्यालय शहाबगंज में भारी बरसात ने शिक्षण कार्य को प्रभावित कर दिया है। वर्षा के चलते विद्यालय परिसर में चारों ओर पानी भर गया है। इससे बच्चों के आने-जाने में दिक्कत हो रही है। प्रधानाध्यापक बबीता ने बताया कि विद्यालय में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं है। जिसकी वजह से हर साल विद्यालय परिसर में जलभराव हो जाता है, इस बार हालात और अधिक गंभीर हैं। वहीं पानी भरने से बच्चों में संक्रामक बीमारियों के होने की भी आशंका बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से न तो पानी निकालने की व्यवस्था की गई है और न ही ब्लीचिंग आदि पाउडर का छिड़काव ही हो पाया है।
सीवर का पानी भरने से बच्चों ने छोड़ा स्कूल
दुलहीपुर के बीपी हायर सेकेंडरी स्कूल में पिछले चार महीने से बारिश के अलावा आसपास के गांवों का सीवर का पानी भरा हुआ है। स्कूल के बाहर गेट पर 60 मीटर से ज्यादा और अंदर पूरे परिसर में घुटने पर पानी जमा है। स्कूल में गंदा पानी भरने से कुल 767 में से 383 बच्चे पढ़ने नहीं आ रहे हैं। वहीं जो आ रहे हैं उनमें से भी रोजाना कोई न कोई बच्चा गंदे पानी में फिसलकर गिर जाता है। प्रधानाचार्य किशोर कुमार ने बताया कि हर वर्ष हम दो से तीन बार जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को पत्र भेजकर समस्या का समाधान कराने की मांग करते हैं लेकिन कोई झांकने तक नहीं आता। यह समस्या 15 वर्षों से भी ज्यादा समय से इसी तरह है। संवाद
स्कूल जाने के लिए रास्ता ही नहीं, पानी से होकर आना- जाना मजबूरी-
कंदवा क्षेत्र के दैथा गांव में पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय तक जाने के लिए रास्ते का निर्माण नहीं कराया गया है। जिससे बारिश होने पर बच्चों और शिक्षकों को स्कूल पहुंचने के लिए पानी से भरे खेत से होकर जाना पड़ता है। शिक्षक अपनी बाइक दो सौ मीटर दूर खड़ी कर स्कूल पहुंचते हैं। स्कूल के पास नाली बनाए जाने के लिए पाइप एक वर्ष पहले ही गिराई जा चुकी है। नाली का निर्माण न होने और पाइप होने के चलते बच्चों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। यहां राजकीय विद्यालय भी चलता है जिसमें छात्राएं शिक्षा ग्रहण करती हैं। मगर स्कूल तक जाने के लिए पूरा रास्ता नहीं बन पाया है। संवाद
विद्यालय में पानी भरा, घरों से नहीं निकल रहे बच्चे
इलिया क्षेत्र के बराव गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय में बारिश के बाद पूरी तरीके से पानी भरा हुआ है। मुख्य द्वार से लेकर कक्षाओं तक कीचड़ और पानी जमा होने के कारण छात्र-छात्राओं को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रधानाध्यापक संजय कुमार निराला ने बताया कि लगातार शिकायतों के बावजूद निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई। बारिश रुकने के बाद भी विद्यालय परिसर से पानी नहीं निकाला जा सका है, जिससे पठन-पाठन पूरी तरह बाधित हो गया है। बच्चे मजबूरन घरों में रह रहे हैं और कक्षाएं बंद पड़ी हैं। ग्राम प्रधान अभय सिंह ने जिला प्रशासन से मांग किया कि तत्काल जलनिकासी की व्यवस्था कर विद्यालय और पंचायत भवन परिसर को जलभराव से मुक्त कराया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई और विकास कार्य दोबारा शुरू हो सके।
नियामताबाद विकासखंड के 9 के करीब विद्यालयों मेें बारिश के बाद बाढ़ का पानी भरा हुआ है। वहां पठन-पाठन का कार्य बंद हो गया हे। वहां के सभी अध्यापक एबीएसए कार्यालय पर काम कर रहे हैं। -मनोज यादव, सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी, नियामताबाद
जिले के जिन भी विद्यालयों में बारिश की वजह से पठन-पाठन बंद है वहां के बच्चों को दूसरे उन विद्यालयों में भेजा जा रहा है जहां पानी नहीं भरा है। इसके लिए सहायक खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित भी किया गया है। वहीं जिन विद्यालयों में जलनिकासी आदि की समस्या है उसके निदान के लिए मिट्टी आदि भरने का कार्य किया जाएगा।
-सचिन कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी, चंदौली
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वहीं चार विद्यालयों के छात्र-छात्राएं और शिक्षक गंदे पानी से होकर विद्यालय आने-जाने को मजबूर हैं। यह पहली बार नहीं हुआ है। विद्यालयों में जलनिकासी की व्यवस्था न होने से हर बारिश में विद्यार्थियों को यह दर्द झेलना पड़ता है। विडंबना यह कि जिले के आलाधिकारियों को यह दर्द नहीं दिखाई देता। संवाद
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नियामताबाद के नौ विद्यालय बंद, बीएसए कार्यालय जा रहे शिक्षक
बारिश की वजह से विकास खंड के शिवनाथपुर, चन्दाईत, उसडौरी, तकिया, पचोखर, हसनपुरकम्हरिया, रोहणा, नरैना और महदेऊर गांव में कम्पोजिट और प्राथमिक विद्यालयों में पानी भरने से पठन पाठन बंद कर दिया गया है। सभी अध्यापक सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर कार्य कर रहे हैं।
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शहाबगंज कस्बा स्थित कम्पोजिट विद्यालय शहाबगंज में भारी बरसात ने शिक्षण कार्य को प्रभावित कर दिया है। वर्षा के चलते विद्यालय परिसर में चारों ओर पानी भर गया है। इससे बच्चों के आने-जाने में दिक्कत हो रही है। प्रधानाध्यापक बबीता ने बताया कि विद्यालय में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं है। जिसकी वजह से हर साल विद्यालय परिसर में जलभराव हो जाता है, इस बार हालात और अधिक गंभीर हैं। वहीं पानी भरने से बच्चों में संक्रामक बीमारियों के होने की भी आशंका बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से न तो पानी निकालने की व्यवस्था की गई है और न ही ब्लीचिंग आदि पाउडर का छिड़काव ही हो पाया है।
सीवर का पानी भरने से बच्चों ने छोड़ा स्कूल
दुलहीपुर के बीपी हायर सेकेंडरी स्कूल में पिछले चार महीने से बारिश के अलावा आसपास के गांवों का सीवर का पानी भरा हुआ है। स्कूल के बाहर गेट पर 60 मीटर से ज्यादा और अंदर पूरे परिसर में घुटने पर पानी जमा है। स्कूल में गंदा पानी भरने से कुल 767 में से 383 बच्चे पढ़ने नहीं आ रहे हैं। वहीं जो आ रहे हैं उनमें से भी रोजाना कोई न कोई बच्चा गंदे पानी में फिसलकर गिर जाता है। प्रधानाचार्य किशोर कुमार ने बताया कि हर वर्ष हम दो से तीन बार जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को पत्र भेजकर समस्या का समाधान कराने की मांग करते हैं लेकिन कोई झांकने तक नहीं आता। यह समस्या 15 वर्षों से भी ज्यादा समय से इसी तरह है। संवाद
स्कूल जाने के लिए रास्ता ही नहीं, पानी से होकर आना- जाना मजबूरी-
कंदवा क्षेत्र के दैथा गांव में पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय तक जाने के लिए रास्ते का निर्माण नहीं कराया गया है। जिससे बारिश होने पर बच्चों और शिक्षकों को स्कूल पहुंचने के लिए पानी से भरे खेत से होकर जाना पड़ता है। शिक्षक अपनी बाइक दो सौ मीटर दूर खड़ी कर स्कूल पहुंचते हैं। स्कूल के पास नाली बनाए जाने के लिए पाइप एक वर्ष पहले ही गिराई जा चुकी है। नाली का निर्माण न होने और पाइप होने के चलते बच्चों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। यहां राजकीय विद्यालय भी चलता है जिसमें छात्राएं शिक्षा ग्रहण करती हैं। मगर स्कूल तक जाने के लिए पूरा रास्ता नहीं बन पाया है। संवाद
विद्यालय में पानी भरा, घरों से नहीं निकल रहे बच्चे
इलिया क्षेत्र के बराव गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय में बारिश के बाद पूरी तरीके से पानी भरा हुआ है। मुख्य द्वार से लेकर कक्षाओं तक कीचड़ और पानी जमा होने के कारण छात्र-छात्राओं को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रधानाध्यापक संजय कुमार निराला ने बताया कि लगातार शिकायतों के बावजूद निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई। बारिश रुकने के बाद भी विद्यालय परिसर से पानी नहीं निकाला जा सका है, जिससे पठन-पाठन पूरी तरह बाधित हो गया है। बच्चे मजबूरन घरों में रह रहे हैं और कक्षाएं बंद पड़ी हैं। ग्राम प्रधान अभय सिंह ने जिला प्रशासन से मांग किया कि तत्काल जलनिकासी की व्यवस्था कर विद्यालय और पंचायत भवन परिसर को जलभराव से मुक्त कराया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई और विकास कार्य दोबारा शुरू हो सके।
नियामताबाद विकासखंड के 9 के करीब विद्यालयों मेें बारिश के बाद बाढ़ का पानी भरा हुआ है। वहां पठन-पाठन का कार्य बंद हो गया हे। वहां के सभी अध्यापक एबीएसए कार्यालय पर काम कर रहे हैं। -मनोज यादव, सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी, नियामताबाद
जिले के जिन भी विद्यालयों में बारिश की वजह से पठन-पाठन बंद है वहां के बच्चों को दूसरे उन विद्यालयों में भेजा जा रहा है जहां पानी नहीं भरा है। इसके लिए सहायक खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित भी किया गया है। वहीं जिन विद्यालयों में जलनिकासी आदि की समस्या है उसके निदान के लिए मिट्टी आदि भरने का कार्य किया जाएगा।
-सचिन कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी, चंदौली

शहाबगंज कम्पोजिट विद्यालय में हुआ जलभराव। संवाद