{"_id":"5a68e2a64f1c1b88268b6723","slug":"11516823206-chandauli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच मनाया राष्ट्रीय बालिका दिवस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच मनाया राष्ट्रीय बालिका दिवस
Updated Thu, 25 Jan 2018 01:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कंदवा। क्षेत्र के बरहनी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में गुरुवार को राष्ट्रीय बालिका दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया। इस दौरान कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय बरहनी की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत नाटक ऽभ्रूण हत्याऽ और ऽघर की रौनक हैं बेटियां ऽ ने सबको झकझोर कर रख दिया।
इस अवसर पर प्रभारी चिकित्साधिकरी बरहनी डाक्टर रितेश कुमार ने कहा कि देश की बहुत बड़ी विडंबना है कि हम बालिकाओं का तो कन्या-पूजन जैसे धार्मिक अवसरों पर पूजन करते हैं , लेकिन जब खुद के घर बालिका जन्म लेती है तो माहौल मातम सा बना लेते हैं। यह हालात देश के हर हिस्से में है, लेकिन हरियाणा और राजस्थान के हालात तो बहुत ज्यादा खराब है। यहां बच्चियों को अभिशाप तक माना जाता है। कन्याओं को अभिशाप मानने वाले यह भूल जाते हैं कि वह उस देश के वासी हैं जहां देवी दुर्गा को कन्या रूप में पूजने की प्रथा है ।वह भूल जाते हैं कि वह उस देश के नागरिक हैं जहां रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाओं ने समाज के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए । कहा कि जो लोग कन्याओं को बोझ मानते हैं उन्हें ही सही रास्ते पर लाने और कन्या-शक्ति को जनता के सामने लाने के लिए हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय कन्या दिवस मनाया जाता है ।इस दौरान डाक्टर गौरव नंदन , डाक्टर एसपी त्यागी , सूर्यप्रकाश ,चंद्रा किरण , शिल्पी वर्मा , वंदना , रोशन अली आदि लोग मौजूद रहे ।
इस अवसर पर प्रभारी चिकित्साधिकरी बरहनी डाक्टर रितेश कुमार ने कहा कि देश की बहुत बड़ी विडंबना है कि हम बालिकाओं का तो कन्या-पूजन जैसे धार्मिक अवसरों पर पूजन करते हैं , लेकिन जब खुद के घर बालिका जन्म लेती है तो माहौल मातम सा बना लेते हैं। यह हालात देश के हर हिस्से में है, लेकिन हरियाणा और राजस्थान के हालात तो बहुत ज्यादा खराब है। यहां बच्चियों को अभिशाप तक माना जाता है। कन्याओं को अभिशाप मानने वाले यह भूल जाते हैं कि वह उस देश के वासी हैं जहां देवी दुर्गा को कन्या रूप में पूजने की प्रथा है ।वह भूल जाते हैं कि वह उस देश के नागरिक हैं जहां रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाओं ने समाज के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए । कहा कि जो लोग कन्याओं को बोझ मानते हैं उन्हें ही सही रास्ते पर लाने और कन्या-शक्ति को जनता के सामने लाने के लिए हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय कन्या दिवस मनाया जाता है ।इस दौरान डाक्टर गौरव नंदन , डाक्टर एसपी त्यागी , सूर्यप्रकाश ,चंद्रा किरण , शिल्पी वर्मा , वंदना , रोशन अली आदि लोग मौजूद रहे ।
विज्ञापन